Strait of Hormuz: भारत के लिए बड़ी राहत, 30 मालवाहक जहाज सुरक्षित निकले; 26 अभी कतार में
Strait of Hormuz: मध्य पूर्व संकट के बीच भारत के लिए बड़ी राहत। भारत आ रहे 30 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले, जबकि 26 अभी कतार में हैं।

- होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले भारत आने वाले 30 मालवाहक जहाज, जानें क्यों टला बड़ा संकट
- मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत के लिए आई बेहद अच्छी खबर, होर्मुज से सुरक्षित निकले 30 कमर्शियल जहाज
- Strait of Hormuz Update: होर्मुज से सुरक्षित निकले भारत आ रहे 30 मालवाहक जहाज, 26 अभी भी कतार में
ग्लोबल सप्लाई चेन और देश की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत के लिए मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत आ रहे 30 मालवाहक जहाज पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। शिपिंग मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। हालांकि, भारतीय हितों और वैश्विक व्यापार से जुड़े 26 अन्य जहाज अभी भी इस मार्ग को पार करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद जहाजों की आवाजाही में यह तेजी देखी जा रही है, जिससे भारत में ईंधन और कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा फिलहाल टल गया है।
पश्चिम एशिया (West Asia) में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य गतिरोध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा चोकपॉइंट बन गया था। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, इस मार्ग से भारत की ओर बढ़ रहे 30 मालवाहक जहाजों ने सफलतापूर्वक इस संवेदनशील क्षेत्र को पार कर लिया है। इन जहाजों में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले एलपीजी (LPG), एलएनजी (LNG) और कच्चे तेल (Crude Oil) के बड़े टैंकर शामिल हैं। सुरक्षित निकले इन जहाजों से भारतीय बाजारों में घरेलू गैस और ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में बड़ी मदद मिलेगी। वहीं, पश्चिम फारस की खाड़ी में अभी भी 26 जहाजों का बेड़ा कतार में खड़ा है, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय एजेंसियां लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं।
पिछले कुछ महीनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला वैश्विक व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया था। यह जलमार्ग महीनों तक वाणिज्यिक जहाजों के लिए असुरक्षित बना रहा। इस दौरान भारत आने वाले कई महत्वपूर्ण पोत भी इस क्षेत्र में फंस गए थे।
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अमेरिका-ईरान समझौते का असर: हाल ही में जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत वाशिंगटन ने ईरानी पेट्रोलियम पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी और तेहरान ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने पर सहमति जताई। इसके बाद फंसे हुए जहाजों की आवाजाही तेजी से शुरू हुई।
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30 जहाजों का सफल पारगमन: जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली एजेंसियों और भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, पार कर चुके 30 जहाजों में से लगभग आधे जहाजों पर एलपीजी और एलएनजी लदा हुआ है। इसके अलावा, सात जहाज कच्चे तेल (Crude Oil) के टैंकर हैं और आठ जहाजों पर थोक माल (Bulk Cargo) मौजूद है।
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विदेशी झंडे वाले जहाजों की भूमिका: इन 30 जहाजों में से 17 जहाज विदेशी झंडे वाले हैं जो भारत के लिए माल लेकर आ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 5 जहाज मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले संचालित हो रहे हैं। बाकी जहाज भारतीय झंडे वाले (Indian-flagged) टैंकर हैं।
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26 जहाज अभी भी कतार में: टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अभी भी भारत से जुड़े 26 जहाजों का कतारबद्ध होना चिंता और सतर्कता दोनों का विषय है। इन 26 जहाजों में से 3 जहाजों पर ऊर्जा उत्पाद, 10 में कृषि क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी उर्वरक (खाद जैसे यूरिया और डीएपी) और बाकी 13 जहाजों में अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक सामान लदा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद से स्थिति में सुधार हुआ है। हम पश्चिम एशिया की समस्त गतिविधियों पर बारीक और सतर्क नजर रख रहे हैं। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के नागरिकों को किफायती कीमतों पर पर्याप्त और विविध स्रोतों से ऊर्जा उपलब्ध हो सके। हमारी नीतियां पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।"
वहीं, देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी इस जलमार्ग के दोबारा सुचारू होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत के सप्लाई चेन नेटवर्क के लिए एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है। इससे विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक और केमिकल्स की कमी का संकट दूर होगा।
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। 30 जहाजों के सुरक्षित निकलने से देश में कच्चे तेल और एलपीजी के स्टॉक को मजबूती मिलेगी। कतार में खड़े और मार्ग पार कर रहे जहाजों में भारी मात्रा में यूरिया और डीएपी जैसी खाद शामिल हैं। खरीफ फसल के इस सीजन में भारत में खाद की किल्लत का खतरा पूरी तरह टल गया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। इस सफल पारगमन से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और यूरिया की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति (महंगाई) का दबाव कम होगा।
यद्यपि 30 जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, लेकिन कतार में खड़े 26 जहाजों की सुरक्षित निकासी अभी भी एक चुनौती है क्योंकि क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। भारतीय नौसेना और जहाजरानी मंत्रालय खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए लगातार 'ऑपरेशन संकल्प' जैसी सुरक्षा पहलों के तहत निगरानी रख रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले 48 से 72 घंटों के भीतर शेष जहाजों को भी सुरक्षित कॉरिडोर के जरिए बाहर निकाल लिया जाएगा।
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