CWG 2026: झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दिलाया पहला मेडल, पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बिहार के झंडू कुमार ने भारत का खाता खोल दिया है। उन्होंने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक अपने नाम किया।

- Commonwealth Games 2026: बिहार के झंडू कुमार का कमाल, पुरुषों की पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का खाता खोल जीता कांस्य पदक
- पोलियो को मात देकर रचा इतिहास! बिहार के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला ब्रॉन्ज मेडल
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का खाता खुला, झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (राष्ट्रमंडल खेल) में भारतीय दल के लिए शानदार शुरुआत हुई है। बिहार के होनहार पैरा एथलीट झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारत का पदक तालिका में खाता खोल दिया है। बचपन में पोलियो जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती को अपने दृढ़ संकल्प से मात देने वाले झंडू ने प्रतिस्पर्धा में 181 किग्रा और 190 किग्रा की सफल लिफ्ट के साथ 130.9 अंक हासिल किए और कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) अपने नाम किया। हालांकि उनका 196 किग्रा का अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका, लेकिन उनके इस जुझारू प्रदर्शन के दम पर भारत को प्रतियोगिता में पहला मेडल मिला। इस ऐतिहासिक जीत के साथ झंडू कुमार ने देश और अपने गृह राज्य का नाम वैश्विक मंच पर रोशन कर दिया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पावरलिफ्टिंग एरिना में भारत को प्रतियोगिता का पहला पदक हासिल हुआ। पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। पैरा पावरलिफ्टिंग में अंकों की गणना एथलीट के शरीर के वजन और उठाये गए भार के संयोजन (AH फार्मूला) के आधार पर की जाती है। झंडू कुमार ने अपनी तीन में से दो कोशिशों को पूरी सटीकता के साथ पूरा किया। इस स्पर्धा में विश्व स्तर के शीर्ष पैरा पावरलिफ्टरों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां झंडू ने अपने धैर्य और ताकत के बल पर भारत के लिए तीसरा स्थान पक्का किया और कांस्य पदक अपने नाम किया।
प्रतिस्पर्धा के दिन भारतीय दल और खेल प्रेमियों की निगाहें पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग श्रेणी पर टिकी थीं। झंडू कुमार ने अपनी पहली ही कोशिश में 181 किग्रा का भार सफलतापूर्वक उठाकर शानदार शुरुआत की और जज बोर्ड से हरी झंडी हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में भार को बढ़ाते हुए 190 किग्रा उठाया। इस सफल लिफ्ट ने उन्हें पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा और उन्होंने 130.9 अंकों का स्कोर हासिल कर लिया। पदक का रंग बदलने और रजत या स्वर्ण की ओर कदम बढ़ाने के उद्देश्य से झंडू ने अपने अंतिम व तीसरे प्रयास में 196 किग्रा भार उठाने का जोखिम उठाया। हालांकि यह अंतिम लिफ्ट तकनीकी रूप से सफल नहीं हो सकी, लेकिन शुरुआती दो लिफ्ट के आधार पर मिला 130.9 अंकों का कुल स्कोर उन्हें कांस्य पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।
झंडू कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खेल जगत और राजनीतिक गलियारों से बधाइयों का तांता लग गया। प्रधानमंत्री और खेल मंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए उनके अदम्य साहस, मेहनत और लगन की सराहना की और कहा कि पोलियो जैसी बीमारी से लड़कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना देश के करोड़ों युवाओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा स्रोत है। बिहार के मुख्यमंत्री और स्थानीय खेल संगठनों ने भी झंडू कुमार की इस सफलता पर खुशी जाहिर की और राज्य सरकार की ओर से नागरिक सम्मान तथा प्रोत्साहन राशि देने की बात कही। वहीं, जीत के बाद मीडिया से बातचीत में झंडू कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच, परिवार और देशवासियों की दुआओं को दिया। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
कॉमनवेल्th गेम्स 2026 में भारत का खाता खुलने से पूरे भारतीय दल के मनोबल में जबरदस्त इजाफा हुआ है। किसी भी बड़े मल्टी-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में पहला पदक आना बाकी एथलीटों के लिए भी सकारात्मक ऊर्जा का काम करता है। झंडू कुमार की यह सफलता भारत में पैरा-स्पोर्ट्स, विशेष रूप से पैरा पावरलिफ्टिंग के प्रति दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे पहले बुनियादी सुविधाओं की कमी और शारीरिक अक्षमताओं से जूझने वाले युवा एथलीटों को आगे आने का प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, बिहार जैसे राज्यों में खेल बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने और पैरा एथलीटों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में प्रशासनिक प्रयासों को गति मिलेगी।
कांस्य पदक जीतने के बाद झंडू कुमार का ध्यान अब आगामी एशियन पैरा गेम्स और विश्व पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारियों पर केंद्रित रहेगा। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा उन्हें आगे की उच्च स्तरीय ट्रेनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञ कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। भारत के खेल प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि झंडू की यह जीत आने वाले दिनों में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान भारतीय दल द्वारा और अधिक पदक जीतने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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