"भारत में शरिया और पाकिस्तानी एजेंडा मंजूर नहीं..." राकांपा विधायक सना मलिक के बयान पर नाजिया इलाही खान का तीखा हमला!
Nazia Elahi Khan vs Sana Malik: राकांपा (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक के शरिया और बहुविवाह संबंधी बयानों पर नाजिया इलाही खान ने तीखा हमला बोला है।

- Sana Malik vs Nazia Elahi Khan: सना मलिक पाकिस्तानी एजेंडा भारत में लागू करना चाहती हैं, नाजिया इलाही खान का बड़ा आरोप
- Maharashtra Politics: शरिया कानून और बहुविवाह की मांग पर विवाद, नाजिया इलाही खान ने सना मलिक को घेरा
- सियासी घमासान: 'सना मलिक भारत में चलाना चाहती हैं पाकिस्तानी एजेंडा', मुस्लिम पर्सनल लॉ और बहुविवाह पर नाजिया खान का बड़ा बयान
महाराष्ट्र की राजनीति में धार्मिक कानूनों, समान नागरिक संहिता (UCC) और मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर एक नया और बेहद तीखा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP - अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक द्वारा हाल ही में बहुविवाह (Polygamy) और शरिया आधारित पारंपरिक मुस्लिम कानूनों के समर्थन में दिए गए बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है। इस पूरे मामले में अब सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और मुखर वक्ता नाजिया इलाही खान की एंट्री हो गई है। नाजिया इलाही खान ने सना मलिक पर सीधा और बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह भारत में 'पाकिस्तानी एजेंडे' को लागू करवाना चाहती हैं। इस वैचारिक टकराव के बाद महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर और बाहर शरिया बनाम भारतीय संविधान को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर समान नागरिक संहिता (UCC) के विरोध और मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आने वाले बहुविवाह (Polygamy) जैसे संवेदनशील विषयों पर की गई बयानबाजी से जुड़ा है। राकांपा विधायक सना मलिक ने कथित तौर पर भारत में मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों और शरिया कानून के कुछ पहलुओं को अक्षुण्ण रखने की वकालत की थी। उनके इस दृष्टिकोण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नाजिया इलाही खान ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है। नाजिया का दावा है कि लोकतांत्रिक देश में संविधान सर्वोपरि है और यहां किसी भी प्रकार के विभाजनकारी या पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की विचारधारा से प्रेरित एजेंडे को जगह नहीं दी जा सकती।
विस्तृत घटनाक्रम के अनुसार, महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता और विवाह संबंधी कानूनों में सुधार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एनसीपी नेता नवाब मलिक की बेटी और वर्तमान विधायक सना मलिक ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मिलने वाले अधिकारों, विशेषकर बहुविवाह की प्रथा का बचाव किया था। इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (जिसमें भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं) के भीतर ही वैचारिक मतभेद उभरने लगे। भाजपा और शिवसेना के कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई।
इसी बीच, अपने तीखे और बेबाक बयानों के लिए जानी जाने वाली नाजिया इलाही खान ने इस मुद्दे पर सना मलिक को आड़े हाथों लिया। नाजिया ने सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू के माध्यम से कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक देश है, जो केवल बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान से चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने वाले और रूढ़िवादी शरिया कानूनों की पैरवी करना असल में उस कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देना है जो पाकिस्तान जैसे देशों में देखी जाती है। नाजिया ने साफ तौर पर कहा कि सना मलिक जैसी नेता प्रगतिशील भारतीय समाज में पिछले दरवाजे से पाकिस्तानी एजेंडा थोपने की कोशिश कर रही हैं, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर दोनों पक्षों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। नाजिया इलाही खान के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सना मलिक के समर्थकों का कहना है कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और पर्सनल लॉ के पालन की स्वतंत्रता देता है। उनके अनुसार, सना मलिक ने केवल लोकतांत्रिक दायरे में रहकर मुस्लिम समुदाय और महिलाओं के कानूनी अधिकारों की बात की थी, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
दूसरी तरफ, दक्षिणपंथी संगठनों और भाजपा के कई स्थानीय नेताओं ने नाजिया इलाही खान के स्टैंड का समर्थन किया है। उनका कहना है कि तीन तलाक की समाप्ति के बाद देश में बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं को भी खत्म किया जाना चाहिए। नेताओं का मानना है कि महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद इस तरह के बयान देना गठबंधन की मूल नीतियों के विपरीत है।
इस राजनीतिक और सामाजिक विवाद का प्रभाव केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर समान नागरिक संहिता (UCC) की बहस को एक बार फिर मुख्यधारा में ले आया है। इस घटना के कारण महायुति गठबंधन के भीतर वैचारिक विरोधाभास खुलकर सामने आ गया है, जिससे आगामी चुनावों और नीतिगत फैसलों में सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, मुस्लिम समाज के भीतर भी प्रगतिशील और पारंपरिक विचारधारा रखने वाले गुटों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। लोग इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या व्यक्तिगत कानूनों को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार बदला जाना चाहिए या नहीं।
इस विवाद के आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ने की संभावना है। कानूनी और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद इसी तरह बढ़ता रहा, तो एनसीपी (अजित पवार गुट) के शीर्ष नेतृत्व को इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ सकता है ताकि गठबंधन सहयोगियों के बीच दरार न बढ़े। वहीं, नाजिया इलाही खान ने स्पष्ट किया है कि वह देश के भीतर शरिया कानून की वकालत करने वाले और महिलाओं के अधिकारों का हनन करने वाले बयानों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखती रहेंगी। अब देखना यह होगा कि इस वैचारिक लड़ाई में महाराष्ट्र सरकार के अन्य शीर्ष नेता क्या रुख अपनाते हैं।
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