Asaram Bapu Bail Application Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को बड़ा झटका, शीर्ष अदालत बोली- तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर ही करेंगे विचार
Asaram Bail Application Verdict: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

- Supreme Court Refuses Bail To Asaram: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में जेल में बंद आसाराम की जमानत याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह कड़ा आदेश
- 'तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर ही सोचेंगे...', सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
- Asaram Case Update: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा- गंभीर स्थिति होने पर ही जमानत पर होगी विचार
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को देश की सर्वोच्च अदालत से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में हुई सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से दायर की गई ताजा जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक याचिकाकर्ता की तबीयत अत्यधिक गंभीर या चिंताजनक नहीं हो जाती, तब तक जमानत या सजा के निलंबन पर विचार नहीं किया जाएगा। जेल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे जेल के भीतर ही आसाराम को सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराते रहें। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब आसाराम को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
यह पूरा मामला यौन उत्पीड़न के गंभीर अपराध से जुड़ा है, जिसमें आसाराम को दोषी ठहराया जा चुका है। आसाराम ने अपनी बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सजा को निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। याचिका में दावा किया गया था कि उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है और उन्हें जेल से बाहर विशेष इलाज की आवश्यकता है। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि केवल सामान्य बीमारी या सामान्य स्वास्थ्य आधार पर इतनी गंभीर सजा पाए व्यक्ति को राहत नहीं दी जा सकती।
साल 2013 में दर्ज हुए इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जोधपुर की विशेष अदालत ने साल 2018 में आसाराम को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही दोषी जेल में बंद है। पिछले कुछ वर्षों में आसाराम की तरफ से राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों बार जमानत और इलाज के नाम पर अंतरिम राहत की मांग की गई, लेकिन हर बार अदालतों ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे नामंजूर कर दिया।
हालिया सुनवाई के दौरान आसाराम के वकीलों ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि दोषी की उम्र 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वे कई तरह की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, इसलिए मानवीय आधार पर उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जेल रिकॉर्ड के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और जेल के डॉक्टर नियमित जांच कर रहे हैं। अदालत ने दो टूक कहा कि जब तक स्थिति बेहद नाजुक या गंभीर रूप से नहीं बिगड़ती, तब तक रिहाई का कोई औचित्य नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पीड़िता के परिवार और कानूनी टीम ने संतोष व्यक्त किया है। पीड़िता के वकील का कहना है कि यह न्याय व्यवस्था की जीत है। इतने गंभीर अपराध के दोषी को स्वास्थ्य का बहाना बनाकर बाहर आने की अनुमति देना समाज और पीड़िता के मनोबल को तोड़ने जैसा होता। अदालत ने सही मायने में कानून की गरिमा को बरकरार रखा है।
दूसरी ओर, आसाराम के समर्थकों और उनके विधिक सलाहकारों ने इस निर्णय पर निराशा जताई है। उनके वकीलों का कहना है कि वे कानून के दायरे में रहते हुए आगे के विकल्पों पर विचार करेंगे और जेल प्रशासन से मांग करेंगे कि दोषी के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाए क्योंकि वे लगातार अस्वस्थ चल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले का समाज और न्यायपालिका दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि अपराध कितना भी पुराना हो और दोषी कितना भी प्रभावशाली या वृद्ध क्यों न हो जाए, कानून के सामने सभी बराबर हैं। विशेषकर महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में अदालतें किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। इससे कानून के प्रति आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में ही अपनी सजा काटनी होगी। हालांकि, अदालत ने जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यदि दोषी की तबीयत में किसी भी तरह की बड़ी गिरावट आती है, तो उसे तुरंत अनुशंसित उच्च चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित किया जाए। आसाराम की कानूनी टीम अब आने वाले समय में स्वास्थ्य रिपोर्टों के नए दस्तावेजों के आधार पर भविष्य में दोबारा अपील करने की योजना बना सकती है, लेकिन फिलहाल उन्हें निकट भविष्य में कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
What's Your Reaction?







