"जो एक दिन जंतर-मंतर नहीं गए, वो क्रेडिट लेने की होड़ में जुटे" — भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता का तीखा हमला
भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो एक दिन वहां नहीं पहुंचे, वे अब क्रेडिट चोरी के खेल में जुटे हैं।

- Rohan Gupta on Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर नहीं गए और क्रेडिट चोरी में लग गए, भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता का विपक्ष पर निशाना
- Jantar Mantar Protest Credit Politics: क्रेडिट चोरी की गेम में लगे विरोधी दल, रोहन गुप्ता ने जंतर-मंतर आंदोलन पर साधा निशाना
- रोहन गुप्ता का विपक्षी दलों पर बड़ा हमला: जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर क्रेडिट चोरी की राजनीति का लगाया आरोप
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए छात्र आंदोलन और राजनीतिक हलचलों को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। रोहन गुप्ता ने आरोप लगाया कि जो विपक्षी नेता पूरे आंदोलन के दौरान एक दिन भी प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच नहीं पहुंचे, वे अब आंदोलन का श्रेय लेने और 'क्रेडिट चोरी की गेम' में शामिल हो गए हैं। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि जब आंदोलन चल रहा था, तब विपक्ष मूक दर्शक बना रहा और अब माहौल भांपकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद सत्र के दौरान इस बयानबाजी और क्रेडिट वॉर का असर गहराने के आसार हैं।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के खत्म होने के बाद अब राजनीतिक दलों के बीच इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने विपक्षी नेताओं के रुख पर सवाल उठाए हैं।
रोहन गुप्ता ने अपने बयान में कहा, "जो लोग जंतर-मंतर एक दिन नहीं गए, वो क्रेडिट चोरी की गेम में लग गए हैं।" उनका यह बयान सीधे तौर पर उन विपक्षी नेताओं और प्रमुख राजनीतिक चेहरों की ओर इशारा करता है, जो आंदोलन के समय भौतिक रूप से जंतर-मंतर पर उपस्थिति दर्ज कराने से बचते रहे, लेकिन अब प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन की सफलता का दावा कर रहे हैं।
दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर पिछले कुछ हफ्तों से युवाओं, छात्रों और विभिन्न नागरिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान परीक्षाओं में अनियमितता, प्रशासनिक नीतियों और पारदर्शी प्रक्रियाओं की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई गई।
आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विभिन्न सामाजिक और नागरिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। हालांकि, उस समय कई प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने दूरी बनाए रखी या केवल डिजिटल माध्यमों से बयान जारी किए। अब जब जंतर-मंतर से धरना स्थल खाली हो चुका है और प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की सफाई करा दी है, तो राजनीतिक सियासत गर्मा गई है।
संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले विपक्षी दलों ने आंदोलन के मुद्दों को अपने एजेंडे में शामिल कर सरकार को घेरने की योजना बनाई। इसी के जवाब में भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने मोर्चा संभालते हुए विपक्ष पर अवसरवादिता और राजनीतिक पाखंड का आरोप जड़ा।
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भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता का पक्ष: रोहन गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार हमेशा युवाओं और आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील रही है तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा, "जब आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर थे, तब ये नेता अपने वातानुकूलित कमरों में बैठे थे। अब जब बातचीत और प्रक्रिया अपने मुकाम पर पहुंच रही है, तो ये क्रेडिट लेने की रेस में सबसे आगे खड़े होना चाहते हैं। यह जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।"
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विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया: विपक्षी नेताओं ने भाजपा के इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि वे शुरू से ही आंदोलनकारियों की मांगों के समर्थन में खड़े रहे हैं और उनके मुद्दों को लगातार उठाया है। विपक्ष का तर्क है कि जब सरकार संवाद करने से कतरा रही थी, तब विपक्षी प्रतिनिधियों ने ही संसद से लेकर सड़क तक जनहित में आवाज बुलंद की।
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आंदोलनकारियों और नागरिक समाज का नजरिया: आंदोलन से जुड़े निष्पक्ष प्रतिनिधियों का मानना है कि किसी भी जन आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक क्रेडिट वॉर के लिए नहीं किया जाना चाहिए। छात्रों और युवाओं की मुख्य प्राथमिकता उनकी मांगों का वास्तविक समाधान होना है, न कि किसी पार्टी की सियासत का जरिया बनना।
रोहन गुप्ता के इस बयान ने आगामी संसद सत्र से पहले राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है। इस बयानबाज़ी के बाद अब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है।
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राजनीतिक विमर्श में बदलाव: जंतर-मंतर के मुख्य मुद्दों से ज्यादा अब ध्यान इस बात पर केंद्रित हो गया है कि किस दल ने आंदोलन का कितना समर्थन किया और कौन केवल राजनीतिक फायदा उठाना चाहता है।
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संसद सत्र पर असर: संसद के शुरू होने वाले सत्र में अब न केवल मूल मांगों पर चर्चा होगी, बल्कि इस क्रेडिट वॉर और राजनीतिक टूलकिट के आरोपों-प्रत्यारोपों की गूंज भी देखने को मिलेगी।
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जनता के बीच संदेश: जनता और आंदोलनकारी युवाओं के सामने दोनों पक्षों के दावे और वास्तविक उपस्थिति का सच स्पष्ट हो रहा है, जिससे राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता की परीक्षा हो रही है।
आने वाले दिनों में संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होना तय है। जहां एक ओर विपक्ष संसद के पटल पर सरकार को घेरने और आंदोलनकारियों की मांगों को उठाने का प्रयास करेगा, वहीं दूसरी ओर भाजपा विपक्ष पर 'सहानुभूति का नाटक' करने और 'क्रेडिट चोरी' का आरोप लगाकर आक्रामक घेराबंदी जारी रखेगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद में वास्तविक नीतिगत सुधारों पर सहमति बन पाती है या फिर यह सियासत केवल क्रेडिट लेने और देने की खींचतान तक सीमित रह जाती है।
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