अंबाला में बड़ा हादसा: 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 3 साल का बच्चा, सेना और NDRF ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
Ambala Borewell Incident: अंबाला के धन्यौडा गांव में साढ़े तीन साल का बच्चा खेलते समय 220 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। सेना और NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

- Ambala Borewell Rescue Operation: अंबाला में 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरा साढ़े तीन साल का मासूम, सेना और NDRF ने संभाला मोर्चा
- Ambala Boy Falls into Borewell: अंबाला के धन्यौडा में खेत में खेलते समय बोरवेल में गिरा बच्चा, रेस्क्यू के लिए बुलाई गई सेना
- Ambala Accident Update: अंबाला के शाहपुर के पास बोरवेल में गिरा मासूम, सेना ने रेस्क्यू के लिए संभाला मोर्चा
हरियाणा के अंबाला में शाहपुर के नजदीक धन्यौडा गांव से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। यहां जून 2026 में धान की रोपाई के दौरान खेत में खेल रहा एक साढ़े तीन साल का मासूम बच्चा करीब 220 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। पीड़ित बच्चे की पहचान निर्भय के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ खेत में गया था। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन की टीमें और पोकलेन मशीनें मौके पर पहुंच गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। फिलहाल बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
यह हृदयविदारक घटना अंबाला के शाहपुर इलाके के पास स्थित धन्यौडा गांव की है। धान के सीजन के कारण खेतों में काम चल रहा था, तभी एक साढ़े तीन साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते खेत में ही मौजूद एक गहरे बोरवेल की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि यह बोरवेल लगभग 220 फीट गहरा है और काफी समय से खराब पड़ा था। खराब होने के कारण इसका इस्तेमाल तो नहीं हो रहा था, लेकिन इसे ठीक से ढका भी नहीं गया था। लापरवाही के कारण खुला रह गया यह बोरवेल मासूम के लिए काल का जाल बन गया और बच्चा उसमें जा गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, साढ़े तीन साल का निर्भय अपने चाचा के साथ खेत पर गया हुआ था। इन दिनों ग्रामीण इलाकों में धान लगाने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है, जिसके चलते खेत में मजदूरों और परिवार के लोगों की व्यस्तता काफी अधिक थी। निर्भय के चाचा का ध्यान भी धान लगाने के काम में लगा हुआ था। इसी व्यस्तता के बीच बच्चे पर से कुछ पलों के लिए नजर हट गई और वह अकेले ही खेलते हुए खेत के दूसरे छोर पर चला गया।
वहां पहले से मौजूद खुला और बंद पड़ा बोरवेल घास-फूस या ढीली मिट्टी से आंशिक रूप से छिपा हुआ था। बच्चा जैसे ही उसके पास पहुंचा, वह सीधे 220 फीट गहरे गड्ढे के अंदर समा गया। जब कुछ देर बाद बच्चे की आवाज सुनाई दी और वह आसपास नहीं दिखा, तब परिवार को हादसे का अहसास हुआ। बोरवेल के पास जाकर देखने पर बच्चे के गिरने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।
हादसे की खबर मिलते ही बच्चे के माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताया है लेकिन खुले बोरवेल को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की है।
मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया, "हमारी पहली प्राथमिकता बच्चे की जान बचाना और उसे सकुशल बाहर निकालना है। हमने तुरंत सेना और एनडीआरएफ से संपर्क किया और दोनों ही टीमें बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गईं। तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में खुदाई और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है।"
इस घटना ने एक बार फिर देश में खुले और असुरक्षित बोरवेलों के कारण होने वाले हादसों की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकारों के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद खेतों में बोरवेल को खुला छोड़ना मासूमों की जान के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। इस हादसे के बाद पूरे अंबाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में मौजूद किसी भी चालू या बंद बोरवेल को तुरंत पूरी तरह से सील करें।
फिलहाल धन्यौडा गांव में रेस्क्यू ऑपरेशन सबसे नाजुक दौर में है। भारतीय सेना के जवान और एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम बोरवेल के समानांतर एक दूसरा गड्ढा खोदने की रणनीति पर काम कर रही है। कैमरे के जरिए बोरवेल के भीतर बच्चे की स्थिति और उसकी मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है। बच्चे तक ऑक्सीजन की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पाइप डाले गए हैं। पूरा प्रशासन और ग्रामीण इस समय निर्भय की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और उम्मीद है कि अगले कुछ घंटों में सेना के जांबाज बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लेंगे।
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