YouTuber Santosh Pandit Arrested: मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप, पुणे पुलिस ने संतोष पंडित को किया गिरफ्तार
Santosh Pandit Arrested: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल के खिलाफ कथित आपत्तिजनक वीडियो शेयर करने के आरोप में पुणे पुलिस ने यूट्यूबर संतोष पंडित को गिरफ्तार कर लिया है।

- Santosh Pandit Arrest: पुणे पुलिस की बड़ी कार्रवाई, महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मामले में यूट्यूबर गिरफ्तार
- पुणे में देर रात यूट्यूबर संतोष पंडित गिरफ्तार: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट बनाने का आरोप, जानें क्या है पूरा मामला
- यूट्यूबर संतोष पंडित को पुणे पुलिस ने तड़के किया गिरफ्तार, कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर अमर्यादित वीडियो बनाने का लगा आरोप
महाराष्ट्र के राजनीतिक और डिजिटल मीडिया हलकों में उस समय खलबली मच गई, जब पुणे पुलिस ने 3 सितंबर 2026 की तड़के प्रसिद्ध यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संतोष पंडित को उनके निवास स्थान से गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि संतोष पंडित ने अपने यूट्यूब चैनल पर महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल और एक पूर्व महिला कॉर्पोरेटर के खिलाफ आपत्तिजनक, अमर्यादित और भ्रामक सामग्री प्रसारित की थी। कोथरुड पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस गिरफ्तारी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पुणे शहर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मंत्री और जन प्रतिनिधियों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में यूट्यूबर संतोष पंडित को गिरफ्तार किया है। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संतोष पंडित पर अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल तथा पुणे नगर निगम की एक महिला प्रतिनिधि के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करने और सामाजिक सौहार्द प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।
कोथरुड पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर (FIR) के तुरंत बाद हरकत में आई पुलिस टीम ने देर रात लगभग 1 बजे आरोपी के घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारी का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर जन प्रतिनिधियों की छवि धूमिल करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह मामला उस समय सामने आया जब संतोष पंडित के यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया गया, जिसे कोथरुड क्षेत्र के एसएनडीटी कॉलेज रोड के पास शूट किया गया था। वीडियो में स्थानीय नागरिक समस्याओं और विकास कार्यों का हवाला देते हुए मंत्री चंद्रकांत पाटिल और संबंधित महिला कॉर्पोरेटर का फोटो इस्तेमाल कर बेहद आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किया गया था। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस वीडियो को लाखों व्यूज मिले, जिससे मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की छवि को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई।
शिकायत मिलने के पश्चात कोथरुड थाना पुलिस ने 3 सितंबर की देर रात 1:28 बजे एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी संतोष पंडित को उसके आवास से गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1)(iv), 75(3), 356(2) और 352 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। पूरे मामले की जांच पुलिस निरीक्षक अनिल शिवाजी माने को सौंपी गई है।
मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले पक्ष का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या महिला के खिलाफ अमर्यादित और अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। शिकायतकर्ता के अनुसार, लगातार चेतावनी दिए जाने के बावजूद आपत्तिजनक कंटेंट बनाकर फैलाया जा रहा था, जिसके चलते पुलिस प्रशासन की शरण लेनी पड़ी।
दूसरी तरफ, गिरफ्तारी के दौरान संतोष पंडित के सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो साझा हुआ, जिसमें पुलिस बल उन्हें हिरासत में लेते हुए दिखाई दे रहा है। आरोपी और उनके समर्थकों का मानना है कि वे केवल जनहित के मुद्दों और नागरिक सुविधाओं पर सवाल उठा रहे थे। हालांकि, पुलिस का रुख स्पष्ट है कि कानून के दायरे से बाहर जाकर की गई किसी भी टिप्पणी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र पर इस घटना का सीधा असर देखने को मिल रहा है। इस कार्रवाई ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक कड़ा संदेश दिया है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट अपलोड करते समय मर्यादा और कानूनी सीमाओं का पालन करना अनिवार्य है।
पुणे पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीति में भी गर्माहट देखी जा रही है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ दल के समर्थक पुलिस की कार्रवाई को न्यायसंगत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर डिजिटल अभिव्यक्ति की आजादी और पुलिस कार्रवाई के तरीकों को लेकर बहस छिड़ गई है।
पुणे पुलिस आरोपी संतोष पंडित को न्यायालय के समक्ष पेश कर रिमांड की मांग करेगी ताकि मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों, रिकॉर्डिंग उपकरणों और वीडियो के प्रसार के पीछे की मंशा की जांच की जा सके। पुलिस साइबर सेल के माध्यम से आपत्तिजनक वीडियो सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटवाने (टेक-डाउन) की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी एक्ट और नई न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले दिनों में पुलिस जांच रिपोर्ट और अदालती सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है।
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