जंतर-मंतर प्रदर्शन पर संजय सिंह का गंभीर आरोप: कहा- 'बच्चों को पीटा, लड़कियों के कपड़े फाड़े गए'
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर आप सांसद संजय सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बर्बरतापूर्वक बल प्रयोग किया गया।

- Sanjay Singh Statement on Delhi Police: प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर भड़के आप सांसद संजय सिंह, केंद्र सरकार को घेरा
- 'लड़कियों के कपड़े फाड़े गए, बच्चों को पीटा...' जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई पर संजय सिंह का तीखा हमला
- दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के दावों पर आप सांसद संजय सिंह का बड़ा हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है। संजय सिंह ने मंगलवार को बयान जारी करते हुए गंभीर आरोप लगाए कि आंदोलन कर रहे शांतिपूर्ण छात्रों को बेरहमी से पीटा गया, उन्हें लहूलुहान किया गया और इस दौरान महिला प्रदर्शनकारियों व लड़कियों के कपड़े तक फाड़ दिए गए। संसद के मानसून सत्र के दौरान आए आप सांसद के इस बयान ने राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया है। संजय सिंह ने घटना की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार और मंगलवार को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों के बैनर तले छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और बल प्रयोग किया। इस पूरी कार्रवाई के बाद कई छात्र चोटिल हुए। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इस पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से अमानवीय और असंवैधानिक बताते हुए गंभीर आरोप जड़े हैं।
संसद सत्र के बीच जंतर-मंतर पर जुटे हजारों प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर मुखर थे। जब सुरक्षा बलों ने उन्हें संसद मार्ग की तरफ जाने से रोका, तो दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की किए जाने के दावे किए गए।
आप सांसद संजय सिंह ने इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे युवाओं को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। कई छात्र लहूलुहान हो गए और महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी न होने की वजह से महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी की गई, जिससे उनके कपड़े तक फट गए। संजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज दबाने के लिए ऐसा बर्बर रवैया कतई स्वीकार्य नहीं है।
संजय सिंह व आम आदमी पार्टी: आप नेताओं का कहना है कि सरकार युवाओं के सवालों का जवाब देने से डर रही है और इसीलिए पुलिस बल के माध्यम से आंदोलन को कुचलना चाहती है। आप ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
दिल्ली पुलिस एवं प्रशासन का रुख: वहीं, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पुलिस ने पूरी तरह से संयम बरतते हुए काम किया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित और अति-संवेदनशील क्षेत्र की ओर बढ़ने का प्रयास किया था, जिसे रोकने के लिए केवल अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अत्यधिक बल प्रयोग के दावों को खारिज किया गया है।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया: सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं का तर्क है कि आम आदमी पार्टी और विपक्ष इस संवेदनशील स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर और सनसनीखेज आरोप लगा रहे हैं।
संजय सिंह के इन गंभीर आरोपों के बाद जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन ने और जोर पकड़ लिया है। कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं। संसद के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर हंगामे के आसार बन गए हैं, जिससे मानसून सत्र के दौरान विधायी कार्यों पर असर पड़ सकता है।
आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को मानवाधिकार आयोग (NHRC) और संसद के पटल पर उठाएगी। वहीं, पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया है और पूरे मामले के वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि घटना की वास्तविक कड़ियों का पता लगाया जा सके।
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