US Iran Talks: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत जारी और होर्मुज स्ट्रेट से बढ़ा तेल व्यापार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और तेल व्यापार में अभूतपूर्व तेजी का दावा किया।

- Donald Trump on Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- सामान्य हो रहा होर्मुज जलडमरूमध्य, कच्चे तेल की आवाजाही पहले से तेज
- Global Oil Transit Route: ट्रंप ने दी ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क की जानकारी, होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की बढ़ी आवाजाही
- US Iran Diplomatic Developments: होर्मुज जलमार्ग के सुचारू होने का दावा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न स्तरों पर राजनयिक बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यह भी दावा किया कि रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में स्थिति सामान्य हो रही है और वहां से तेल का व्यापार पहले की तुलना में कहीं अधिक गति से संचालित हो रहा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इस जलमार्ग को सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा माना जाता है, जहां से दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वक्तव्य में संकेत दिया कि हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बावजूद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच परोक्ष या प्रत्यक्ष माध्यमों से संवाद के चैनल खुले हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के निर्बाध आवागमन को बनाए रखना है। ट्रंप के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ था।
होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि जहाजों की आवाजाही को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही थीं, वे धरातल पर निराधार साबित हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि तेल टैंकरों की आवाजाही न केवल सुचारू रूप से जारी है, बल्कि व्यापारिक मात्रा के स्तर पर यह रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग डेटा और समुद्री ट्रैकिंग एजेंसियों के अनुसार, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले इस संकरे जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं, जो एशियाई तथा पश्चिमी बाजारों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह जलमार्ग केवल लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, जिसमें नौवहन योग्य लेन दोनों दिशाओं में केवल 3-3 किलोमीटर चौड़ी है। विश्व के कुल समुद्री पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 से 21 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत का अधिकांश तेल निर्यात इसी संकीर्ण जलमार्ग पर निर्भर है। दुनिया के प्रमुख तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) निर्यातकों में शामिल कतर का अधिकांश गैस निर्यात इसी जलडमरूमध्य से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।
हालांकि, ईरानी अधिकारियों की ओर से बातचीत की औपचारिक प्रकृति और शर्तों को लेकर विस्तृत आधिकारिक पुष्टि तत्काल जारी नहीं की गई है। तेहरान के राजनयिक सूत्रों का पूर्व में यह रुख रहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी सार्थक वार्ता के लिए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्रीय सुरक्षा में बाह्य हस्तक्षेप की समाप्ति आवश्यक शर्तें हैं। इसके विपरीत, वाशिंगटन का रुख यह रहा है कि समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोगियों की रक्षा के लिए वह अपनी नौसैनिक उपस्थिति को संतुलित बनाए रखेगा, साथ ही कूटनीतिक समाधान के विकल्पों पर भी काम करता रहेगा।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों पर राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान का तात्कालिक प्रभाव देखा गया। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, जब भी होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंकाएं उत्पन्न होती हैं, तब ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिलता है। ट्रंप द्वारा बातचीत जारी रहने और जलमार्ग के पूरी तरह खुले होने के दावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में सीमित नरमी और स्थिरता का रुख देखा गया है। ऊर्जा बाजार के प्रतिभागियों का मानना है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहती है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी। 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध के समय से ही होर्मुज स्ट्रेट वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और नौवहन सुरक्षा विवादों का संवेदनशील केंद्र रहा है। वर्ष 2018 में संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव में उतार-चढ़ाव देखा जाता रहा है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर विशेष टास्क फोर्स और समुद्री गश्त तैनात की जाती रही है। दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद तीसरे पक्ष के देशों (जैसे ओमान, कतर और स्विट्जरलैंड) के जरिए कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहा है। क्षेत्रीय भू-राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान चुनावी और आर्थिक रणनीतियों के एक बड़े हिस्से के रूप में भी देखा जा सकता है, जहां घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना और वैश्विक व्यापार मार्गों को सुरक्षित दिखाना प्राथमिकता में शामिल है। दूसरी ओर, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देश भी इस समुद्री गलियारे की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि उनकी संपूर्ण अर्थव्यवस्थाएं इसी समुद्री मार्ग के माध्यम से होने वाले हाइड्रोकार्बन निर्यात पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच यह प्रारंभिक संवाद किसी औपचारिक समझौते, प्रतिबंधों की समीक्षा या समुद्री सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक आचार संहिता के रूप में विकसित हो पाता है या नहीं। अमेरिकी विदेश विभाग और रक्षा मंत्रालय पेंटागन द्वारा आने वाले दिनों में इस दिशा में उठाए जाने वाले व्यावहारिक कदमों से ही इस बयान के वास्तविक प्रभाव की पुष्टि हो सकेगी।
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