गाजियाबाद में बिजली विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी से अवैध कनेक्शन धारकों में मचा हड़कंप, लोनी और मुरादनगर में 35 बिजली चोर धरे गए
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय जनपद गाजियाबाद में भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच विद्युत चोरी करने वालों
- भीषण गर्मी के बीच रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची विद्युत की खपत, विजिलेंस और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दर्जनों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
- रात्रिकालीन और अलसुबह विशेष चेकिंग अभियान से कटी अवैध कटिया, पावी लोनी समेत कई संवेदनशील इलाकों में पकड़ा गया भारी अवैध लोड
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय जनपद गाजियाबाद में भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच विद्युत चोरी करने वालों के खिलाफ बिजली विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिले के लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से बिजली की मांग और खपत में अप्रत्याशित रूप से रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। इस अत्यधिक लोड के कारण ट्रांसफार्मरों के फुकने और ट्रिपिंग की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए विद्युत निगम ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में विभाग की प्रवर्तन टीम (विजिलेंस) और स्थानीय पुलिस बल के संयुक्त सहयोग से एक बड़ा छापामार अभियान चलाया गया। इस विशेष संयुक्त कार्रवाई के दौरान लोनी और मुरादनगर के विभिन्न इलाकों से कुल 35 लोगों को सीधे तौर पर मुख्य लाइनों से कटिया डालकर अवैध रूप से बिजली का उपभोग करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिससे पूरे क्षेत्र के अवैध उपभोक्ताओं में खलबली मच गई है।
इस पूरी दंडात्मक कार्रवाई और अभियान को शुरू करने के पीछे मुख्य कारण जिले में बिजली की खपत के चौंकाने वाले आंकड़े रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 के महीने में मोदीनगर क्षेत्र में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बिजली की खपत दर्ज की गई है। इसी तरह मुरादनगर में 16.5 प्रतिशत और लोनी के रिहायशी इलाकों में 12 प्रतिशत से ज्यादा बिजली की खपत में भारी उछाल आया है। विद्युत निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट मत है कि इस साल पड़ी अभूतपूर्व और झुलसाने वाली गर्मी के कारण घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एयर कंडीशनर (एसी), बड़े कूलर और अन्य भारी विद्युत उपकरणों का उपयोग दिन-रात लगातार किया जा रहा है। इस अत्यधिक मांग के कारण जहां एक ओर वैध उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, वहीं दूसरी ओर सब-स्टेशनों पर लोड क्षमता से अधिक बढ़ गया था।
बिजली की इस रिकॉर्ड तोड़ मांग और बढ़ते तकनीकी नुकसान को रोकने के लिए विभाग ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। अधिकारियों को लगातार इनपुट्स मिल रहे थे कि कई इलाकों में लोग दिन के समय चेकिंग से बचने के लिए सीधे मुख्य केबल से जुड़े अवैध कनेक्शन हटा लेते हैं और रात होते ही दोबारा कटिया डाल लेते हैं। इस चालाकी को नाकाम करने के लिए विजिलेंस की टीम ने देर रात और अलसुबह के समय औचक निरीक्षण करने की विशेष योजना तैयार की। जब पूरा शहर सो रहा था, तब बिजली विभाग के इंजीनियरों और पुलिसकर्मियों की गाड़ियों ने प्रभावित इलाकों को चारों तरफ से घेर लिया। इस दौरान छतों और खंभों पर लगी केबलों की बारीकी से जांच की गई, जिसमें दर्जनों घरों में बिना मीटर या बाईपास मीटर के जरिए सीधे बिजली की चोरी पकड़ी गई। बिजली चोरी केवल राजस्व का नुकसान नहीं करती, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के विद्युत तंत्र को पंगु बना देती है। जब बिना मंजूरी के दर्जनों किलोवाट का अवैध लोड किसी एक ट्रांसफार्मर पर पड़ता है, तो वह गर्म होकर जल जाता है। इससे उन ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है जो हर महीने समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान करते हैं।
इस बड़े चेकिंग अभियान के दौरान सबसे अधिक कड़ाई पावी लोनी और उसके आस-पास के संवेदनशील रिहायशी पॉकेट्स में देखने को मिली। अकेले पावी लोनी इलाके से नौ लोग सीधे तौर पर मुख्य विद्युत लाइनों में अवैध रूप से तार जोड़कर कटिया चलाते हुए पाए गए। इन सभी नौ आरोपियों के खिलाफ बिजली चोरी की सुसंगत धाराओं के तहत नौ अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) स्थानीय एंटी थेफ्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई हैं। विभागीय अधिकारियों ने जब इन पकड़े गए परिसरों के लोड का मूल्यांकन किया, तो हैरान करने वाली बात सामने आई कि इन नौ परिसरों पर कुल मिलाकर 19 किलोवाट का भारी-भरकम अवैध भार (लोड) बिना किसी मंजूरी के सीधे तौर पर चलाया जा रहा था, जिसे तुरंत प्रभाव से जब्त कर लिया गया।
लोनी के अलावा मुरादनगर के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में विजिलेंस की टीमों ने समानांतर रूप से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। मुरादनगर में की गई इस बड़ी घेराबंदी के दौरान कुल मिलाकर 35 लोगों को बिजली चोरी के इस मकड़जाल में संलिप्त पाया गया। इन सभी डिफ़ॉल्टर्स के परिसरों से अवैध रूप से इस्तेमाल किए जा रहे लंबे तारों और उपकरणों को मौके पर ही काट दिया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच के दौरान पूरी कार्रवाई में कुल मिलाकर 32 किलोवाट से अधिक का अवैध विद्युत भार पकड़ा गया है, जिसके लिए अब इन सभी आरोपियों पर भारी शमन शुल्क (कंपाउंडिंग फीस) और राजस्व क्षति का जुर्माना लगाने की तैयारी विभाग द्वारा की जा रही है।
विद्युत निगम के मुख्य अभियंता के अनुसार, बिजली चोरी के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान महज एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि यह आने वाले पूरे प्रशासनिक सीजन तक लगातार जारी रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे क्षेत्रों को पूरी तरह से चिन्हित कर लिया गया है जहां बिजली आपूर्ति के मुकाबले राजस्व की वसूली बेहद कम है और लाइन लॉस का ग्राफ बहुत ऊपर है। इन फीडरों के अंतर्गत आने वाले सभी संदिग्ध उपभोक्ताओं के मीटरों की री-रीडिंग कराई जा रही है और जिन लोगों के मीटर तेज लोड के बावजूद बहुत कम रीडिंग दिखा रहे हैं, उनके मीटरों को लैब टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। इसके साथ ही, विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने वैध लोड को बढ़वा लें ताकि ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग के कारण होने वाले हादसों से बचा जा सके।
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