SC ST Reserved Seats Rotation - 'यह संसद का काम, अदालत कानून नहीं बना सकती'; SC-ST सीटों के रोटेशन की मांग सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा की SC-ST आरक्षित सीटों को हर चुनाव में रोटेट करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने इसे संसद का नीतिगत विषय बताया।

- Supreme Court Verdict On Reservation - लोकसभा और विधानसभा में आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, इलाहाबाद HC के आदेश में दखल से इनकार
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- SC ST Reservation In Elections - हर चुनाव में नहीं बदलेंगी SC-ST आरक्षित सीटें, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा- जनप्रतिनिधियों को दें ज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय ने देश के चुनावी ढांचे और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट व्यवस्था दी है। शीर्ष अदालत ने लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों को प्रत्येक आम चुनाव में रोटेशन प्रणाली के तहत बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व फैसले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
'यह संसद का अधिकार क्षेत्र, अदालत कानून में नया प्रावधान नहीं जोड़ सकती'
सुनवाई के दौरान पीठ ने शक्ति के पृथक्करण (Separation of Powers) के संवैधानिक सिद्धांत को रेखांकित किया। पीठ ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, सीटों का आरक्षण और उनके निर्धारण का तरीका पूरी तरह से एक नीतिगत और विधायी विषय (Policy and Legislative Subject) है।
अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि न्यायपालिका विधायिका की जगह नहीं ले सकती। संविधान निर्माताओं और संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा परिसीमन अधिनियम में जो वैधानिक व्यवस्था तय की है, अदालत उसमें अपनी तरफ से 'रोटेशन' का कोई नया नियम या प्रावधान नहीं जोड़ सकती। यदि इसमें किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है, तो इसका अंतिम निर्णय केवल और केवल संसद को ही करना होगा।
- जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने और आम सहमति बनाने की छूट
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर इस अपील को खारिज करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता के लिए विधायी रास्ता खुला रखा। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि रोटेशन प्रणाली से समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिल सकता है, तो वह इस मांग के समर्थन में अपने सांसदों, विधायकों और संबंधित विधायी समितियों को औपचारिक ज्ञापन सौंप सकते हैं।
पीठ ने टिप्पणी की कि लोकतंत्र में कानून में संशोधन कराने के लिए लोकतांत्रिक और संसदीय सहमति बनाने का प्रयास करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन अदालत आदेश जारी कर संसद को ऐसा कानून बनाने के लिए निर्देशित नहीं कर सकती।
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