वर्कलोड कम करने के लिए नर्स ने विषाक्त इंजेक्शन से 10 मरीजों की हत्या की, 27 की ह्त्या की कोशिश पर उम्रकैद की सजा। 

जर्मनी के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक झकझोर देने वाली घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। आचेन शहर की एक अदालत ने 5 नवंबर 2025 को एक पेलिएटिव केयर नर्स को उम्रकैद की

Nov 7, 2025 - 15:31
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वर्कलोड कम करने के लिए नर्स ने विषाक्त इंजेक्शन से 10 मरीजों की हत्या की, 27 की ह्त्या की कोशिश पर उम्रकैद की सजा। 
वर्कलोड कम करने के लिए नर्स ने विषाक्त इंजेक्शन से 10 मरीजों की हत्या की, 27 की ह्त्या की कोशिश पर उम्रकैद की सजा। 

जर्मनी के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक झकझोर देने वाली घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। आचेन शहर की एक अदालत ने 5 नवंबर 2025 को एक पेलिएटिव केयर नर्स को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस नर्स को 10 बुजुर्ग मरीजों की हत्या का दोषी ठहराया गया, जिसमें उसने विषाक्त इंजेक्शन देकर उनकी जान ली। साथ ही, 27 अन्य मरीजों की हत्या की कोशिश का भी अपराध सिद्ध हुआ। नर्स का नाम गोपनीय रखा गया है, लेकिन अभियोजन पक्ष के अनुसार, वह नाइट शिफ्ट के दौरान भारी वर्कलोड से परेशान हो जाती थी। मरीजों को मारकर वह अपने काम की मात्रा कम करना चाहती थी, ताकि रात की ड्यूटी आसान हो जाए। यह मामला 2017 से 2020 के बीच के है, जब नर्स एक पेलिएटिव केयर सेंटर में तैनात थी। अदालत ने फैसले में कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नर्स को कभी रिहा नहीं किया जाएगा। अभियोजन पक्ष ने चेतावनी दी है कि और संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए शवों का उत्खनन चल रहा है, जिससे नर्स पर अतिरिक्त मुकदमे हो सकते हैं। यह घटना जर्मनी के स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरियों पर सवाल उठा रही है और 2019 के नील्स होगेल मामले की याद दिला रही है, जहां एक नर्स ने 85 मरीजों की हत्या की थी।

अपराध की शुरुआत 2017 में हुई, जब नर्स ने पहली बार एक बुजुर्ग मरीज को दर्द निवारक या शामक दवाओं का अतिरिक्त डोज दिया। पेलिएटिव केयर में मरीज पहले से ही मृत्यु के करीब होते हैं, इसलिए नर्स का यह कदम आसानी से छिप जाता था। लेकिन जांच के दौरान पता चला कि नर्स ने जानबूझकर हृदय रोग की दवाओं जैसे अमiodarone या सोटालोल का इस्तेमाल किया, जो मरीजों के दिल को रोक देती हैं। एक मरीज की मौत के बाद ऑटोप्सी में विषाक्तता के संकेत मिले, जिससे सेंटर में आंतरिक जांच शुरू हुई। नर्स ने शुरुआत में इनकार किया, लेकिन सबूतों के सामने आते ही कबूल लिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि नर्स ने कुल 37 मामलों में अपराध किया – 10 में सफल हत्या और 27 में असफल कोशिश। ज्यादातर पीड़ित 70 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग थे, जो दर्द से पीड़ित थे। नर्स ने कहा कि वह 'मरीजों को दर्द से मुक्ति' देना चाहती थी, लेकिन अदालत ने इसे झूठा बहाना करार दिया। वास्तव में, यह वर्कलोड कम करने की साजिश थी। नाइट शिफ्ट में अकेले कई मरीजों की देखभाल से वह तनावग्रस्त हो जाती थी। मौतों के बाद डॉक्टरों को बुलाने या रिपोर्टिंग की जरूरत कम पड़ती, जिससे उसका काम आसान हो जाता।

