स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के कोच में पथराव से रेलवे प्रशासन में मचा हड़कंप, बाल-बाल बचे सभी यात्री
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले रेल खंड पर एक बेहद गंभीर और संवेदनशील घटना सामने आई
- RSS प्रमुख मोहन भागवत के कोच को असामाजिक तत्वों ने बनाया निशाना, खिड़की का बाहरी शीशा हुआ क्षतिग्रस्त
- सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू किया सघन जांच अभियान, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तीन किशोरों की पहचान और एक संदिग्ध हिरासत में
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले रेल खंड पर एक बेहद गंभीर और संवेदनशील घटना सामने आई है, जिसने रेलवे सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक अमले को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। लखनऊ से चलकर देश की राजधानी नई दिल्ली की ओर जाने वाली वीआईपी ट्रेन स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर अचानक कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा भीषण पथराव कर दिया गया। यह पथराव उस समय हुआ जब ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही थी। घटना के तुरंत बाद पूरी ट्रेन के भीतर यात्रियों में दहशत फैल गई और रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्राथमिक स्तर पर जो सूचनाएं सामने आई हैं, उनके अनुसार इस अप्रत्याशित पथराव के कारण ट्रेन की खिड़कियों को नुकसान पहुँचा है। इस मार्ग पर पहले भी इस तरह की छिटपुट घटनाएं होती रही हैं, लेकिन इस बार की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है, जिसके चलते रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गए हैं।
इस पूरी घटना की संवेदनशीलता इसलिए कई गुना अधिक बढ़ गई क्योंकि इस हाई-स्पीड ट्रेन के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत स्वयं मौजूद थे। वे कानपुर में आयोजित एक पारिवारिक आशीर्वाद समारोह में शामिल होने के पश्चात इसी ट्रेन के माध्यम से नई दिल्ली की ओर प्रस्थान कर रहे थे। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उन्हें अतिविशिष्ट सुरक्षा श्रेणी प्रदान की गई है, जिसके कारण उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। ट्रेन जैसे ही मक्खनपुर और फिरोजाबाद रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित एक आउटर इलाके से गुजर रही थी, तभी अचानक असामाजिक तत्वों ने बोगी को निशाना बनाकर पत्थरों से हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले से बोगी के भीतर बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षाकर्मी तुरंत अपनी पोजीशन पर आ गए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
जिस समय यह घटना घटित हुई, उस समय संघ प्रमुख स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के सबसे प्रीमियम और सुरक्षित माने जाने वाले एग्जीक्यूटिव क्लास के ई-वन कोच में सफर कर रहे थे। वे इस कोच की सीट संख्या उनतालीस और चालीस पर विराजमान थे, जबकि असामाजिक तत्वों द्वारा फेंका गया पत्थर सीधे सीट संख्या पचास के पास वाली खिड़की पर जाकर लगा। गनीमत यह रही कि संघ प्रमुख बोगी के दूसरी तरफ वाली सीट पर बैठे हुए थे, जिसके कारण वे इस सीधे हमले की चपेट में आने से पूरी तरह बच गए। पत्थर इतनी तीव्रता के साथ फेंका गया था कि उससे खिड़की का मजबूत बाहरी डबल-ग्लास शीशा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बड़ी दरारें आ गईं। हालांकि, खिड़की का अंदरूनी सुरक्षा कांच सुरक्षित रहने की वजह से पत्थर बोगी के भीतर प्रवेश नहीं कर सका, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया और बोगी के भीतर बैठे सभी सह-यात्री भी सुरक्षित रहे। घटना की भयावहता को देखते हुए और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ट्रेन को बीच रास्ते में किसी भी सुनसान जगह पर नहीं रोका गया, बल्कि उसे पूरी गति से अगले बड़े स्टेशन की ओर बढ़ा दिया गया।
इस गंभीर घटना की जानकारी जैसे ही कंट्रोल रूम के माध्यम से आगे के स्टेशनों को प्रेषित की गई, वैसे ही रेलवे के उच्चतम अधिकारियों और सुरक्षा कमान को तुरंत सतर्क कर दिया गया। शाम के समय जैसे ही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस अगले ठहराव यानी टूंडला जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, वहां पहले से ही भारी संख्या में रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद खड़े मिले। सुरक्षा के कड़े घेरे और स्टेशन पर उमड़ी भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संघ प्रमुख को ट्रेन की बोगी से नीचे नहीं उतारा। इसके बजाय, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों और प्रशासनिक अमले ने स्वयं बोगी के भीतर जाकर संघ प्रमुख से भेंट की, उनका कुशलक्षेम जाना और पूरी स्थिति की समीक्षा की। इस गहन जांच और आवश्यक कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए ट्रेन को टूंडला जंक्शन पर करीब सात मिनट तक रोक कर रखा गया, जिसके बाद उसे आगे के लिए रवाना किया गया।
इस संवेदनशील मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए आगरा जोन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, आगरा रेंज के महानिरीक्षक और फिरोजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल का दौरा किया। सुरक्षा बलों ने रेलवे ट्रैक के आसपास के संवेदनशील इलाकों जैसे रसूलपुर, दक्षिण थाना क्षेत्र और पेमेश्वर गेट के निकटवर्ती क्षेत्रों में एक सघन कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। रेलवे सुरक्षा बल की लिखित तहरीर के आधार पर स्थानीय रसूलपुर थाने में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत एक आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। इस मामले की तह तक जाने के लिए जिला पुलिस की विशेष अपराध शाखा, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सर्विलांस टीमों को भी काम पर लगा दिया गया है, ताकि इस कृत्य के पीछे की वास्तविक मंशा को पूरी तरह समझा जा सके।
अराजक तत्वों की धरपकड़ के लिए पुलिस और रेलवे की जांच टीमों ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रेलवे ट्रैक और उसके आसपास के आवासीय एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगे लगभग एक सौ पचास से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला गया है। इन वीडियो फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद देर रात तक पुलिस ने तीन स्थानीय किशोरों को पत्थरबाजी की इस घटना में संलिप्त पाया है और उन्हें स्पष्ट रूप से चिह्नित कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, घटना स्थल के आसपास संदिग्ध रूप से घूम रहे एक व्यक्ति को भी पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया है, जिससे खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां कड़े सुरक्षा घेरे में पूछताछ कर रही हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यह किसी स्थानीय नशेड़ी या शरारती तत्वों की सामान्य हरकत भी हो सकती है, लेकिन संघ प्रमुख की उपस्थिति के कारण इसके हर एक पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
ट्रेन पर हुए इस हमले के बाद टूंडला जंक्शन से एस्कॉर्ट सुरक्षा के साथ रवाना की गई स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ी और रात को सुरक्षित रूप से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर भारतीय रेलवे के ट्रैक के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी ट्रेनों पर होने वाले पथराव की बार-बार दोहराई जाने वाली घटनाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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