Delhi Pollution Crisis: दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में हवा हुई बेहद गंभीर, 22 स्टेशनों पर एक्यूआई 400 के पार
दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। 22 से अधिक निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 400 के पार दर्ज किया गया, जिससे पाबंदियां सख्त हो गई हैं।

- Delhi Air Quality Emergency: राजधानी में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा, ग्रैप-3 की पाबंदियों को लेकर बढ़ी हलचल
- Delhi NCR Smog Alert: आनंद विहार से बवाना तक धुंध की घनी चादर, वायु गुणवत्ता बिगड़ने से सांस लेना हुआ दूभर
- Delhi Air Pollution Alert: मौसमी परिस्थितियों और शांत हवाओं से फंसा धुआं, दिल्ली के 22 से अधिक इलाकों में वायु प्रदूषण चरम पर
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में त्योहारी सीजन से ठीक पहले वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आधिकारिक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कुल 39 में से 22 से अधिक केंद्रों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 का आंकड़ा पार करते हुए 'गंभीर' (सीवियर) श्रेणी में दर्ज किया गया है। हवा की गति बेहद धीमी होने और तापमान में आई गिरावट के चलते वायुमंडल की निचली सतह पर धूल, वाहनों के धुएं और अन्य प्रदूषक तत्वों की एक घनी चादर जम गई है, जिसने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
दिल्ली के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में आनंद विहार, बवाना, जहांगीरपुरी, वजीरपुर, मुंडका, रोहिणी, विवेक विहार, सोनिया विहार और पंजाबी बाग जैसे औद्योगिक व उच्च घनत्व वाले क्षेत्र शामिल हैं। आनंद विहार स्टेशन पर एक्यूआई का स्तर 450 के करीब पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक माना जाता है। विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, इस स्तर की हवा में सांस लेना पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकता है, जबकि श्वसन रोग, दमा और हृदय रोग से जूझ रहे व्यक्तियों, बुजुर्गों तथा बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से हानिकारक साबित हो सकती है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का औसत 24 घंटे का समग्र एक्यूआई भी 390 से ऊपर दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी के ऊपरी छोर और 'गंभीर' श्रेणी की दहलीज पर है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पड़ोसी शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार 350 से 400 के बीच बना हुआ है। पूरे क्षेत्र में हवा की मंद रफ्तार के कारण स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाला उत्सर्जन वातावरण में ही फंसा रह गया है, जिसे मौसम विज्ञान में 'इंवर्जन लेयर' बनने की प्रक्रिया कहा जाता है।
सीपीसीबी द्वारा निर्धारित एक्यूआई श्रेणियां और उनका वर्गीकरण
0 से 50: अच्छा (Good) – स्वास्थ्य पर न्यूनतम या कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं।
51 से 100: संतोषजनक (Satisfactory) – संवेदनशील लोगों को मामूली असुविधा हो सकती है।
101 से 200: मध्यम (Moderate) – फेफड़े व हृदय रोगियों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
201 से 300: खराब (Poor) – लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को परेशानी।
301 से 400: बेहद खराब (Very Poor) – श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
401 से 500: गंभीर (Severe) – स्वस्थ व्यक्तियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव, सांस संबंधी समस्याएं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक के 400 के पार चले जाने के बाद ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तीसरे चरण (GRAP Stage-III) के प्रावधानों को पूरी सख्ती से लागू करने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ग्रैप-3 की नियमावली के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गैर-जरूरी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इसमें रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डा, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छोड़कर सामान्य व्यावसायिक एवं आवासीय निर्माण कार्य रोक दिए जाते हैं। इसके साथ ही स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों को पूरी तरह बंद रखने के निर्देश शामिल हैं।
सड़क परिवहन के मोर्चे पर भी नियमों को कड़ा किया गया है। ग्रैप-3 लागू होने की स्थिति में दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाले चार पहिया हल्के मोटर वाहनों (एलएमवी) के संचालन पर प्रतिबंध लागू रहता है। आवश्यक वस्तुओं और आपातकालीन सेवाओं में लगे वाहनों को ही इस नियम से छूट दी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली यातायात पुलिस की संयुक्त टीमों ने गैर-अनुपालन करने वाले वाहनों पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने के लिए प्रमुख सीमाओं और जंक्शनों पर निगरानी बढ़ा दी है।
ग्रैप स्टेज-3 के तहत लागू होने वाली प्रमुख पाबंदियां
निर्माण और विध्वंस: गैर-जरूरी सिविल निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ गतिविधियों पर सख्त रोक।
वाहनों पर प्रतिबंध: दिल्ली-एनसीआर में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाली कारों के परिचालन पर प्रतिबंध।
औद्योगिक इकाइयां: गैर-स्वीकृत ईंधन पर चलने वाले उद्योगों, स्टोन क्रशरों और खनन कार्यों पर पूर्ण रोक।
सड़क सफाई उपाय: मशीनीकृत सड़क सफाई (मैकेनिकल स्वीपिंग) और पानी के छिड़काव की आवृत्ति में वृद्धि।
धूल नियंत्रण: 500 वर्ग मीटर से बड़े सभी निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का उपयोग अनिवार्य।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में उत्तर-पश्चिमी भारत में हवा के पैटर्न में बदलाव होता है। इस दौरान सतह पर हवा की गति घटकर 4 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। कम तापमान और शांत हवाओं के कारण वातावरण का मिश्रण स्तर (मिक्सिंग डेप्थ) काफी नीचे आ जाता है, जिससे जमीन के निकट उत्पन्न होने वाला धुआं और धूल वायुमंडल में ऊपर नहीं उठ पाते। इसके अतिरिक्त, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पराली जलाने की मौसमी घटनाएं और आगामी दिवाली उत्सव के दौरान पटाखों के संभावित उपयोग से स्थिति और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आम नागरिकों को अत्यधिक प्रदूषण वाले समय, विशेष रूप से सुबह और देर शाम, बाहरी शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम से बचने की सलाह दी है। सीएक्यूएम की तकनीकी समिति स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), नगर निगम (एमसीडी), यातायात पुलिस और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
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