अदालत की कार्यवाही जून 2025 में शुरू हुई थी और पांच महीने चली। अभियोजन पक्ष ने 50 से ज्यादा गवाह पेश किए, जिसमें सहकर्मी नर्सें, डॉक्टर और मरीजों के परिवार शामिल थे। एक सहकर्मी ने गवाही दी कि नर्स अक्सर 'अजीब व्यवहार' करती थी और मरीजों को बिना डॉक्टर के आदेश के इंजेक्शन देती थी। मेडिकल रिकॉर्ड्स से साबित हुआ कि मौतों के समय दवाओं की मात्रा असामान्य रूप से अधिक थी। नर्स के वकील ने बचाव में कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार थी और तनाव से ग्रस्त थी। लेकिन मनोचिकित्सक रिपोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जज ने फैसले में कहा, 'यह क्रूर और स्वार्थी अपराध है। नर्स ने अपनी सुविधा के लिए निर्दोषों की जान ली।' उम्रकैद की सजा जर्मन कानून के तहत दी गई, जिसमें 15 साल बाद रिहाई की संभावना होती है, लेकिन अपराध की भयावहता को देखते हुए यह असंभव है। नर्स को अपील का अधिकार है, लेकिन अभियोजन पक्ष का मानना है कि फैसला पुख्ता है। परिवारों ने सजा को न्याय का प्रतीक बताया। एक बेटे ने कहा, 'मां की मौत का कारण अब साफ हो गया। हम चैन की सांस लेंगे।'

यह मामला जर्मनी के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और काला अध्याय जोड़ता है। 2019 में नील्स होगेल नामक नर्स को 85 हत्याओं के लिए उम्रकैद मिली थी। होगेल ने मरीजों को हृदय दवाएं देकर 'रिससिटेट' करने का नाटक किया, ताकि वह हीरो बने। उसके मामले में 100 से ज्यादा मौतें संदिग्ध पाई गईं। आचेन का यह केस होगेल से मिलता-जुलता है, लेकिन यहां मकसद अलग था – वर्कलोड कम करना। जर्मनी में पेलिएटिव केयर सिस्टम पहले से दबाव में है। कोविड-19 महामारी के बाद नर्सों की कमी बढ़ गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में जर्मनी में 50 हजार नर्स पद रिक्त थे। नाइट शिफ्ट में अकेले काम करने से तनाव बढ़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे अपराध सिस्टम की कमजोरी दिखाते हैं। नर्सों को पर्याप्त ट्रेनिंग और सहायता नहीं मिलती। जर्मन स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस फैसले के बाद जांच समिति गठित की है। वे सभी पेलिएटिव सेंटर्स में मेडिकल रिकॉर्ड्स की समीक्षा करेंगे। यूरोपीय संघ ने भी चिंता जताई है कि स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव से नैतिक पतन हो रहा है।

परिवारों का दर्द अनकहा है। 10 मौतों के पीछे दशकों का दुख छिपा है। एक परिवार ने बताया कि उनकी मां की मौत को 'प्राकृतिक' बताया गया था, लेकिन अब सच्चाई सामने आई। अभियोजन पक्ष ने कहा कि और शवों का उत्खनन होगा, क्योंकि कुछ मामलों में सबूत नष्ट हो चुके हैं। नर्स ने कबूल किया कि वह 2017 से 2020 तक लगातार ऐसा करती रही। सजा सुनते समय अदालत में सन्नाटा छा गया। नर्स ने रोते हुए माफी मांगी, लेकिन जज ने कहा, 'माफी से पीड़ितों की जिंदगी वापस नहीं आएगी।' जर्मन मीडिया ने इसे 'डेथ शिफ्ट किलर' करार दिया। बीबीसी ने रिपोर्ट की कि यह जर्मनी का तीसरा बड़ा नर्स हत्याकांड है। सीएनएन ने बताया कि नर्स की सजा अपील योग्य है, लेकिन सफलता की संभावना कम है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने स्वास्थ्य प्रणाली की आलोचना की, जबकि अन्य नर्सों के तनाव पर सहानुभूति जताई। एक यूजर ने लिखा, 'यह सिस्टम की नाकामी है, न कि एक व्यक्ति की।'

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