नोएडा डीएम की आउटसोर्सिंग एजेंसियों को सीधी चेतावनी: उपद्रव किया तो होंगे ब्लैकलिस्ट, लाइसेंस निरस्त करने की भी दी गई कड़ी चेतावनी।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक अंचलों में हाल ही में हुए श्रमिकों के उग्र प्रदर्शनों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में
- औद्योगिक शांति के लिए मेधा रूपम का सख्त एक्शन प्लान: श्रमिकों के वेतन और अनुशासन पर एजेंसियों की होगी सीधी जिम्मेदारी, उल्लंघन पर होगी एफआईआर।
- गौतम बुद्ध नगर प्रशासन सख्त: हिंसक प्रदर्शनों के बाद डीएम ने तय की ठेकेदारों की जवाबदेही, 100 प्रतिशत सरकारी गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक अंचलों में हाल ही में हुए श्रमिकों के उग्र प्रदर्शनों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसियों और ठेकेदारों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में औद्योगिक शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयां, श्रमिक और नियोक्ता एक-दूसरे के पूरक हैं और यदि इस चक्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है, तो इसका सीधा असर राज्य के विकास और रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। प्रशासन अब किसी भी प्रकार की अराजकता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और इसके लिए सीधे तौर पर उन एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा जो श्रमिकों की आपूर्ति करती हैं।
जिलाधिकारी ने बैठक में 'संयुक्त जिम्मेदारी' (Joint Responsibility) के सिद्धांत को लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां केवल मैनपावर सप्लाई करने तक सीमित नहीं रह सकतीं, बल्कि उनके द्वारा भेजे गए श्रमिकों का व्यवहार और कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखना भी उन्हीं की जिम्मेदारी होगी। यदि किसी एजेंसी के श्रमिक किसी भी प्रकार के हिंसक प्रदर्शन, तोड़फोड़ या सड़क जाम जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो उस एजेंसी को तत्काल प्रभाव से काली सूची (Blacklist) में डाल दिया जाएगा। इसके साथ ही, संबंधित एजेंसी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि एजेंसियां अपने स्तर पर भी श्रमिकों की काउंसलिंग करें और उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रेरित करें।
बैठक का एक मुख्य केंद्र बिंदु श्रमिकों के वेतन और उनके अधिकारों का संरक्षण भी रहा। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा न्यूनतम वेतन में की गई वृद्धि के लिए आभार व्यक्त करते हुए सभी ठेकेदारों को नए वेतन मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों (Unskilled) के लिए 13,690 रुपये, अर्ध-कुशल (Semi-skilled) के लिए 15,059 रुपये और कुशल (Skilled) श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये प्रतिमाह का वेतन तय किया गया है। डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि यह वेतन प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अनिवार्य रूप से श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे (Direct Bank Transfer) जमा हो जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का नकद भुगतान या वेतन में कटौती स्वीकार्य नहीं होगी और ऐसा करने वाली एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने औद्योगिक इकाइयों में कार्यस्थल के माहौल को बेहतर बनाने के लिए निर्देश दिए कि प्रत्येक फैक्ट्री में एक 'यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति' (POSH Committee) का गठन किया जाए, जिसकी अध्यक्षता अनिवार्य रूप से एक महिला ही करेगी। इसके अलावा, श्रमिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक इकाई में शिकायत पेटी (Complaint Box) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि यदि श्रमिकों की समस्याओं को समय रहते सुना जाएगा, तो असंतोष और हिंसा की संभावना स्वतः ही कम हो जाएगी।
औद्योगिक क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए यह भी बताया गया कि हालिया हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिलाधिकारी ने जनता और श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। कुछ स्वार्थी तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं, जिन पर खुफिया विभाग की कड़ी नजर है। यदि किसी श्रमिक को वेतन या सुविधाओं से संबंधित कोई समस्या है, तो वह सीधे श्रम विभाग या जिला प्रशासन के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, लेकिन कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अतुल कुमार, उप निदेशक (कारखाना) बृजेश और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से औद्योगिक क्षेत्रों का भ्रमण करें और यह सुनिश्चित करें कि ठेकेदार श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार कर रहे हैं या नहीं। ओवरटाइम के भुगतान को लेकर भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी श्रमिक से निर्धारित समय से अधिक काम लिया जाता है, तो उसे दोगुनी दर से भुगतान करना होगा और साप्ताहिक अवकाश का नियम अनिवार्य रूप से लागू रहेगा। यदि किसी इकाई में रविवार को काम लिया जाता है, तो उसके बदले में वैकल्पिक अवकाश या अतिरिक्त मानदेय देना होगा।
What's Your Reaction?







