President Droupadi Murmu Hails Captain Smit Machchhar: राष्ट्रपति ने कैप्टन स्मित मच्छार के शौर्य को सराहा, कहा- देश को आपकी वीरता पर गर्व
President Droupadi Murmu on Captain Smit Machchhar: राष्ट्रपति ने गंभीर संकट और चोट के बावजूद दूसरों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की।

- संकट में भी दूसरों की जान बचाते रहे कैप्टन स्मित मच्छार: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की अदम्य साहस और सूझबूझ की तारीफ
- Captain Smit Machchhar Bravery: गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी नहीं डिगा कर्तव्य पथ, राष्ट्रपति ने बहादुरी को किया सलाम
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश: कैप्टन स्मित मच्छार का समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा, संकट के क्षणों में दिखाई अद्वितीय निष्ठा
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गंभीर संकट और आपातकालीन परिस्थितियों के बीच असाधारण वीरता, अदम्य साहस और त्वरित सूझबूझ का परिचय देने वाले कैप्टन स्मित मच्छार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि पूरे राष्ट्र को कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस पर गर्व है। उन्होंने रेखांकित किया कि भीषण संकट के क्षणों में स्वयं गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने अपने व्यक्तिगत कष्ट की परवाह न करते हुए दूसरों के बहुमूल्य जीवन की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
राष्ट्रपति भवन की ओर से साझा किए गए भाव में कैप्टन मच्छार के इस समर्पण को भारतीय सशस्त्र बलों की उच्चतम परंपराओं और सर्वोच्च कर्तव्यनिष्ठा का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया गया है। संकट की घड़ी में जब परिस्थितियां पूरी तरह विपरीत थीं, तब कैप्टन ने जिस मानसिक संतुलन, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ भाव से अभियान को संभाला, वह हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
- संकट की घड़ी में कर्तव्य को रखा सर्वोपरि
घटनाक्रम के संदर्भ में उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार, ऑपरेशनल अथवा संकटकालीन स्थिति के दौरान अचानक उत्पन्न हुए गंभीर खतरे के बीच कैप्टन स्मित मच्छार को गंभीर चोटें आई थीं। अत्यधिक शारीरिक पीड़ा और रक्तस्राव के बावजूद उन्होंने अपने होश और संयम को खोने नहीं दिया। अपनी जान जोखिम में डालकर उन्होंने अपने साथियों और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए।
सैनिक नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा ऐसे ही अत्यंत तनावपूर्ण और नाजुक पलों में होती है, जहां एक सेकंड की देरी जीवन और मृत्यु का अंतर बन सकती है। कैप्टन मच्छार ने न केवल तत्परता से स्थिति का आकलन किया, बल्कि एक कुशल कमांडर की भांति त्वरित रणनीतिक निर्णय लेकर अन्य जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
- राष्ट्रपति ने सराहा अदम्य मानवीय संकल्प
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि स्वयं को खतरे में डालकर दूसरों की रक्षा करना भारतीय सेना और उसके जांबाज अधिकारियों के डीएनए में रचा-बसा है। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार का यह कार्य केवल कर्तव्य का निर्वहन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और अद्वितीय शौर्य का संगम है। गंभीर चोट के बावजूद अपने दायित्व पर डटे रहना यह साबित करता है कि उनका संकल्प कितना सुदृढ़ था।
राष्ट्रपति ने कैप्टन के शीघ्र और पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनका यह शौर्यपूर्ण आचरण देश के युवाओं और सुरक्षा बलों के कर्मियों को विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की प्रेरणा देता रहेगा।
- राष्ट्र और रक्षा विशेषज्ञों की ओर से मिली सराहना
कैप्टन स्मित मच्छार की इस बहादुरी की खबर सामने आने के बाद रक्षा विशेषज्ञों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और आम नागरिकों ने भी उनके साहस को सलाम किया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि 'सेवा परमो धर्म:' के मूल मंत्र को कैप्टन मच्छार ने जमीनी धरातल पर चरितार्थ किया है।
अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में सैन्य नेतृत्व की ऐसी मिसालें यह दर्शाती हैं कि भारतीय सेना के युवा अधिकारी किस प्रकार आधुनिक चुनौतियों के बीच भी सर्वोच्च स्तर की निष्ठा, नेतृत्व और बलिदान की भावना का प्रदर्शन करते हैं।
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