Delhi Police Action: महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस का बयान, डीसीपी नेहा यादव बोलीं- क्राइम ब्रांच को भेजी गई शिकायत

दिल्ली पुलिस के जवानों पर महिला पत्रकारों से यौन हिंसा और दुर्व्यवहार के आरोपों पर डीसीपी नेहा यादव का आधिकारिक बयान आया है। मेडिकल कराकर शिकायत क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

Oct 4, 2026 - 16:42
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Delhi Police Action: महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस का बयान, डीसीपी नेहा यादव बोलीं- क्राइम ब्रांच को भेजी गई शिकायत

राजधानी दिल्ली में कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार एवं यौन हिंसा के आरोपों के मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। नई दिल्ली जिला पुलिस की उपायुक्त (डीसीपी) नेहा यादव ने इस पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि संबंधित महिला पत्रकारों से औपचारिक शिकायत मिलने के बाद कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने पुष्टि की कि शिकायतकर्ताओं का नियमानुसार चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल एग्जामिनेशन) कराया गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी शिकायत विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच के लिए दिल्ली पुलिस की विशेष अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को हस्तांतरित कर दी गई है।

यह विवाद एक विरोध प्रदर्शन अथवा घटनाक्रम के कवरेज के दौरान उपजा था, जहां मौके पर मौजूद महिला मीडियाकर्मियों ने पुलिसकर्मियों पर कार्यस्थल पर शारीरिक धक्का-मुक्की, अनुचित स्पर्श और अमर्यादित आचरण करने के आरोप लगाए थे। पत्रकारों और नागरिक समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया जा रहा था तथा दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही थी। मामले के तूल पकड़ने और सामाजिक दबाव बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्चाधिकारियों ने सामने आकर उठाए गए कदमों की जानकारी सार्वजनिक की।

डीसीपी नेहा यादव के अनुसार, जब भी किसी महिला द्वारा यौन दुर्व्यवहार, अवांछित शारीरिक संपर्क या गरिमा भंग करने की लिखित या मौखिक शिकायत प्राप्त होती है, तो पुलिस विभाग स्थापित कानूनी संहिता के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने बताया कि शिकायत प्राप्त होते ही सबसे पहले शिकायतकर्ता पत्रकारों को चिकित्सीय सहायता और परीक्षण के लिए भेजा गया, ताकि किसी भी संभावित चोट अथवा साक्ष्य का आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, स्थानीय पुलिस पर किसी भी प्रकार के पक्षपात अथवा अपने ही सहयोगियों को बचाने के आरोपों की संभावना को खारिज करने के लिए जांच को जिला स्तर से हटा दिया गया है। मामले को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित करने का निर्णय इसीलिए लिया गया ताकि एक विशेषज्ञ और स्वतंत्र जांच एजेंसी घटनास्थल के सभी पहलुओं की तथ्यात्मक जांच कर सके।

क्राइम ब्रांच की जांच

क्राइम ब्रांच की टीम अब इस मामले में तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर साक्ष्य संकलित करेगी। जांच एजेंसी के अधिकारियों के समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं की पड़ताल करने की जिम्मेदारी होगी:

  1. सीसीटीवी और वीडियोग्राफी फुटेज का परीक्षण: घटना के समय मौके पर मौजूद मीडिया कैमरों, पुलिस द्वारा कराई जा रही आधिकारिक वीडियोग्राफी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को कब्जे में लेकर फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण किया जाएगा।

  2. ड्यूटी चार्ट और कार्मिकों की पहचान: उस दौरान संबंधित स्थल पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बलों के जवानों और विशेष ड्यूटी अधिकारियों के रोस्टर की जांच की जाएगी, ताकि मौके पर मौजूद अधिकारियों की सटीक पहचान हो सके।

  3. गवाहों और शिकायतकर्ताओं के बयान: शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों और उनके साथी मीडियाकर्मियों के औपचारिक बयान दर्ज किए जाएंगे।

पत्रकार संगठनों का आक्रोश और सुरक्षा की मांग

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद दिल्ली और देश के विभिन्न पत्रकार संगठनों, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और महिला पत्रकार समूहों ने गहरा क्षोभ प्रकट किया है। मीडिया संघों का कहना है कि फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों, विशेष रूप से महिला पत्रकारों, की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य और पुलिस प्रशासन की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी है। जब कानून लागू करने वाली एजेंसी के कर्मियों पर ही इस प्रकार के संगीन आरोप लगते हैं, तो इससे कार्यस्थल की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक चिन्हित अधिकारियों को फील्ड ड्यूटी से अलग रखा जाए ताकि वे किसी भी रूप में जांच को प्रभावित न कर सकें।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और महिलाओं के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत लोकसेवकों के खिलाफ आने वाली गंभीर शिकायतों पर पुलिस महकमे को अतिरिक्त निष्पक्षता प्रदर्शित करनी होती है। डीसीपी नेहा यादव द्वारा केस को क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की बात कहना यह दर्शाता है कि विभाग पर मामले को पारदर्शी तरीके से सुलझाने का दबाव है।

आने वाले दिनों में क्राइम ब्रांच की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि मामले में किन विशिष्ट कानूनी धाराओं के तहत आगे की दंडात्मक प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे कानून के दायरे में रहकर बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष तरीके से मामले की तह तक जाएंगे।

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