लोकसभा में तीखी बहस: निशिकांत दुबे ने पप्पू यादव को बीच चर्चा में टोका, SIR पर गरमाया माहौल।

संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन 9 दिसंबर 2025 को लोकसभा में चुनाव सुधारों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा के दौरान

Dec 10, 2025 - 11:33
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लोकसभा में तीखी बहस: निशिकांत दुबे ने पप्पू यादव को बीच चर्चा में टोका, SIR पर गरमाया माहौल।
लोकसभा में तीखी बहस: निशिकांत दुबे ने पप्पू यादव को बीच चर्चा में टोका, SIR पर गरमाया माहौल।

संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन 9 दिसंबर 2025 को लोकसभा में चुनाव सुधारों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा के दौरान एक अप्रत्याशित वाकया हुआ, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को बीच बहस में टोक दिया। दुबे ने SIR प्रक्रिया के उदाहरण देते हुए एक मुस्लिम वोटर के नाम का जिक्र किया, जिस पर पप्पू यादव ने आपत्ति जताई। इस पर दुबे ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पप्पू यादव बैठ जाओ, और सदन में तनाव बढ़ गया। यह घटना चुनाव सुधारों पर चल रही गरमागर्म बहस का हिस्सा बनी, जहां विपक्ष ने SIR को वोटरों के नाम काटने का हथियार बताया, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे पारदर्शिता बढ़ाने वाली प्रक्रिया करार दिया। चर्चा में कई सांसदों ने भाग लिया, लेकिन इस छोटे से टकराव ने सदन का ध्यान खींच लिया। चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की, जिन्होंने चुनाव सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के बजाय पेपर बैलेट पर वापसी होनी चाहिए, और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने हिस्सा लिया, जहां उन्होंने रामपुर उपचुनाव का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने वोटिंग में बाधा डाली। अखिलेश ने कहा कि SIR के दौरान बिहार में 10 BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौत हुई, जो प्रक्रिया की जटिलता दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में एक विस्तारित पैनल हो, जिसमें विपक्ष को अधिक प्रतिनिधित्व मिले। विपक्ष के कई सांसदों ने एक साथ आवाज उठाई कि SIR के बहाने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर उन वर्गों के जो परंपरागत रूप से विपक्ष के समर्थक रहे हैं।

बीजेपी की ओर से केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य का सिद्धांत अटल है, और SIR वैधानिक प्रक्रिया है। मेघवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को संवैधानिक अधिकार दिया है, और यह पूरे देश में लागू हो रही है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि बिहार में वोटर लिस्ट की सफाई से फर्जी वोट कम हुए हैं। राजस्थान से बीजेपी सांसद पीपी चौधरी ने भी चर्चा में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने विस्तार से चुनाव सुधारों पर अपनी बात रखी। चौधरी ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रही। उन्होंने विपक्ष की मांगों पर कहा कि कुछ सुझावों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना अनुचित है। इस बीच, निशिकांत दुबे ने अपना भाषण शुरू किया, जो SIR प्रक्रिया की सटीकता पर केंद्रित था। गोड्डा से सांसद दुबे ने एक व्यक्तिगत उदाहरण दिया, जहां उन्होंने बताया कि SIR में उनके माता-पिता का नाम बिहार की मतदाता सूची से कट गया, क्योंकि वे अब दिल्ली में रहते हैं। दुबे ने कहा कि उन्हें इसकी खुशी हुई, क्योंकि यह प्रक्रिया सही है और फर्जी वोटरों को रोकती है। उन्होंने बिहार की वाल्मीकि नगर सीट का जिक्र किया, जहां SIR से 2311 वोट कटे, और कांग्रेस 1675 वोटों से हारी। चनपटिया सीट पर 1033 वोट कटे, और कांग्रेस 602 वोटों से पीछे रही। दुबे ने जोर दिया कि SIR ने चुनावों को निष्पक्ष बनाया है, और विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से पेश कर रहा है।

