Pramod Tiwari On BJP - संसद में जनहित के मुद्दे दबाने का आरोप, विपक्ष करेगा मॉक पार्लियामेंट का आयोजन
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर संसद में जनहित के मुद्दे न उठाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष द्वारा 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करने और जनता की आवाज उठाने का ऐलान किया।

- Congress Attack On Government - जब सरकार बहरी हो जाए तो सड़कों पर उतरना पड़ता है, बोले कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी
- Mock Parliament Opposition - 65% जनता की आवाज उठाने के लिए विपक्ष की नई रणनीति, प्रमोद तिवारी का बड़ा बयान
- Parliament Deadlock - जनता की समस्याओं पर चर्चा से भाग रही भाजपा, मॉक पार्लियामेंट के जरिए घेरने की तैयारी
संसद में जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस न होने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल पिछले कई वर्षों से लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अनदेखी कर रहा है और संसद के भीतर जनता से जुड़े बुनियादी सवालों पर चर्चा कराने से कतरा रहा है। उन्होंने ऐलान किया कि जनता की आवाज को मंच देने के लिए विपक्षी दल मिलकर एक 'मॉक पार्लियामेंट' (समानांतर संसद) का आयोजन करेंगे।
- 65 प्रतिशत जनता का प्रतिनिधित्व करता है विपक्ष
प्रमोद तिवारी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संख्याबल के बावजूद विपक्ष देश की लगभग 65 प्रतिशत जनता के जनादेश और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब निर्वाचित प्रतिनिधियों को सदन के भीतर महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और किसानों-युवाओं के गंभीर विषयों पर बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, तो विपक्ष के पास वैकल्पिक रास्ते अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
- सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने का आह्वान
कांग्रेस सांसद ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जब सत्ता में बैठी सरकार पूरी तरह बहरी हो जाए और जनहित के मसलों की अनदेखी करने लगे, तब लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मॉक पार्लियामेंट के माध्यम से विपक्ष उन तमाम ज्वलंत समस्याओं और नीतिगत विफलताओं को देश की जनता के सामने रखेगा, जिन्हें मुख्य सदन की कार्यवाही में जानबूझकर दबा दिया जाता है।
- संसदीय गतिरोध के बीच विपक्ष का नया दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के दौरान लगातार होने वाले गतिरोध और चर्चाओं के अभाव के बीच 'मॉक पार्लियामेंट' का दांव विपक्ष की ओर से सरकार पर मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। इसके जरिए विपक्षी दल आम जनता के बीच यह संदेश प्रसारित करना चाहते हैं कि वे जनसरोकार के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं, जबकि सरकार अपने जवाबदेही के दायित्व से पीछे हट रही है।
What's Your Reaction?









