देश- विदेश: पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर ने ट्रंप के लिए मांगा नोबेल शांति पुरस्कार, भारत-पाक सीजफायर विवाद और कूटनीति की नई गाथा।
एक अभूतपूर्व कूटनीतिक घटना ने वैश्विक सुर्खियां बटोरीं, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड...
एक अभूतपूर्व कूटनीतिक घटना ने वैश्विक सुर्खियां बटोरीं, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया। मुनीर ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए दावा किया कि उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को युद्ध में बदलने से रोका। यह नामांकन वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में ट्रंप और मुनीर की मुलाकात के दौरान सामने आया, जिसे दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सीजफायर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ, न कि अमेरिकी मध्यस्थता से। भारत-पाक तनाव और मई 2025 का संघर्ष
इस घटना की जड़ें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में हैं, जिसमें 26 लोग, ज्यादातर पर्यटक, मारे गए थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज कर दिया। जवाब में, भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों पर ड्रोन, मिसाइल, और तोपखाने से हमले किए, जो भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिए। यह चार दिन (7-10 मई) तक चला सैन्य टकराव दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच युद्ध का खतरा पैदा कर गया। 10 मई को दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच बातचीत के बाद तत्काल सीजफायर पर सहमति बनी। भारत ने इसे अपनी सैन्य कार्रवाई की सफलता और पाकिस्तान की ओर से शुरू की गई बातचीत का नतीजा बताया, जबकि पाकिस्तान ने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता करार दिया।
- ट्रंप का दावा और मुनीर का नामांकन
डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि उनकी मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने दोनों देशों को युद्ध के बजाय व्यापार पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। ट्रंप ने इस उपलब्धि को अपनी कूटनीति की जीत बताते हुए बार-बार इसका जिक्र किया। 18 जून को व्हाइट हाउस में मुनीर के साथ लंच बैठक से पहले ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका। मैं पाकिस्तान से प्यार करता हूं। मोदी एक शानदार व्यक्ति हैं। मैंने कल रात उनसे बात की। हम भारत के साथ व्यापार सौदा करेंगे।” उन्होंने मुनीर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी पक्ष से तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि मोदी ने भारतीय पक्ष से ऐसा किया, मुनीर ने इस मौके पर ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की बात कही, जिसे व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने भी पुष्टि की। केली ने कहा कि मुनीर ने ट्रंप की उस भूमिका की सराहना की, जिसने “दो परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के बीच संभावित युद्ध को रोका।” इस नामांकन ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया, जहां कुछ ने इसे कूटनीतिक चाल बताया, तो कुछ ने इसे मजाक के रूप में लिया।
- भारत का खंडन: कोई मध्यस्थता नहीं
भारत ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 18 जून को एक बयान में कहा कि 7-10 मई के संघर्ष के बाद सीजफायर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ, और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी। मिस्री ने बताया कि 17 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने मोदी को फोन कर वाशिंगटन में रुकने का न्योता दिया था, लेकिन मोदी ने पहले से तय कार्यक्रमों का हवाला देकर इनकार कर दिया। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कश्मीर या अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “जम्मू-कश्मीर से संबंधित सभी मुद्दे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से हल किए जाएंगे।” भारत की यह प्रतिक्रिया ट्रंप की टिप्पणियों और मुनीर के नामांकन को लेकर उसकी नाराजगी को दर्शाती है।
- कूटनीतिक निहितार्थ: अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में नई गर्मी
मुनीर की व्हाइट हाउस यात्रा और ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत की। यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को बिना नागरिक नेतृत्व के व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया। इस मुलाकात में ईरान-इजरायल संघर्ष और दक्षिण एशिया में स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुनीर ने ट्रंप से आग्रह किया कि वह इजरायल-ईरान युद्ध में न उलझें और सीजफायर की दिशा में काम करें।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मुलाकात को एक कूटनीतिक मील का पत्थर बताया। यह मुलाकात उस समय हुई, जब अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध ट्रंप के पहले कार्यकाल और बाइडेन प्रशासन के दौरान ठंडे पड़ गए थे, क्योंकि दोनों ने भारत को चीन के खिलाफ रणनीतिक साझेदार के रूप में प्राथमिकता दी थी। मुनीर के नामांकन की खबर ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। @news24tvchannel ने ट्वीट किया, “पाक आर्मी चीफ मुनीर ने ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार के लिए किया नॉमिनेट।” कुछ यूजर्स ने इसे मजाक उड़ाया, जैसे @mkmathur ने लिखा, “बिलकुल वही जैसे बंदूक वाला हथियारों की दुकान को ‘आश्रम’ घोषित कर दे!” वहीं, कुछ ने इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक चाल माना। ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत कोई नई बात नहीं है। 2024 में न्यूयॉर्क की सांसद क्लाउडिया टेनी ने उन्हें अब्राहम समझौते के लिए नामांकित किया था, लेकिन पुरस्कार जापानी संगठन निहोन हिदांक्यो को मिला। ट्रंप ने अक्सर शिकायत की है कि बराक ओबामा को बिना ठोस उपलब्धि के नोबेल मिला, जबकि उनकी उपलब्धियां अनदेखी की गईं। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर द्वारा डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन एक कूटनीतिक और विवादास्पद घटना है।
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