दुबे के भाषण के दौरान जब वे प्राणपुर क्षेत्र के एक वाकये का जिक्र कर रहे थे, तब उन्होंने आजमनगर के तजीमुल नामक 70 वर्षीय मुस्लिम वोटर का उदाहरण दिया। दुबे ने कहा कि तजीमुल 70 साल की उम्र में वोटर बनना चाहते थे, लेकिन SIR ने उनकी स्थिति की जांच की। इस नाम लेते ही पप्पू यादव ने आपत्ति जताई और सदन में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पप्पू ने कहा कि नाम लेने का तरीका अनुचित लग रहा है, और इससे चर्चा का स्वर बिगड़ रहा है। इस पर दुबे ने तुरंत कहा, पप्पू यादव बैठ जाओ, आप बैठो, मैं नाम बता रहा हूं। दुबे ने आगे कहा कि यह कोई व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि SIR की प्रक्रिया का उदाहरण है, जहां 70 साल का व्यक्ति वोटर बनने की प्रक्रिया में था। इस टकराव से सदन में कुछ देर के लिए हंगामा हुआ, और स्पीकर को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा।

पप्पू यादव ने बाद में अपनी बात रखते हुए कहा कि सदन विधायी मंच है, लेकिन कभी-कभी यह सर्कस जैसा लगता है। उन्होंने चुनाव सुधारों पर कहा कि चर्चा तो होती है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं। पप्पू ने SIR पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में बड़े स्तर पर नाम कटे हैं, जो गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने मांग की कि वोटर लिस्ट की जांच में पारदर्शिता हो, और प्रभावित लोगों को तुरंत सुनवाई का मौका मिले। इस घटना के बाद चर्चा जारी रही, लेकिन दुबे और पप्पू के बीच का यह छोटा सा वाकया सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, हालांकि सदन में यह बहस का हिस्सा ही रहा। चर्चा के दौरान दुबे ने कांग्रेस पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने EVM लाई थी, और 1987 में राजीव गांधी के समय पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। दुबे ने रायबरेली चुनाव का जिक्र किया, जहां इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द हुआ था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा है, और मुस्लिम वोट बैंक के लिए नैतिकता का समझौता किया। दुबे ने एक पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें कांग्रेस की मुस्लिम-पक्षपाती राजनीति का विवरण है। उन्होंने पूरे देश में मुस्लिम आबादी 4 प्रतिशत बढ़ने का जिक्र किया, लेकिन पश्चिम बंगाल के 24 परगना में 14 प्रतिशत बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। दुबे ने राहुल गांधी के भाषण पर तंज कसा, कहा कि शहीदों की चिता पर खड़ी कांग्रेस आज संविधान की बात कर रही है। उन्होंने 42वें संशोधन का उदाहरण दिया, जहां राष्ट्रपति के अधिकार कम किए गए।

राहुल गांधी ने अपनी स्पीच में कहा कि वोट चोरी सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी कृत्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS ने चुनाव आयोग सहित सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। गांधी ने हरियाणा चुनाव को चोरी का उदाहरण बताया, और कहा कि वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट एंट्रीज हैं। उन्होंने मांग की कि CCTV फुटेज 45 दिनों के बजाय लंबे समय तक रखी जाए, और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में CJI को शामिल किया जाए। गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद संस्थाओं का कब्जा शुरू हुआ, और अब वाइस चांसलरों की नियुक्ति योग्यता के बजाय संबद्धता पर हो रही है। इस पर दुबे ने पलटवार किया, कहा कि RSS से जुड़े होने पर गर्व है, और कांग्रेस ने ही संस्थाओं को कमजोर किया। चर्चा के दौरान अन्य सांसदों ने भी हिस्सा लिया। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने राहुल के आरोपों को झूठा बताया, और कहा कि विपक्ष असंवैधानिक धमकियां दे रहा है। पात्रा ने कहा कि SIR से फर्जी वोटर कम हुए, और यह लोकतंत्र के लिए जरूरी है। विपक्ष की ओर से केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 2023 का कानून चुनाव आयुक्तों को सरकार के अधीन कर देता है। उन्होंने मांग की कि मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट चुनाव से एक महीने पहले पार्टियों को दी जाए। चर्चा दो दिनों तक चली, और 10 दिसंबर को मेघवाल ने जवाब दिया। मेघवाल ने कहा कि सरकार सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष के आरोप आधारहीन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR बिहार सहित कई राज्यों में हो रही है, और इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं।

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