Ayodhya Ram Mandir: चढ़ावा चोरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा एक्शन, सभी कर्मचारियों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन
Ayodhya Ram Mandir Security: चढ़ावा चोरी के बाद राम मंदिर के नए CEO एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने सभी कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन और चरित्र प्रमाण पत्र की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं।

- अयोध्या राम मंदिर में सुरक्षा का नया पहरा: नए CEO एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का बड़ा फैसला, कर्मियों का बैकग्राउंड और चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य
- Ram Mandir Security Overhaul: दानपात्र से चोरी की घटना के बाद एक्शन में ट्रस्ट, कर्मचारियों के पारिवारिक ब्योरे की होगी गहन जांच
- अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर में तैनात हर कर्मचारी का होगा नया वेरिफिकेशन, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने तय किए सख्त मानक
अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र ने अत्यंत सख्त कदम उठाए हैं। मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कार्यभार संभालते ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं। नए आदेशों के तहत राम मंदिर परिसर में कार्यरत हर एक कर्मचारी का नए सिरे से अनिवार्य पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराया जाएगा।
इस उच्चस्तरीय सत्यापन अभियान के तहत केवल सामान्य पहचान की जांच ही नहीं होगी, बल्कि कर्मचारियों का आधिकारिक चरित्र प्रमाण पत्र, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जांच और उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि का पूरा ब्योरा एकत्र किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट और सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी, तकनीकी चूक या सुरक्षा में सेंध की संभावना को पूरी तरह समाप्त करना है।
- चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सिस्टम में हड़कंप
राम जन्मभूमि परिसर में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन करोड़ों रुपये का दान और कीमती आभूषण अर्पित करते हैं। दानपात्रों की गणना, धन के प्रबंधन और मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं में सैकड़ों की संख्या में आउटसोर्स और ट्रस्ट के स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं। हाल ही में चढ़ावे की रकम में हेरफेर और चोरी का मामला प्रकाश में आने के बाद प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन की कमान अनुभवी सैन्य पृष्ठभूमि वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को सौंपी। पदभार संभालते ही उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ियों की पहचान की और आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का फैसला किया।
- वेरिफिकेशन प्रक्रिया में क्या-क्या होगा शामिल?
प्रशासनिक योजना के अनुसार, राम मंदिर परिसर में कार्यरत सभी विभागों के कर्मचारियों—सफाई कर्मी, सुरक्षा गार्ड, दानपात्र काउंटर कर्मी, प्रसाद वितरण टीम और प्रशासनिक स्टाफ—को इस कड़े जांच दायरे से गुजरना होगा:
स्थानीय पुलिस सत्यापन: कर्मचारी के मूल निवास स्थान के संबंधित थाने से उसका पूरा रिकॉर्ड मंगाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
चरित्र प्रमाण पत्र: अधिकृत प्रशासनिक अधिकारियों या राजपत्रित अधिकारियों द्वारा जारी चरित्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
पारिवारिक पृष्ठभूमि का डेटाबेस: कर्मचारी के परिवार के सदस्यों, उनके कार्यक्षेत्र और स्थायी निवास का पूरा विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
डिजिटल पहचान पत्र: सत्यापन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद ही कर्मियों को बारकोड या चिप आधारित नए डिजिटल एक्सेस पास जारी किए जाएंगे।
आंतरिक सुरक्षा और दानपात्र निगरानी के नए नियम
कर्मचारियों के सत्यापन के साथ-साथ चढ़ावे और दान के संग्रह की पूरी प्रक्रिया को भी तकनीकी रूप से री-डिजाइन किया जा रहा है। दानपात्रों के खुलने से लेकर नोटों की गिनती तक के पूरे रास्ते को हाई-डेफिनिशन 360-डिग्री सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी में रखा जा रहा है। गिनती कक्ष में बिना जेब वाले विशेष परिधान में ही कर्मचारियों को प्रवेश देने और बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने जैसे कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि राम मंदिर न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह देश के सबसे संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठानों में से एक है। ऐसे में आंतरिक कर्मचारियों की विश्वसनीयता और ईमानदारी सुनिश्चित करना सुरक्षा का सबसे पहला और अनिवार्य चरण है।
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