'मच्छरों का इलाज हम कर सकते हैं' पुलिस हिरासत में भी नहीं थमा Abhijeet Dipke को थप्पड़ मारने वाला युवक
महाराष्ट्र के पुणे शहर में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले चर्चित एक्टिविस्ट और इन्फ्लुएंसर अभिजीत दिपके पर बीच
- पुणे में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर सरेआम हमले से मचा हड़कंप, पुलिस कस्टडी में आरोपी ने उगला गुस्सा
- वैचारिक मतभेद और इंटरनेट पोस्ट को लेकर युवक ने बीच सड़क पर मारा थप्पड़, कानून हाथ में लेने पर सलाखों के पीछे पहुंचा हमलावर
महाराष्ट्र के पुणे शहर में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले चर्चित एक्टिविस्ट और इन्फ्लुएंसर अभिजीत दिपके पर बीच सड़क पर हुए एक हिंसक हमले ने इंटरनेट की दुनिया से लेकर जमीनी स्तर तक की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना तब सामने आई जब एक अज्ञात युवक ने बीच बाजार में अभिजीत दिपके को रोककर उनके साथ न केवल गाली-गलौज की बल्कि सरेआम उन्हें एक जोरदार थप्पड़ भी जड़ दिया। इस औचक हमले से आसपास मौजूद लोग और खुद अभिजीत दिपके स्तब्ध रह गए, जिसके बाद तुरंत इस मामले की सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी गई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित गति से कार्रवाई की और सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी इनपुट्स के आधार पर हमलावर युवक को कुछ ही घंटों के भीतर धर दबोचा। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी आरोपी के तेवर कम नहीं हुए और उसने कानून व्यवस्था के सामने ही पीड़ित के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और विवादित बयानबाजी जारी रखी, जिसने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
इस पूरी हिंसक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पूरी तरह से सोशल मीडिया पर चल रही वैचारिक जंग और व्यक्तिगत टिप्पणियों से जुड़ी हुई बताई जा रही है। पीड़ित अभिजीत दिपके लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर इंटरनेट के माध्यम से अपनी राय मुखरता से रखते आए हैं, जिसके कारण उनके समर्थकों के साथ-साथ एक बड़ा विरोधी वर्ग भी तैयार हो गया था। आरोपी युवक काफी समय से अभिजीत दिपके द्वारा पोस्ट की जाने वाली सामग्री और उनके विचारों से बेहद नाराज चल रहा था और उसके मन में पीड़ित के प्रति गहरा व्यक्तिगत द्वेष पैदा हो चुका था। उसने पीड़ित को सबक सिखाने के इरादे से उसके आने-जाने के रास्तों की रेकी की थी और जैसे ही उसे पुणे के एक व्यस्त इलाके में पीड़ित अकेला दिखाई दिया, उसने तुरंत इस वारदात को अंजाम दे डाला। यह घटना दर्शाती है कि किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले वैचारिक मतभेद अब वास्तविक जीवन में जानलेवा नफरत और हिंसा का रूप अख्तियार करते जा रहे हैं। पुलिस कस्टडी में लिए जाने के बाद जब मीडियाकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी से इस हमले की वजह जाननी चाही, तो उसने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि ऐसे मच्छरों का इलाज हम अच्छी तरह से कर सकते हैं। उसका इरादा किसी भी तरह के कानून को चुनौती देना नहीं था, बल्कि वह पीड़ित के बयानों से आहत था। पुलिस अधिकारियों ने इस बयान को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे मामले की केस डायरी में आरोपी की हिंसक मानसिकता के सबूत के तौर पर दर्ज कर लिया है।
सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें सरेआम मारपीट करना, शांति भंग करने का प्रयास करना और धमकी देना शामिल है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में वैचारिक असहमति को प्रकट करने के लिए हिंसा का सहारा लेना पूरी तरह से गैरकानूनी और अक्षम्य है। यदि किसी व्यक्ति को किसी की पोस्ट या विचारों से कोई आपत्ति थी, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था या पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी। कानून को अपने हाथ में लेकर सरेआम किसी नागरिक पर हमला करने की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसलिए आरोपी के खिलाफ अदालत में एक बेहद मजबूत चार्जशीट पेश करने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।
इस हमले के बाद पुणे शहर के सामाजिक और राजनीतिक हल्कों में इस बात को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या सोशल मीडिया पर मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी अब जमीन पर असुरक्षा का कारण बन रही है। विभिन्न नागरिक संगठनों और एक्टिविस्ट समूहों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे सीधे तौर पर स्वतंत्र आवाज को दबाने का एक कायरतापूर्ण प्रयास करार दिया है। उनका मानना है कि जब किसी व्यक्ति के पास तर्कों का अभाव होता है, तभी वह शारीरिक हिंसा पर उतारू होता है। इस घटना के बाद से शहर में सक्रिय अन्य डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी मांग उठने लगी है, क्योंकि इस तरह की वारदातें अन्य लोगों के भीतर भी एक डर का माहौल पैदा करती हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे शहर में कानून व्यवस्था और हर नागरिक की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
जांच के दौरान पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई सुनियोजित साजिश या किसी राजनीतिक संगठन का हाथ तो नहीं है। आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड्स और उसके व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह किसी अन्य व्यक्ति के निर्देश पर काम कर रहा था या उसने अकेले ही इस पूरी वारदात की योजना बनाई थी। शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी कई बार इंटरनेट पर लोगों को धमकियां देने और विवादित टिप्पणियां करने के मामलों में शामिल रहा है। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि घटना के वक्त क्या उसके साथ कुछ और लोग भी दूर खड़े होकर इस पूरी वारदात पर नजर रख रहे थे, क्योंकि चश्मदीदों ने घटनास्थल के पास कुछ संदिग्ध वाहनों की मौजूदगी की बात कही थी।
इस हिंसक घटना ने डिजिटल साक्षरता और सोशल मीडिया के जिम्मेदारी से उपयोग करने के विषय पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अक्सर देखा जाता है कि इंटरनेट पर लोग बिना किसी डर के एक-दूसरे के खिलाफ बेहद कड़वी और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जो धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर वास्तविक दुश्मनी में तब्दील हो जाती है। पीड़ित अभिजीत दिपके ने इस घटना के बाद एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे इस तरह के हमलों से डरने वाले नहीं हैं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए अपनी बात को आगे भी इसी तरह मजबूती से रखते रहेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और कानून पर पूरा भरोसा रखने की अपील की है ताकि समाज में किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक या राजनीतिक तनाव पैदा न हो सके।
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