देश- विदेश: शर्मिष्ठा पनोली को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत, पुलिस सुरक्षा और विदेश यात्रा पर प्रतिबंध के साथ। 

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत दे दी। शर्मिष्ठा को कोलकाता पुलिस ने 30 मई 2025 को गुरुग्राम,

Jun 6, 2025 - 12:05
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देश- विदेश: शर्मिष्ठा पनोली को कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत, पुलिस सुरक्षा और विदेश यात्रा पर प्रतिबंध के साथ। 

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत दे दी। शर्मिष्ठा को कोलकाता पुलिस ने 30 मई 2025 को गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार किया था, क्योंकि उनके एक इंस्टाग्राम वीडियो में कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले टिप्पणियां थीं। यह वीडियो 'ऑपरेशन सिंदूर' से संबंधित था, जिसने सोशल मीडिया पर व्यापक विवाद खड़ा किया। हाई कोर्ट ने न केवल शर्मिष्ठा को 10,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए कोलकाता पुलिस को उचित कदम उठाने का भी निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने शर्मिष्ठा को बिना अनुमति विदेश यात्रा करने से मना किया। यह मामला न केवल स्वतंत्र अभिव्यक्ति और धार्मिक भावनाओं के बीच टकराव को उजागर करता है, बल्कि सोशल मीडिया के उपयोग और कानूनी जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठाता है।

शर्मिष्ठा पनोली, जो 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, ने 14 मई 2025 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के संदर्भ में कुछ बॉलीवुड हस्तियों की चुप्पी पर टिप्पणी की थी, जो एक कथित सैन्य कार्रवाई थी। इस ऑपरेशन का संबंध 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जोड़ा गया, जिसमें 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। शर्मिष्ठा का वीडियो एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर के पोस्ट के जवाब में था, जिसने भारत की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।

शर्मिष्ठा के वीडियो में कथित तौर पर एक विशेष समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां थीं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर व्यापक विवाद शुरू हो गया। वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाओं और धमकियों के बाद शर्मिष्ठा ने 15 मई को वीडियो हटा लिया और सोशल मीडिया पर बिना शर्त माफी मांगी। इसके बावजूद, कोलकाता के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ 15 मई को एक प्राथमिकी दर्ज की गई। इस प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (BNSS) की धारा 196(1)(a) (धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर किए गए कार्य), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), और धारा 353(1)(c) (सार्वजनिक उपद्रव को उकसाने वाले बयान) के तहत आरोप लगाए गए। कोलकाता पुलिस ने शर्मिष्ठा को 30 मई 2025 को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया और उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया गया। 31 मई को अलीपुर कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जो 13 जून तक थी। पुलिस का दावा था कि शर्मिष्ठा और उनके परिवार को कानूनी नोटिस देने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे, जिसके बाद अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। पुलिस ने उनके फोन और लैपटॉप को भी जब्त किया ताकि आगे की जांच के लिए फोरेंसिक विश्लेषण किया जा सके।

शर्मिष्ठा के वकील, मोहम्मद समीमुद्दीन और डीपी सिंह, ने तर्क दिया कि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी थी, क्योंकि प्राथमिकी में उल्लिखित अपराध गैर-संज्ञेय थे, और गिरफ्तारी से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया, जो BNSS के तहत अनिवार्य है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि शर्मिष्ठा को अलीपुर महिला सुधार गृह में बुनियादी सुविधाएं, जैसे स्वच्छता और चिकित्सा देखभाल, नहीं दी जा रही थीं। शर्मिष्ठा को किडनी स्टोन और ध्यान-अभाव/अतिसक्रियता विकार (ADHD) की समस्या है, जिसके कारण जेल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही थी। 3 जून 2025 को, कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी ने शर्मिष्ठा की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि स्वतंत्र अभिव्यक्ति का मतलब दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। कोर्ट ने कहा, "हमारे देश में उल्लेखनीय विविधता है, और हमें अपनी टिप्पणियों में सावधानी बरतनी चाहिए।" कोर्ट ने पुलिस को केस डायरी और वीडियो सामग्री 5 जून को पेश करने का निर्देश दिया।

5 जून को, जस्टिस राजा बसु चौधरी की अवकाशकालीन बेंच ने शर्मिष्ठा को अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने माना कि प्राथमिकी में कोई संज्ञेय अपराध नहीं दिखता। जमानत की शर्तों में शामिल था: 10,000 रुपये का मुचलका, जांच में सहयोग, और बिना कोर्ट की अनुमति के देश छोड़ने पर रोक। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शर्मिष्ठा को धमकियों के कारण उचित पुलिस सुरक्षा दी जाए। शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे "चयनात्मक कार्रवाई" करार देते हुए कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया। बीजेपी विधायक अग्निमित्र पॉल ने वजahat खान कादरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जिनकी शिकायत पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी हुई थी। कादरी पर भी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है, और वह वर्तमान में फरार है।

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शर्मिष्ठा के पिता, पृथ्वीराज पनोली, ने कहा कि उनकी बेटी को "सिर तन से जुदा" जैसी धमकियां मिल रही थीं, जिसके कारण परिवार डर में था। उन्होंने कोर्ट के फैसले और हिंदू संगठनों के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि परिवार ने शर्मिष्ठा के कुछ वीडियो को अस्वीकार किया था और उन्हें हटाने के लिए कहा था। भारत के बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी को "न्याय का गंभीर दुरुपयोग" बताया और पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की। इस मामले ने नीदरलैंड के सांसद गीर्ट विल्डर्स का भी ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। यह सवाल उठता है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया जा सकता है? साथ ही, यह भी विचारणीय है कि क्या इस तरह की त्वरित कानूनी कार्रवाइयां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास हैं। कोलकाता पुलिस और प्रशासन के लिए यह मामला एक चुनौती है कि वे विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखें। शर्मिष्ठा की जमानत और सुरक्षा के निर्देश इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं, लेकिन यह मामला भविष्य में सोशल मीडिया नीतियों और कानूनी कार्रवाइयों को प्रभावित कर सकता है।

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