पटना की सबसे ऊंची और प्रतिष्ठित व्यावसायिक इमारतों में से एक, बिस्कोमान भवन में भीषण अग्निकांड, 13वीं मंजिल पर मची भारी तबाही।

बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक और सबसे व्यस्त व्यावसायिक परिसरों में से एक, बिस्कोमान भवन में सुबह अचानक

Jun 13, 2026 - 11:20
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पटना की सबसे ऊंची और प्रतिष्ठित व्यावसायिक इमारतों में से एक, बिस्कोमान भवन में भीषण अग्निकांड, 13वीं मंजिल पर मची भारी तबाही।
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • गांधी मैदान के समीप स्थित बिस्कोमान भवन के बेल्ट्रॉन कार्यालय में भड़कीं आग की लपटें, आसमान में छाया काले धुएं का गुबार।
  • दमकल की पांच अत्याधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म गाड़ियों और बारह वॉटर बाउजर ने पाया काबू, बड़ा हादसा टला, कोई हताहत नहीं।

बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक और सबसे व्यस्त व्यावसायिक परिसरों में से एक, बिस्कोमान भवन में सुबह अचानक एक भयानक हादसा हो गया। गांधी मैदान के पास स्थित इस गगनचुंबी इमारत की 13वीं मंजिल से अचानक आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं, जिससे पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों में तीव्र गति से अफरा-तफरी मच गई। घटना की शुरुआत तड़के हुई जब चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि भवन की खिड़कियों से आग की लपटें बाहर की ओर फेंकने लगीं। इतनी ऊंचाई पर आग भड़कने की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में स्थानीय लोगों तथा सुरक्षा कर्मियों ने इस विपदा की सूचना तुरंत पुलिस और दमकल विभाग के नियंत्रण कक्ष को दी।

प्रारंभिक सूचनाओं और घटनाक्रम के विश्लेषण से पता चला है कि आग की इस विभीषिका ने 13वीं मंजिल पर स्थित बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी बेल्ट्रॉन के मुख्य कार्यालय को अपनी चपेट में ले लिया। आग की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसने कार्यालय के बड़े हिस्से को पलक झपकते ही खाक कर दिया। इस भीषण अग्निकांड के कारण कार्यालय के भीतर संचित महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज, मूल्यवान फर्नीचर, आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह से जलकर नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। संबंधित विभागों और प्रशासन द्वारा वर्तमान में संपत्ति के कुल नुकसान का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि तबाही के वास्तविक आंकड़ों का सटीक पता लगाया जा सके।

यह अग्निकांड इतना भयानक और भयावह था कि भवन की सबसे ऊपरी मंजिलों की खिड़कियों को तोड़कर निकलती आग की लाल लपटें और गहरे काले धुएं का विशाल गुबार कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में साफ तौर पर देखा जा सकता था। इस विचलित करने वाले दृश्य को देखकर सुबह की सैर पर निकले लोग, राहगीर और स्थानीय नागरिक सड़कों पर ही ठिठक गए। कुछ ही मिनटों के भीतर बिस्कोमान भवन के सामने मुख्य सड़क और आसपास के मैदान के पास लोगों की एक बहुत बड़ी भीड़ जमा हो गई। हर कोई उत्सुकता और डर के साथ ऊपर की ओर देख रहा था, जिससे यातायात व्यवस्था भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई और मौके पर पुलिस बल को स्थिति संभालने के लिए मोर्चा संभालना पड़ा।

इमारत की अत्यधिक ऊंचाई होने के कारण अग्निशमन विभाग के बहादुर जवानों के सामने इस आग को नियंत्रित करना एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा था। सामान्य परिस्थितियों में इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे और पारंपरिक फायर टेंडर की पहुंच इतनी ऊंचाई तक संभव नहीं थी, जिसके कारण पानी की बौछारें बेअसर साबित हो रही थीं। मामले की गंभीरता और संकट की भयावहता को भांपते हुए दमकल मुख्यालय ने तुरंत विशेष आपातकालीन रणनीति अपनाई। घटनास्थल पर अविलंब 5 अत्याधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म (विशाल स्वचालित सीढ़ियां) और 12 बड़े वॉटर बाउजर (उच्च क्षमता वाले पानी के टैंकर) सहित हाईराइज फायर फाइटिंग उपकरणों को आपातकालीन रूप से तैनात किया गया। बिस्कोमान भवन के इतिहास में यह अब तक के सबसे कठिन और ऊंचे स्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन्स में से एक माना जा रहा है, जहां फायर फाइटर्स ने जमीन से लगभग 150 फीट की ऊंचाई पर हवा में झूलते हुए आग की लपटों का सामना किया।

इन अत्याधुनिक जीवनरक्षक उपकरणों और विशेष दस्तों के पहुंचने के बाद, दमकलकर्मियों ने एक सोची-समझी योजना के तहत अंदर और बाहर दोनों तरफ से एक साथ चौतरफा राहत एवं बचाव अभियान का सूत्रपात किया। हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से जवानों ने खिड़कियों के रास्ते 13वीं मंजिल की बाहरी दीवारों पर पानी की भारी बौछारें डालनी शुरू कीं, जबकि दमकल की दूसरी टुकड़ियों ने श्वास तंत्र (ब्रीदिंग एपरेटस) पहनकर इमारत के आंतरिक रास्तों से ऊपर की ओर रुख किया। इस दोहरे हमले के कारण आग के फैलाव की गति पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिली और सुरक्षा घेरे को मजबूत किया जा सका।

आग की तीव्र लपटों के साथ-साथ पूरी गगनचुंबी इमारत के विभिन्न हिस्सों, गलियारों और सीढ़ियों में अत्यधिक जहरीला और घना धुआं फैल गया था, जिससे भवन के भीतर मौजूद विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, सुरक्षा प्रहरियों और आगंतुकों में तीव्र दहशत तथा घबराहट का माहौल बन गया। ऐसी दमघोंटू स्थिति में सुरक्षा कर्मियों और दमकल की विशेष रेस्क्यू टीम ने अद्वितीय साहस तथा तत्परता का परिचय देते हुए पूरी इमारत में फंसे हुए सभी व्यक्तियों को अत्यंत सुरक्षित तरीके से आपातकालीन निकास द्वारों के माध्यम से बाहर निकाला। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी और राहत की बात यह रही कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या गंभीर रूप से झुलसने की कोई अप्रिय सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

अग्निशमन विभाग की अत्यधिक कुशल टीमों ने लगातार कई घंटों की कठोर मशक्कत, सूझबूझ और अदम्य साहस के बाद अंततः इस भीषण आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों और आपदा प्रबंधन के जानकारों का यह दृढ़ मत है कि यदि समय रहते इस अत्याधुनिक हाईराइज रेस्क्यू और फायर फाइटिंग ऑपरेशन की शुरुआत नहीं की गई होती, तो यह बेकाबू आग बिस्कोमान भवन की अन्य संवेदनशील मंजिलों तक आसानी से फैल सकती थी, जिससे एक बहुत बड़ा और अपूरणीय राष्ट्रीय हादसा घटित हो सकता था। वर्तमान स्थिति में हालांकि आग पूरी तरह शांत हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से कूलिंग ऑपरेशन काफी देर तक जारी रखा गया।

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