नोएडा में भारी पुलिस छावनी के बीच मजदूरों का विरोध प्रदर्शन: चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात, घरों से निकलते ही घेराबंदी.
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में आज सुबह से ही तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है। शहर के तमाम औद्योगिक
- आगजनी और बवाल के बाद पुलिस का सख्त एक्शन: 7 एफआईआर दर्ज, अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी मोर्चाबंदी
- कंपनियों के बाहर पुलिस का पहरा: प्रदर्शनकारियों की घर वापसी और धारा 144 के उल्लंघन पर प्रशासन की पैनी नजर
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में आज सुबह से ही तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है। शहर के तमाम औद्योगिक सेक्टरों और लेबर चौराहों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। कल हुए भीषण बवाल और कई स्थानों पर हुई आगजनी की घटनाओं के बाद, प्रशासन ने पूरे जिले को एक तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है। सुबह की पहली किरण के साथ ही पुलिस की पीसीआर वैन और पैदल गश्त की टुकड़ियां उन इलाकों में सक्रिय हो गईं, जहाँ मजदूरों की घनी आबादी है। पुलिस की रणनीति स्पष्ट है कि किसी भी सूरत में भीड़ को एक जगह जमा नहीं होने दिया जाए। सड़कों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन की इस मुस्तैदी के बावजूद, कई इलाकों में मजदूर अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। इनमें से कुछ नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर जाने वाले श्रमिक हैं, तो कुछ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की मंशा से निकल रहे हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने एक विशेष घेराबंदी तैयार की है जिसके तहत मजदूरों को उनके घरों या कॉलोनियों से निकलते ही रोक लिया जा रहा है। प्रदर्शन की मंशा रखने वाले समूहों को समझा-बुझाकर या सख्त चेतावनी देकर वापस भेजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि भीड़ को एक बार संगठित होने का मौका मिल गया, तो स्थिति फिर से नियंत्रण से बाहर हो सकती है, इसलिए 'शून्य जमावड़ा' की नीति का पालन किया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र में स्थित प्रमुख कंपनियों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। नोएडा के सेक्टर-58, 59, 60, 62 और होजरी कॉम्प्लेक्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की कई टीमें तैनात हैं। कंपनियों के मुख्य द्वारों पर बैरिकेडिंग की गई है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। जो मजदूर काम पर पहुंचना चाह रहे हैं, उनकी पहचान की गहन जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा कंपनियों के प्रबंधन के साथ समन्वय स्थापित किया गया है ताकि औद्योगिक शांति बनी रहे। कई जगहों पर स्थिति ऐसी है कि मजदूरों को कंपनी परिसर तक पहुँचने से पहले ही सुरक्षा कारणों का हवाला देकर वापस मोड़ा जा रहा है, जिससे काम-काज भी आंशिक रूप से प्रभावित दिख रहा है। नोएडा प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। किसी भी प्रकार के धरने, प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं है। यदि कोई समूह जबरन सड़कों पर उतरकर कानून को हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध निवारक कानून के तहत गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
कल शहर के अलग-अलग हिस्सों में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद नोएडा पुलिस ने अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। जानकारी के मुताबिक, जिले के करीब 80 से अधिक स्थानों पर मजदूरों ने कल विरोध दर्ज कराया था, जिनमें से 4 से 5 स्थानों पर स्थिति बेहद अनियंत्रित हो गई और उपद्रवियों ने आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया। इन घटनाओं में सार्वजनिक संपत्ति को काफी नुकसान पहुँचाया गया। पुलिस ने इन घटनाओं की वीडियो फुटेज और सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर दंगाइयों की पहचान शुरू कर दी है। जिन क्षेत्रों में आगजनी हुई थी, वहां फॉरेंसिक टीमें भी साक्ष्य जुटाने में लगी हैं ताकि दोषियों के खिलाफ अदालत में मजबूत मामला पेश किया जा सके।
कानूनी कार्रवाई के क्रम में अब तक कुल 7 प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी हैं। इन एफआईआर में बलवा, सरकारी कार्य में बाधा डालना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और घातक हथियारों के साथ दंगा करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने केवल सड़कों पर प्रदर्शन करने वालों को ही निशाने पर नहीं लिया है, बल्कि उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जो पर्दे के पीछे रहकर भीड़ को उकसा रहे थे। पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में गठित विशेष टीमें नामजद आरोपियों की तलाश में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। यह कार्रवाई यह संदेश देने के लिए की जा रही है कि औद्योगिक हब में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। वर्तमान डिजिटल युग में अफवाहें आग की तरह फैलती हैं, जिसे देखते हुए पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है। नोएडा पुलिस के साइबर सेल ने कई ऐसे सोशल मीडिया हैंडल्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की पहचान की है, जिनके माध्यम से भ्रामक सूचनाएं और भड़काऊ संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। इस संबंध में भी एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि गलत सूचना फैलाकर शांति भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए अफवाह फैलाने वालों के घरों तक पुलिस पहुँच रही है। प्रशासन का मानना है कि कल के बवाल में एक बड़ा हिस्सा उन अफवाहों का था, जिन्होंने मजदूरों के बीच गलत जानकारी साझा की थी।
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