मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा- CO ऋषिका सिंह ने महिला कांवड़ यात्रियों के पैर दबाए, अखिलेश यादव ने की तारीफ। 

Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान फुगाना सर्कल की पुलिस अधिकारी (CO) ऋषिका सिंह ने अपनी मानवता और सेवा भावना ...

Jul 19, 2025 - 11:01
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मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा- CO ऋषिका सिंह ने महिला कांवड़ यात्रियों के पैर दबाए, अखिलेश यादव ने की तारीफ। 
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा- CO ऋषिका सिंह ने महिला कांवड़ यात्रियों के पैर दबाए

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान फुगाना सर्कल की पुलिस अधिकारी (CO) ऋषिका सिंह ने अपनी मानवता और सेवा भावना से सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने थकी हुईं महिला कांवड़ यात्रियों के पैर दबाकर उनकी सेवा की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस कार्य की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तारीफ की और कहा, "सेवा का भाव अच्छा है।" यह घटना न केवल पुलिस की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन में प्रशासन और जनता के बीच की कड़ी को भी मजबूत करती है।

सावन मास में हर साल होने वाली कांवड़ यात्रा उत्तर भारत में एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगा जल लेकर अपने गंतव्य तक पैदल यात्रा करते हैं। मुजफ्फरनगर, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है और दिल्ली से 120 किलोमीटर दूर स्थित है, कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों में से एक है। इस दौरान पुलिस और प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए दिन-रात तैनात रहते हैं।

17 जुलाई 2025 की रात को, फुगाना सर्कल की CO ऋषिका सिंह मुजफ्फरनगर-शामली बॉर्डर के पास लालूखेड़ी चौकी क्षेत्र में ड्यूटी पर थीं। वहां एक शिविर में उन्होंने देखा कि कुछ महिला कांवड़ यात्री लंबी पैदल यात्रा के कारण थकान और पैरों में दर्द से परेशान थीं। यह देखकर ऋषिका सिंह भावुक हो गईं और उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के महिला यात्रियों के पैर दबाकर उनकी सेवा शुरू कर दी। इस दृश्य को एक स्थानीय व्यक्ति ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में ऋषिका सिंह महिला कांवड़ियों और उनके बच्चों के पैर दबाती नजर आईं, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया।

  • ऋषिका सिंह का बयान

जब इस घटना के बारे में ऋषिका सिंह से बात की गई, तो उन्होंने सादगी से कहा, "ड्यूटी और श्रद्धा मेरे लिए बराबर महत्वपूर्ण हैं। हमारी ट्रेनिंग हमें सिखाती है कि 'मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।' यह कोई विशेष कार्य नहीं था, बस एक मानवीय भाव था, जिसे मैंने निभाया।" उन्होंने आगे कहा कि खाकी वर्दी पहनने के बाद उनका कोई भेदभाव नहीं रहता, न धर्म के आधार पर, न जाति के। "जो सहायता हम अपने स्तर पर कर सकते हैं, उसे करना हमारा कर्तव्य है।" उनके इस बयान ने पुलिस विभाग के सकारात्मक पहलुओं को उजागर किया, जो अक्सर आम जनता की नजरों में कम आते हैं।

ऋषिका सिंह ने यह भी बताया कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे एडीजी, डीआईजी, और एसएसपी, ने निर्देश दिए थे कि ड्यूटी के साथ-साथ कांवड़ यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों और शिवभक्तों की सेवा भी की जाए। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि यह यात्रा सकुशल संपन्न हो, और इसमें हमारा छोटा-सा योगदान भी शामिल है।"

  • अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

18 जुलाई 2025 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मुजफ्फरनगर की CO ऋषिका सिंह ने कांवड़ यात्रियों की सेवा कर एक मिसाल कायम की है। सेवा का यह भाव अच्छा है।" उनकी यह टिप्पणी इस घटना के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है। अखिलेश यादव ने पहले भी कांवड़ यात्रा को लेकर सकारात्मक बयान दिए हैं, जैसे कि उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्थाएं। हालांकि, उन्होंने बीजेपी सरकार पर कांवड़ियों के लिए कॉरिडोर न बनाने का भी आरोप लगाया था। इस संदर्भ में उनकी यह टिप्पणी पुलिस और जनता के बीच सौहार्द को बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की सक्रियता उल्लेखनीय रही। जिला प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, पानी, मेडिकल कैंप, और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था की थी। मुजफ्फरनगर पुलिस ने ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए निगरानी बढ़ाई थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके बावजूद, ऋषिका सिंह की यह पहल सामान्य ड्यूटी से आगे बढ़कर मानवीय संवेदनशीलता का प्रतीक बनी।

मुजफ्फरनगर, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिला है, कांवड़ यात्रा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। यह जिला गंगा नदी के पास स्थित है और हरिद्वार से आने वाले यात्रियों के लिए प्रमुख पड़ाव है। स्थानीय लोग और प्रशासन हर साल इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करते हैं। इस बार ऋषिका सिंह की सेवा ने इस सहयोग को और मजबूत किया।

ऋषिका सिंह की इस पहल ने न केवल स्थानीय लोगों का दिल जीता, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनकी खूब तारीफ हुई। कई लोगों ने लिखा कि "वर्दी में ऐसी सादगी और सेवा भाव हर अधिकारी में होना चाहिए।" कुछ ने इसे भारतीय संस्कृति में सेवा और श्रद्धा की परंपरा से जोड़ा, जहां थके हुए यात्रियों की मदद करना पुण्य का कार्य माना जाता है।

हालांकि, इस घटना को कुछ लोग धार्मिक और राजनीतिक नजरिए से भी देख रहे हैं। अखिलेश यादव की तारीफ को कुछ ने उनकी सनातन धर्म के प्रति सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश माना, क्योंकि हाल के दिनों में उन पर सनातन विरोधी बयानों का आरोप लग चुका है। उदाहरण के लिए, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के साथ उनके विवाद ने सियासी तूल पकड़ा था। फिर भी, इस घटना में उनकी टिप्पणी को ज्यादातर लोग सकारात्मक मान रहे हैं।

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