Gorakhpur News: बच्ची की हत्या के आरोपी निलंबित सिपाही की जिला अस्पताल में पिटाई, पुलिस ने किसी तरह बचाया
गोरखपुर में बच्ची की हत्या के आरोपी निलंबित सिपाही अभिषेक यादव की जिला अस्पताल में मेडिकल जांच के दौरान लोगों ने पिटाई कर दी। पुलिस ने बमुश्किल बचाया।

- Gorakhpur Crime: गोरखपुर में बच्ची के अपहरण-हत्या के आरोपी निलंबित सिपाही अभिषेक यादव पर भड़का लोगों का गुस्सा, अस्पताल में हाथापाई
- गोरखपुर में खौफनाक वारदात के आरोपी निलंबित सिपाही की अस्पताल में पिटाई, मेडिकल कराने पहुंची पुलिस के छूटे पसीने
- Gorakhpur News Live: बच्ची की हत्या के आरोपी निलंबित सिपाही की जिला अस्पताल में पिटाई, भीड़ ने पुलिस अभिरक्षा में घेरा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। कोतवाली थाना क्षेत्र में एक मासूम बच्ची के अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार निलंबित सिपाही अभिषेक यादव की बृहस्पतिवार (30 जुलाई 2026) को जिला अस्पताल में मेडिकल जांच के दौरान स्थानीय भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी। पुलिस टीम जब आरोपी को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पुलिस घेरे के बीच ही आरोपी पर हमला कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को भीड़ के चंगुल से निकालकर सुरक्षित बाहर निकाला। सीसीटीवी फुटेज और शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किए गए आरोपी के खिलाफ पुलिस निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की जांच में जुटी है।
गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में हाल ही में एक बच्ची के संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने और बाद में उसका शव बरामद होने की दुखद घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच के बाद निलंबित सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार किया था।
बृहस्पतिवार को जब पुलिस नियमानुसार आरोपी सिपाही को चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल जांच) के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची, तो वहां अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज, उनके तीमारदार और स्थानीय नागरिक उग्र हो गए। आरोपी को देखते ही लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने नारेबाजी करते हुए उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
गोरखपुर में बच्ची के अपहरण और हत्या के संवेदनशील मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने आरोपी निलंबित सिपाही अभिषेक यादव को हिरासत में लिया था। जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बच्ची को घर छोड़ने का झांसा देकर अपनी बाइक पर बैठाकर ले जाता हुआ दिखाई दिया था। इसी ठोस साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया जाना अनिवार्य था, जिसके लिए पुलिस बल उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। जैसे ही पुलिस की गाड़ी अस्पताल परिसर में रुकी और आरोपी को बाहर निकाला गया, वहां मौजूद लोगों को उसके कृत्य की जानकारी हुई। देखते ही देखते लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया।
अस्पताल परिसर में मौजूद भीड़ ने आरोपी को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए उसकी पिटाई करने लगी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल के मुख्य द्वार तक लोग आरोपी को पीटते रहे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने ढाल बनकर आरोपी को भीड़ से बचाने का प्रयास किया और काफी मशक्कत के बाद उसे वाहन में बैठाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग आशंका जता रहा है कि हत्या से पूर्व बच्ची के साथ दुष्कर्म भी किया गया हो सकता है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस विषय पर कोई भी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही संभव हो सकेगी।
अस्पताल परिसर में हुई इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। गोरखपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है, हालांकि जनआक्रोश को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आरोपी चाहे पुलिस विभाग से ही जुड़ा क्यों न हो, उसके खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कठोरतम कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों ने आरोपी के खिलाफ त्वरित जांच पूरी कर अदालत में सख्त सजा दिलाने की मांग की है।
जिला अस्पताल में हुई इस घटना के बाद गोरखपुर शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए, इसके लिए संवेदनशील इलाकों और जिला अस्पताल परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और जनता के बीच बढ़ते आक्रोश को चर्चा में ला दिया है। पुलिस विभाग ने आरोपी सिपाही के निलंबन और गिरफ्तारी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि कानून के समक्ष सभी समान हैं और दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि बच्ची का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वियोग्राफी भी कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही घटना से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित यौन उत्पीड़न के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आरोपी निलंबित सिपाही अभिषेक यादव को मेडिकल परीक्षण के बाद भारी सुरक्षा घेरे में अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस साक्ष्यों को मजबूती से अदालत में प्रस्तुत करने के लिए फोरेंसिक टीम की सहायता भी ले रही है।
What's Your Reaction?



