दिल को क्यों नहीं होता कैंसर? वैज्ञानिकों ने सुलझाई चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी गुत्थी, सामने आई हैरान करने वाली वजह।

चिकित्सा जगत में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के लगभग हर अंग को अपनी चपेट में ले सकती है, चाहे वह फेफड़े हों, लिवर हो

Apr 25, 2026 - 12:17
Apr 25, 2026 - 12:17
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दिल को क्यों नहीं होता कैंसर? वैज्ञानिकों ने सुलझाई चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी गुत्थी, सामने आई हैरान करने वाली वजह।
दिल को क्यों नहीं होता कैंसर? वैज्ञानिकों ने सुलझाई चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी गुत्थी, सामने आई हैरान करने वाली वजह।
  • हार्ट कैंसर का दुर्लभ होना कोई इत्तेफाक नहीं: रिसर्च में पता चला कैसे दिल की धड़कनें और उसका 'मैकेनिकल लोड' बनते हैं ट्यूमर के लिए ढाल
  • कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ दिल की अनूठी सुरक्षा प्रणाली: यांत्रिक दबाव और मांसपेशियों की संरचना कैसे बचाती है हमारे हृदय को जानलेवा संक्रमण से

चिकित्सा जगत में कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के लगभग हर अंग को अपनी चपेट में ले सकती है, चाहे वह फेफड़े हों, लिवर हो, हड्डियां हों या मस्तिष्क। लेकिन एक अंग ऐसा है जहां प्राथमिक कैंसर का होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, और वह है हमारा हृदय। दशकों से वैज्ञानिक इस बात पर शोध कर रहे थे कि आखिर दिल में ट्यूमर क्यों नहीं पनपते? हालिया वैज्ञानिक शोधों और प्रयोगों ने इस रहस्य से पर्दा हटाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका मुख्य कारण दिल का लगातार गतिशील रहना और उस पर पड़ने वाला 'मैकेनिकल लोड' यानी यांत्रिक दबाव है। हमारा दिल जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना रुके धड़कता है, और यही निरंतर गति कैंसर कोशिकाओं को वहां टिकने या बढ़ने का मौका नहीं देती। यह खोज भविष्य में कैंसर के इलाज की नई दिशाएं तय कर सकती है। हृदय की जैविक संरचना अन्य अंगों की तुलना में काफी भिन्न और विशिष्ट होती है। दिल मुख्य रूप से 'कार्डियोमायोसाइट्स' नामक कोशिकाओं से बना होता है। शरीर के अन्य अंगों, जैसे कि त्वचा या कोलन की कोशिकाएं बहुत तेजी से विभाजित होती हैं, जिससे उनमें म्यूटेशन और कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत, हृदय की मांसपेशी कोशिकाएं (कार्डियोमायोसाइट्स) अपने परिपक्व चरण में पहुंचने के बाद विभाजित होना लगभग बंद कर देती हैं। चूंकि कैंसर मूलतः कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन की बीमारी है, इसलिए जहां कोशिकाएं विभाजित ही नहीं होतीं, वहां कैंसर का पनपना तकनीकी रूप से बहुत कठिन हो जाता है। यह स्थिरता हृदय को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच प्रदान करती है जो इसे ट्यूमर के विकास से बचाती है। चिकित्सा सांख्यिकी के अनुसार, प्राथमिक हृदय ट्यूमर की दर 0.1 प्रतिशत से भी कम है। हालांकि, कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों से फैलकर (मेटास्टेसिस) दिल तक पहुंच सकता है, लेकिन दिल के अपने ऊतकों से कैंसर का शुरू होना चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में विरल घटनाओं में गिना जाता है।

वैज्ञानिकों ने अपने शोध में 'मैकेनिकल स्ट्रेस' या यांत्रिक तनाव की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण पाया है। दिल हर मिनट औसतन 70 से 80 बार धड़कता है, जिससे रक्त का प्रवाह बहुत तीव्र होता है। यह तीव्र प्रवाह और मांसपेशियों का लगातार संकुचन एक ऐसा वातावरण बनाता है जो ट्यूमर कोशिकाओं के लिए प्रतिकूल होता है। शोध में देखा गया कि जब कैंसर कोशिकाओं को हृदय जैसी उच्च दबाव वाली स्थितियों में रखा गया, तो उनकी विकास दर धीमी हो गई या वे नष्ट हो गईं। दिल का यह 'मैकेनिकल लोड' कोशिकाओं के भीतर मौजूद उन सिग्नलिंग रास्तों को प्रभावित करता है जो ट्यूमर के विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, दिल की धड़कन की 'धमक' कैंसर के बीज को जमने ही नहीं देती। एक अन्य महत्वपूर्ण कारक हृदय का वातावरण और वहां होने वाला रक्त प्रवाह है। हृदय शरीर का वह केंद्र है जहां से ऑक्सीजन युक्त शुद्ध रक्त पूरे शरीर में पंप किया जाता है। फेफड़ों के विपरीत, जो बाहरी हवा के सीधे संपर्क में होते हैं और कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) के प्रति संवेदनशील होते हैं, हृदय बाहरी वातावरण से सुरक्षित रूप से ढका होता है। इसके अलावा, दिल के पास अपनी कोई उपकला (Epithelial) ऊतक परत नहीं होती है, जहां से अधिकांश सामान्य कैंसर (जैसे कार्सिनोमा) शुरू होते हैं। हृदय की दीवारों का घना और पेशीय होना कैंसर कोशिकाओं को घुसपैठ करने के लिए बहुत कम जगह प्रदान करता है।

हृदय के भीतर की मेटाबॉलिक दर भी इसे कैंसर से बचाने में सहायक होती है। कार्डियोमायोसाइट्स को काम करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे फैटी एसिड के ऑक्सीकरण पर निर्भर रहते हैं। कैंसर कोशिकाएं आमतौर पर ग्लूकोज के जरिए ऊर्जा प्राप्त करती हैं (वारबर्ग प्रभाव), लेकिन हृदय का विशिष्ट ऊर्जा प्रबंधन तंत्र कैंसर कोशिकाओं के लिए पोषक तत्वों की कमी पैदा कर देता है। इसके अलावा, दिल के ऊतकों में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं। यह तनाव अक्सर डीएनए को नुकसान पहुंचाता है जो कैंसर का प्राथमिक कारण बनता है। हाल ही में प्रयोगशालाओं में किए गए बायोइंजीनियरिंग प्रयोगों से यह भी पता चला है कि हृदय की मांसपेशियों की 'कठोरता' और उनके बीच का संचार तंत्र ट्यूमर के खिलाफ सक्रिय रहता है। जब हृदय की मांसपेशियां खिंचती और सिकुड़ती हैं, तो वे कुछ ऐसे प्रोटीनों को सक्रिय करती हैं जो कोशिका मृत्यु (Apoptosis) को बढ़ावा देते हैं, विशेष रूप से उन कोशिकाओं में जो असामान्य व्यवहार करती हैं। यह एक प्रकार की स्व-सफाई प्रक्रिया है जो निरंतर जारी रहती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि हम इस यांत्रिक प्रभाव को दवाओं या थेरेपी के जरिए शरीर के अन्य अंगों में दोहरा सकें, तो कैंसर के उपचार में बड़ी सफलता मिल सकती है।

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