PM Modi Video Message: पीएम मोदी के छात्रों के लिए संदेश पर भड़के खरगे, बोले- संसद में दें बयान
Mallikarjun Kharge News: पीएम नरेंद्र मोदी के छात्रों के नाम वीडियो संदेश पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निशाना साधा। खरगे ने कहा कि पीएम को संसद में अपनी बात रखनी चाहिए।

- Mallikarjun Kharge on PM Modi: रात में वीडियो जारी करने के बजाय संसद में बोलें पीएम, खरगे का तंज
- 'रात 12 बजे वीडियो क्यों? संसद में आकर बोलें पीएम'— छात्रों के मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खरगे का तीखा हमला
- Political News: पीएम मोदी के वीडियो मैसेज पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, रखी संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किए गए वीडियो संदेश पर कड़ा ऐतराज जताया है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए खरगे ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को इस संवेदनशील मुद्दे पर देश या छात्रों से कुछ कहना है तो उन्हें सीधे संसद में आकर अपनी बात रखनी चाहिए, तभी उसे प्रामाणिक माना जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रात के 12 बजे बयान जारी करने के बजाय दिन में संसद के पटल पर जवाब देना ज्यादा उचित होता। विपक्षी दलों की इस तीखी मांग के बाद संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार बढ़ गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के छात्रों को संबोधित करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें छात्रों से जुड़े विषयों और उनकी समस्याओं पर विचार रखे गए थे। हालांकि, इस वीडियो के समय और माध्यम को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया या वीडियो संदेशों के माध्यम से बात कहने के बजाय देश के प्रधान को जनप्रतिनिधियों के सामने संसद में आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। खरगे के इस बयान के बाद यह मुद्दा सीधे तौर पर संसदीय प्रक्रियाओं और सरकार की जवाबदेही से जुड़ गया है।
संसद सत्र के दौरान देश के छात्रों की विभिन्न समस्याओं, परीक्षाओं और भविष्य से जुड़ी चिंताओं पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी की ओर से देर रात छात्रों के नाम एक वीडियो मैसेज साझा किया गया।
इस वीडियो संदेश के सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रात के 12 बजे वीडियो संदेश के जरिए बात रखना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। खरगे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री वास्तव में छात्रों के हित में कुछ कहना चाहते हैं या सरकार का रुख स्पष्ट करना चाहते हैं, तो उन्हें दिन के समय संसद के दोनों सदनों में से किसी एक में आकर आधिकारिक बयान देना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब पीएम संसद में बोलेंगे और अपनी योजनाएं रखेंगे, तब विपक्ष उनके बयानों का आकलन करेगा।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में विपक्ष और सत्तापक्ष के तर्क पूरी तरह आमने-सामने आ चुके हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि देश का शीर्ष नेतृत्व जब भी किसी बड़े राष्ट्रीय या जनहित के मुद्दे पर बात करे, तो उसकी शुरुआत लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद से होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, सोशल मीडिया पर दिया गया वक्तव्य केवल एकतरफा संवाद होता है, जबकि संसद में दिया गया वक्तव्य आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनता है और उस पर चर्चा का अवसर भी मिलता है।
वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और सरकार के प्रतिनिधियों ने विपक्ष के इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। सत्तापक्ष का तर्क है कि प्रधानमंत्री का उद्देश्य सीधे देश के युवाओं और छात्रों से जुड़ना तथा उनका मार्गदर्शन करना था। बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री समय-समय पर तकनीक का सहारा लेकर सीधे जनता से संवाद करते रहे हैं और इसे संसद की अवहेलना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक पारे को और बढ़ा दिया है। छात्रों के मुद्दों पर पहले से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए विपक्षी दल अब इस मुद्दे को संसद में बहस के दौरान प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। इसका सीधा असर आगामी संसदीय बैठकों पर पड़ सकता है, जहां विपक्ष प्रधानमंत्री के सीधे जवाब की मांग को लेकर हंगामा कर सकता है। इसके साथ ही युवाओं और छात्रों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा छिड़ गई है कि क्या ऐसे संवेदनशील मामलों पर केवल वीडियो संदेश काफी है या फिर नीतिगत फैसलों के लिए संसदीय बहस जरूरी है।
आने वाले दिनों में संसद के पटल पर इस विषय को लेकर भारी हंगामे के आसार हैं। विपक्षी पार्टियां एक होकर सरकार से मांग कर सकती हैं कि प्रधानमंत्री छात्रों के मुद्दों पर सदन के भीतर नियम के तहत बयान दें। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष की इस मांग पर क्या रख अपनाती है—क्या प्रधानमंत्री या शिक्षा मंत्री संसद में इस पर कोई औपचारिक वक्तव्य जारी करते हैं, या फिर यह गतिरोध यूं ही बना रहता है।
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