केंद्र की गठबंधन सरकार को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बताया कमजोर, कहा- हमारे पास स्पष्ट जनादेश, हम किसी बैसाखी पर निर्भर नहीं
दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना की सियासत में इन दिनों बेहद तीखी बयानबाजी और राजनीतिक तनातनी का दौर देखने को मिल
- तेलंगाना में सियासी घमासान तेज, मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने पूर्ण बहुमत का दावा करते हुए विपक्षी दलों को दी खुली चुनौती
- इस्तीफे के दांव से तेलंगाना की राजनीति में आया भूचाल, मुख्यमंत्री ने सीधे प्रधानमंत्री को लपेटते हुए चला बड़ा सियासी दांव
दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना की सियासत में इन दिनों बेहद तीखी बयानबाजी और राजनीतिक तनातनी का दौर देखने को मिल रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने विपक्षी दलों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए अपनी सरकार के स्थायित्व और मजबूती का दम भरा है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि तेलंगाना में उनकी सरकार पूरी तरह से सुरक्षित है और उनके पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत मौजूद है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि उनकी सरकार को चलाने के लिए उन्हें किसी अन्य राजनीतिक दल के समर्थन या बैसाखी की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य की जनता ने उन्हें शासन करने के लिए एक बेहद स्पष्ट और मजबूत जनादेश दिया है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार की स्थिरता और उसकी नीतियों को लेकर सवाल खड़े कर रहे थे, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने अब बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान केंद्र की वर्तमान सत्ता संरचना पर भी सीधे सवाल खड़े किए और राष्ट्रीय राजनीति की तुलना राज्य की स्थिति से कर डाली। उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली की सत्ता में बैठे दल के पास अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं है, जिसके कारण वह एक शारीरिक या सांगठनिक रूप से कमजोर व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं। केंद्र की सरकार कई क्षेत्रीय और सहयोगी राजनीतिक पार्टियों के समर्थन पर टिकी हुई है, जिसके कारण उनके पास वो नैतिक बल और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता नहीं है जो एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार के पास होती है। रेवंत रेड्डी ने कहा कि जो लोग खुद दूसरों के सहयोग और बैसाखियों के सहारे सत्ता का लुत्फ उठा रहे हैं, उन्हें तेलंगाना की मजबूत और जन-समर्थित सरकार पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इस तरह के बयानों से मुख्यमंत्री ने यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि राज्य में उनकी राजनीतिक स्थिति बेहद सुदृढ़ है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने विपक्षी खेमे को चुनौती देते हुए एक बेहद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि देश के प्रधानमंत्री अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं और केंद्र सरकार को पूरी तरह से भंग कर देते हैं, तो वह भी उसी क्षण अपने पद के साथ-साथ अपनी पूरी कैबिनेट का इस्तीफा सौंपने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक बयानबाजी और नैतिकता के पैमाने कभी भी एकतरफा नहीं होने चाहिए, बल्कि जो नियम दूसरों पर लागू किए जाते हैं, वही नियम खुद पर भी लागू होने चाहिए।
राज्य और केंद्र के बीच चल रहे इस वित्तीय और राजनीतिक गतिरोध के पीछे कई प्रशासनिक और नीतिगत कारण भी शामिल हैं। तेलंगाना सरकार का यह भी आरोप रहा है कि केंद्र द्वारा राज्य के विकास कार्यों, विशेष रूप से हैदराबाद के बुनियादी ढांचे और परिवहन प्रणालियों जैसे कि मेट्रो रेल विस्तार, के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और फंड जारी करने में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी खेमे का यह दावा है कि राज्य सरकार केंद्रीय योजनाओं को सही तरीके से लागू करने और उनके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में पूरी तरह विफल रही है। इस प्रशासनिक खींचतान ने अब एक बेहद बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है, जहां दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर राज्य के विकास में रोड़े अटकाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अपनी छह मुख्य चुनावी गारंटियों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए वे किसी के दबाव में नहीं आएंगे।
इस राजनीतिक विवाद में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच के कथित अंतर और वित्तीय आवंटन के मुद्दों को लेकर भी बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री का मानना है कि दक्षिण के राज्य देश के राजस्व में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन जब केंद्रीय करों के हिस्से या वित्तीय मदद के आवंटन की बात आती है, तो उनके साथ अपेक्षित न्याय नहीं होता है। इस तरह के क्षेत्रीय असंतुलन के आरोपों के बाद राष्ट्रीय स्तर के कई मंत्रियों और नेताओं ने भी इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के बयानों से देश के भीतर क्षेत्रीय आधार पर विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है। उनका तर्क है कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्ति भारत के विभिन्न हिस्सों और राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए शासन व्यवस्था में किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय भेदभाव की बात पूरी तरह निराधार है।
इसके अलावा, हाल के दिनों में चुनाव प्रक्रियाओं, सीट आवंटन और राज्यसभा नामांकन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट काफी हद तक बढ़ चुकी है। राज्य के सत्ताधारी दल का यह आरोप है कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं का अनुचित उपयोग करके विपक्षी आवाजों को दबाने और एक दलीय व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चुनाव अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं और इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बनाया है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री का यह ताजा और आक्रामक बयान उनके राजनीतिक आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है। वे अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मिलकर आगामी रणनीतियों और सरकार के कामकाज के रोडमैप पर लगातार चर्चा कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में विपक्ष के हर हमले का बेहद मजबूती और तत्परता के साथ जवाब दिया जा सके।
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