मध्य प्रदेश नक्सल मुक्त घोषित- बालाघाट में दो इनामी नक्सलियों के सरेंडर से पूर्ण विजय, सीएम मोहन यादव ने कहा- लाल सलाम को आखिरी सलामी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को नक्सली खतरे से पूरी तरह मुक्त घोषित किया है। यह घोषणा बालाघाट जिले में दो इनामी नक्सलियों
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को नक्सली खतरे से पूरी तरह मुक्त घोषित किया है। यह घोषणा बालाघाट जिले में दो इनामी नक्सलियों दीपक उइके और रोहित के सरेंडर के बाद की गई, जो महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) विशेष जोन के अंतिम सक्रिय कैडर थे। दीपक पर 29 लाख रुपये और रोहित पर 14 लाख रुपये का इनाम था, और दोनों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कोरका कैंप में हथियार डाल दिए। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरेंडर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के संकल्प का परिणाम है। बालाघाट के लाल सलाम को आखिरी सलामी देकर राज्य ने नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई में पूर्ण विजय प्राप्त की है।
सरेंडर समारोह बालाघाट के बिरसा थाना क्षेत्र के कोरका सीआरपीएफ कैंप में आयोजित हुआ, जहां दीपक और रोहित ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। दीपक, जो पलागोंडी गांव का निवासी है, गोंडिया-राजनांदगांव-बालाघाट (जीआरबी) डिवीजनल कमेटी का अतिरिक्त कमेटी सदस्य था, जबकि रोहित एक साधारण कैडर था। दोनों मलाजखंड दलम के सदस्य थे और लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे। बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि इनके सरेंडर के बाद जिले में कोई हार्डकोर नक्सली बाकी नहीं है। हॉक फोर्स के कमांडेंट शियाज के.एम. ने बताया कि यह सरेंडर सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, निरंतर दबाव और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। इससे नक्सली नेटवर्क को गहरा झटका लगा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरेंडर के बाद पुनर्वास से पुनर्जनन अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पिछले 42 दिनों में एमएमसी जोन में 42 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिन पर कुल 7.75 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह श्रृंखला नवंबर 28 को महाराष्ट्र के गोंडिया में 11 दर्रे खासा दलम कैडरों के सरेंडर से शुरू हुई, जिसमें एमएमसी विशेष जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकास नागपुर उर्फ अनंत शामिल थे। उसके बाद छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में कई सरेंडर हुए, और मध्य प्रदेश के बालाघाट, डिंडोरी तथा मंडला में भी बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौटे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सक्रिय नक्सली कैडर या तो मारे गए हैं या सरेंडर कर चुके हैं, जिससे एमएमसी जोन पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गया है।
यह सफलता मध्य प्रदेश पुलिस की हॉक फोर्स, सीआरपीएफ और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। 2025 में अब तक 10 नक्सलियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया, जिन पर कुल 1.46 करोड़ रुपये का इनाम था, जो किसी भी वर्ष में सबसे अधिक है। 2023-24 में चार नक्सलियों को मार गिराया गया था, जिनमें एक महिला कैडर शामिल थी। मुख्यमंत्री ने 1988-89 से अब तक नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए 38 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन बलिदानों के कारण ही बालाघाट का लाल सलाम अब आखिरी सलामी के साथ विदा हो गया। राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए 46 वन स्टॉप सुविधा केंद्र खोले हैं, जहां रोजगार, वन अधिकार प्रमाण पत्र और अन्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मध्य प्रदेश के तीन आदिवासी जिले- बालाघाट, मंडला और डिंडोरी- पहले नक्सल प्रभावित थे, जो एमएमसी जोन के अंतर्गत आते थे। मंडला और डिंडोरी पहले ही नक्सल मुक्त घोषित हो चुके थे, और बालाघाट का सरेंडर इस अभियान का चरम बिंदु साबित हुआ। एमएमसी जोन में सीपीआई (माओइस्ट) के जीआरबी डिवीजन और कन्हा-भोरामदेव (केबी) डिवीजन सक्रिय थे, जहां एके-47, इंसास राइफल और अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस कैडर सक्रिय थे। नवंबर से शुरू हुई सरेंडर श्रृंखला ने इन डिवीजनों को विघटित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2025 से बालाघाट में व्यापक नक्सल उन्मूलन अभियान शुरू होगा, जिसमें सरेंडर करने वालों को 15 वर्षीय पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। केंद्रीय स्तर पर नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य 2026 तक है, जिसके तहत मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा था कि मार्च 21, 2026 तक नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। छत्तीसगढ़ में भी मार्च 31, 2026 तक नक्सल मुक्त होने का आश्वासन दिया गया है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जहां सुरक्षा बलों की मृत्यु दर 73 प्रतिशत और नागरिक हताहत 70 प्रतिशत घटी है। पिछले चार दशकों में नक्सलवाद से 92,000 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन मोदी सरकार के नेतृत्व में यह समस्या अब समाप्ति की ओर है। मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं जैसे स्कूल, अस्पताल, सड़कें, पानी और मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं।
सरेंडर नीति 2023 के तहत मुख्यधारा में लौटने वालों को पुनर्वास, रोजगार और कौशल विकास की सुविधा प्रदान की जा रही है। दिसंबर 7 को बालाघाट में 10 नक्सलियों, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं, ने सीएम मोहन यादव के समक्ष हथियार डाले थे। इनमें कन्हा-भोरामदेव डिवीजन के कमांडर कबीर उर्फ सुंदर शामिल थे, जिन पर कुल 2.36 करोड़ रुपये का इनाम था। उन्होंने दो एके-47 और दो इंसास राइफलें जमा कीं। यह सरेंडर बालाघाट के कन्हा नेशनल पार्क और बंधवगढ़ नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण था। डीजीपी कैलाश माकवाना ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15 नए अस्थायी कैंप और 882 स्पेशल सपोर्ट स्क्वाड पोस्ट स्वीकृत किए गए हैं। मध्य प्रदेश में नक्सलवाद की जड़ें 1990 के दशक से थीं, जब एमएमसी जोन में गतिविधियां तेज हुईं। कन्हा-भोरामदेव और जीआरबी डिवीजन ने बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, राजनांदगांव, कबीरधाम और गोंडिया जैसे जिलों को प्रभावित किया। सरेंडर श्रृंखला ने इन क्षेत्रों में शांति स्थापित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल मुक्त होने से इन जिलों का विकास तेज होगा, जहां पहले विकास कार्य बाधित थे। राज्य सरकार ने 800 गोपनीय सैनिक और 1000 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात किए हैं। यह अभियान सतत निगरानी, गहन जांच और कार्रवाई पर आधारित है। नक्सल उन्मूलन से मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में विकास को नई गति मिलेगी। कन्हा और बंधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र अब पर्यटन और संरक्षण के लिए सुरक्षित होंगे। सरेंडर करने वालों को संविधान की प्रति प्रदान की गई, जो मुख्यधारा में एकीकरण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025 नक्सलवाद के अंत के साथ समाप्त हो रहा है, जो राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बनेगा। बालाघाट रेंज के आईजी संजय कुमार सिंह ने कहा कि अभियान जारी रहेगा ताकि क्षेत्र हमेशा नक्सल मुक्त रहे।
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