गोकुल डेयरी बोर्ड पर सियासी घमासान: कैबिनेट के फैसले पर भड़के राहुल गांधी, सीएम देवेंद्र फडणवीस का तीखा पलटवार
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल डेयरी) के बोर्ड अध्यक्ष चुनाव को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। राहुल गांधी के आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया है।

- कोल्हापुर की गोकुल डेयरी में अध्यक्ष पद को लेकर रार, 13 बनाम 12 के फेर में फंसा 25 सदस्यीय बोर्ड
- 'जनादेश में मिलावट' के आरोप पर फडणवीस का राहुल गांधी पर तंज, बोले- स्थानीय संस्था के मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बना रही कांग्रेस
- कोरम के अभाव में अटका गोकुल डेयरी अध्यक्ष का चुनाव, सरकार के नए फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में कांग्रेस
मुंबई/कोल्हापुर: पश्चिमी महाराष्ट्र की सबसे शक्तिशाली सहकारी संस्थाओं में गिनी जाने वाली 'कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ' (गोकुल डेयरी) के बोर्ड में अध्यक्ष पद को लेकर छिड़ा विवाद अब दिल्ली तक पहुंच चुका है। महाराष्ट्र कैबिनेट द्वारा सहकारी नियमों में बदलाव के प्रस्ताव के बाद विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) और सत्तारूढ़ महायुति के बीच टकराव तेज हो गया है। इस विवाद में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कूदने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार करते हुए इसे स्थानीय संस्था का मामला बताया है।
यह पूरा विवाद अक्टूबर में 25 सदस्यीय निदेशक मंडल के चुनाव के बाद सामने आया। चुनाव परिणामों में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले समविचारी पैनल ने 13 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि सत्तारूढ़ महायुति समर्थित पैनल के खाते में 12 सीटें आईं।
- 29 अक्टूबर की बैठक और कोरम का तकनीकी पेच
बहुमत हासिल करने के बाद 29 अक्टूबर को अध्यक्ष के चयन के लिए बुलाई गई आधिकारिक बैठक में महायुति पैनल के सभी 12 निदेशक अनुपस्थित रहे। नियमों के तहत 25 सदस्यीय बोर्ड में बैठक का कोरम पूरा करने के लिए कम से कम 14 निदेशकों (कुल सदस्यों का आधे से अधिक) की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य थी।
कोरम पूरा न होने के बावजूद सतेज पाटिल समर्थित 13 निदेशकों ने एक अलग बैठक में शशिकांत पाटिल चुयेकर को गोकुल डेयरी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया। हालांकि, सक्षम सहकारी चुनाव प्रशासन ने 14 निदेशकों का कोरम पूरा न होने का हवाला देते हुए इस चुनाव को आधिकारिक मान्यता देने से इनकार कर दिया।
- कैबिनेट का फैसला और राहुल गांधी का 'जनादेश में मिलावट' का आरोप
कोरम के अभाव में बैठकें स्थगित होने के बीच महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी अधिनियम में संशोधन कर बोर्ड में चार सरकारी निदेशकों को वोटिंग अधिकार के साथ मनोनीत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि जब दूध उत्पादकों ने भाजपा समर्थित गुट को हरा दिया, तो सरकार ने चुनाव के बाद नियम बदलने की कोशिश की। राहुल गांधी ने कहा कि बोर्ड में बाहर से चार निदेशक जोड़कर 12 को 16 बनाने और बहुमत छीनने की यह कवायद दूध उत्पादकों के जनादेश में 'मिलावट' और वोटों की चोरी है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और एमएलसी सतेज पाटिल ने भी इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए फैसले को अदालत में चुनौती देने की चेतावनी दी है।
- मुख्यमंत्री फडणवीस का पलटवार: 'फैसला कानूनी दायरे में'
नागपुर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि गोकुल में महज करीब 4,500 मतदाता हैं, लेकिन कांग्रेस नेता दिल्ली में बैठकर इस पर टिप्पणी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 25 सदस्यीय बोर्ड में किसी भी एक गुट को स्पष्ट 14 सदस्यों का कोरम प्राप्त नहीं था। कोरम के अभाव में अध्यक्ष चयन की बैठक दो बार रद्द हो चुकी थी और यदि यह तीसरी बार रद्द होती तो पूरी चुनाव प्रक्रिया ही निरस्त होने का खतरा था। फडणवीस के अनुसार, राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) से कानूनी राय लेने के बाद ही प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने के लिए कानून के तहत यह निर्णय लिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच खींचतान जारी है और अध्यक्ष पद के चुनाव का मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर खिंचता नजर आ रहा है।
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