BRICS 2026: मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम की ब्रिक्स पोस्ट पर छिड़ी चर्चा, 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' से 'चले चलो' तक बॉलीवुड प्लेलिस्ट वायरल
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने ब्रिक्स से जुड़े कूटनीतिक विमर्श के बीच अपनी पसंदीदा बॉलीवुड प्लेलिस्ट साझा की, जिसमें 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' और 'चले चलो' शामिल हैं।

- BRICS 2026: मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम की ब्रिक्स पोस्ट पर छिड़ी चर्चा, 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' से 'चले चलो' तक बॉलीवुड प्लेलिस्ट वायरल
- कूटनीति के मंच पर बॉलीवुड का जादू: ब्रिक्स सदस्यता की पहल के बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री ने शेयर की भारतीय गानों की लिस्ट
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वैश्विक कूटनीति और बहुपक्षीय आर्थिक मंचों पर अमूमन जहां व्यापार घाटे, मुद्रा विनिमय, रणनीतिक संधियों और भू-राजनीतिक समीकरणों पर गंभीर विमर्श होता है, वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के एक अनूठे सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर सांस्कृतिक रिश्तों की एक नई और सुखद बयार ला दी है। ब्रिक्स (BRICS) संगठन से जुड़ने की मलेशियाई प्राथमिकताओं और वैश्विक संवाद के बीच प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने अपनी पसंदीदा हिंदी फिल्मी गानों की एक प्लेलिस्ट साझा की है। इस सूची में नब्बे के दशक के रोमांटिक गानों से लेकर प्रेरणादायक क्लासिक ट्रैक शामिल हैं, जिसने इंटरनेट पर भारी हलचल मचा दी है।
मलेशियाई प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए गानों में 1995 की ब्लॉकबस्टर फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का अमर प्रेम गीत ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और आशुतोष गोवारिकर निर्देशित फिल्म लगान (2001) का उत्साहवर्धक समूह गान ‘चले चलो’ प्रमुखता से शामिल है। वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की सदस्यता की औपचारिक प्रक्रियाओं और आर्थिक चर्चाओं के समानांतर एक राष्ट्रप्रमुख द्वारा भारतीय संगीत के प्रति इस तरह का खुला प्रेम प्रदर्शित किया जाना 'सॉफ्ट पावर कूटनीति' (सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी) का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
- कूटनीतिक संदर्भ में बॉलीवुड का भावनात्मक जुड़ाव
अनवर इब्राहिम का भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से हिंदी सिनेमा के प्रति आकर्षण कोई नई बात नहीं है। वे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय साक्षात्कारों और सार्वजनिक मंचों पर इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से पुरानी और क्लासिक हिंदी फिल्मों के बड़े प्रशंसक रहे हैं। उनका मानना रहा है कि भारतीय सिनेमा की कहानियां, मानवीय मूल्य और उसका संगीत सीमाओं के पार जाकर लोगों के दिलों को जोड़ने का काम करते हैं।
हालिया पोस्ट में जब उन्होंने ब्रिक्स जैसे विशाल वैश्विक मंच के संदर्भ में अपनी यात्रा या कूटनीतिक एजेंडे की झलकियां साझा कीं, तो उसके साथ भारतीय संगीत के इन लोकप्रिय गीतों का उल्लेख स्वतः ही भारत-मलेशिया संबंधों की गर्मजोशी से जुड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष किसी देश की लोकप्रिय संस्कृति को इतना मान देता है, तो वह दोनों देशों की जनता के बीच एक स्वाभाविक आत्मीयता पैदा करता है, जो आधिकारिक संधियों से भी अधिक असरदार साबित होती है।
- 'चले चलो' और 'तुझे देखा तो ये जाना सनम': प्लेलिस्ट का संदेश
मलेशियाई पीएम की इस वायरल प्लेलिस्ट में शामिल गीतों के चयन को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं:
'चले चलो' (लगान): ए.आर. रहमान के संगीत और जावेद अख्तर के शब्दों से सजा यह गीत सामूहिक प्रयास, प्रतिकूल परिस्थितियों में एकजुटता और जीत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। ब्रिक्स जैसे उभरते देशों के समूह के संदर्भ में, जो एक बहुध्रुवीय और निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की वकालत करता है, इस गीत को एक प्रेरक कूटनीतिक रूपक के रूप में देखा जा रहा है।
'तुझे देखा तो ये जाना सनम' (DDLJ): कुमार सानू और लता मंगेशकर की आवाज़ में गाया गया यह गीत भारतीय सिनेमाई रोमांस का वैश्विक प्रतीक रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेष रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर में शाहरुख खान की लोकप्रियता निर्विवाद है, और इस गीत की मौजूदगी ने यह दर्शाया कि अनवर इब्राहिम उस सांस्कृतिक जुड़ाव को कितनी संजीदगी से महसूस करते हैं।
इसके अलावा सूची में मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मन्ना डे के दौर के कुछ पुराने सदाबहार नगमे भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि उनका रुझान केवल आज के दौर के पॉप संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय संगीत के स्वर्ण युग की समृद्ध विरासत से भी भली-भांति परिचित हैं।
- ब्रिक्स विस्तार और मलेशिया का रणनीतिक दृष्टिकोण
इस सांस्कृतिक चर्चा की पृष्ठभूमि में मलेशिया का ब्रिक्स समूह में शामिल होने का ठोस आर्थिक और भू-राजनीतिक आधार मौजूद है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) में एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में मलेशिया लगातार यह प्रयास कर रहा है कि वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार के विविधीकरण में अग्रणी भूमिका निभाए।
ब्रिक्स, जिसमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा हाल के वर्षों में कई नए सदस्य देश शामिल हुए हैं, वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को मुखर करने का एक प्रमुख मंच बन चुका है। मलेशिया की विदेश नीति 'तटस्थता और सर्व-समावेशी जुड़ाव' पर आधारित रही है। ऐसे में ब्रिक्स के जरिए वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ावा देना चाहता है। भारत के साथ मलेशिया के ऐतिहासिक और मजबूत व्यापारिक रिश्ते रहे हैं, और कुआलालंपुर इस नए बहुपक्षीय समीकरण में नई दिल्ली के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की दिशा में देख रहा है।
- सोशल मीडिया पर उत्साह और सांस्कृतिक कूटनीति
मलेशियाई प्रधानमंत्री का यह पोस्ट सामने आते ही भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के डिजिटल स्पेस में छा गया। भारतीय इंटरनेट यूजर्स ने अनवर इब्राहिम के संगीत चयन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कई यूजर्स ने इसे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक सेतु का आधुनिक प्रतीक बताया।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इक्कीसवीं सदी की कूटनीति केवल बंद कमरों में होने वाली वार्ताओं और संयुक्त बयानों तक सीमित नहीं रह गई है। संगीत, सिनेमा, खान-पान और खेल जैसे लोकप्रिय माध्यम दो देशों के बीच जन-जन के स्तर (People-to-People Contact) पर जो भावनात्मक पुल बनाते हैं, वह किसी भी कूटनीतिक पहल को टिकाऊ और मजबूत आधार प्रदान करता है। अनवर इब्राहिम की यह बॉलीवुड प्लेलिस्ट इसी सांस्कृतिक संवाद की एक खूबसूरत और प्रभावशाली मिसाल बनकर उभरी है।
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