Nepal Flood Crisis: त्रिशूली और रसुवा पनबिजली सुरंगों में फंसे सैकड़ों कामगार, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं भारत-नेपाल की टीमें 

नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में आई भीषण बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों से संपर्क साधने के लिए व्यापक बचाव अभियान जारी है।

Aug 31, 2026 - 12:04
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Nepal Flood Crisis: त्रिशूली और रसुवा पनबिजली सुरंगों में फंसे सैकड़ों कामगार, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटीं भारत-नेपाल की टीमें 
नेपाल सुरंग रेस्क्यू अभियान 
  • नेपाल में भीषण जलप्रलय: जलविद्युत सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर, बचाव दलों का अब तक नहीं हो सका संपर्क
  • नेपाल सुरंग आपदा: भारी मलबे और दलदल के बीच फंसे सैकड़ों मजदूर, संपर्क साधने में जुटीं विशेष बचाव टीमें 
  • नेपाल बाढ़ संकट: पनबिजली सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों से संपर्क टूटा, सेना और राहत दल युद्धस्तर पर जुटे

नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। रसुवा जिले समेत आसपास की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में फंसे सैकड़ों स्थानीय और विदेशी श्रमिकों से बचाव दलों का सीधा संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है। भारी कीचड़, पत्थरों और मलबे से सुरंगों के मुहाने बंद होने के कारण राहत दल अंदर मौजूद लोगों तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। नेपाल सेना, विशेष पर्वतारोही और भारत सहित अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने, हवा की आपूर्ति सुनिश्चित करने और श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं। 

नेपाल के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश और ग्लेशियर टूटने के बाद नदियों में आए उफान ने भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में संचालित रसुवागढ़ी, अपर त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3ए जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के कार्यस्थलों पर अचानक भारी मात्रा में पानी और गाद भर गया। काम के दौरान सुरंगों और भूमिगत संयंत्रों में मौजूद सैकड़ों इंजीनियर, तकनीशियन और श्रमिक वहीं घिर गए। सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर कई मीटर गहरा मलबा जमा हो जाने से अंदर का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे वहां फंसे लोगों की सलामती को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।

आपदा की शुरुआत नदी बेसिन में अचानक आए भारी मलबे के बहाव के साथ हुई, जिसने तटवर्ती इलाकों, संपर्क मार्गों और पनबिजली संयंत्रों के प्रशासनिक परिसरों को अपनी चपेट में ले लिया। जल स्तर बढ़ने के साथ ही पानी और कीचड़ सीधे टनल नेटवर्क में समा गया। सूचना मिलते ही नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने हेलीकॉप्टरों की मदद से अभियान शुरू किया। हालांकि, प्रतिकूल मौसम और पहाड़ी ढलानों से लगातार गिरते पत्थरों के कारण शुरुआती प्रयासों में भारी अड़चनों का सामना करना पड़ा।

बचाव कर्मियों ने कुछ स्थानों पर सुरंग के ऊपरी हिस्से में छोटे छेद करके अंदर रोशनी, कैमरा और वेंटिलेशन पाइप डालने की रणनीति अपनाई है, ताकि अंदर फंसे लोगों की स्थिति का आकलन किया जा सके और ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। इसके साथ ही थर्मल ड्रोन के जरिए भी जीवन के संकेतों की पड़ताल की जा रही है। भारत की विशेष 11 सदस्यीय तकनीकी टीम, जिसमें सुरंग बचाव विशेषज्ञ और चिकित्सक शामिल हैं, मौके पर पहुंचकर स्थानीय राहत बलों के साथ तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। कई इलाकों में रैट-होल माइनिंग और संकरी खुदाई तकनीकों के जरिए धीरे-धीरे आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।

नेपाली ऊर्जा मंत्रालय और आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि कई जलविद्युत ढांचों में कामगारों की उपस्थिति को देखते हुए पूरी मशीनरी को खोज अभियान में झोंक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता सुरंगों में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। सेना के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरंगों के अंदर घुटनों से ऊपर तक भरे गाढ़े दलदल के बावजूद जवान लगातार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि भारतीय विशेषज्ञ दल नेपाली प्रशासन के समन्वय से मौके पर तैनात हैं और आवश्यकतानुसार हर प्रकार की तकनीकी व मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। नेपाल सरकार ने भी इस आपदा की गंभीरता को देखते हुए पड़ोसी देशों से मिले तकनीकी सहयोग की सराहना की है और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

इस प्राकृतिक आपदा का गहरा असर न केवल मानवीय जीवन पर पड़ा है बल्कि नेपाल के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा उत्पादन को भी भारी क्षति पहुंची है। कई अहम पनबिजली परियोजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से देश की विद्युत आपूर्ति प्रणाली चरमरा गई है। सीमावर्ती व्यापारिक मार्ग और स्थानीय परिवहन नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गए हैं। इस भयावह स्थिति के चलते स्थानीय बस्तियों में भय का माहौल है और जलविद्युत क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के परिवारों में अपनों की कुशलता को लेकर भारी व्याकुलता देखी जा रही है।

राहत और बचाव दलों का ध्यान अब सुरंगों के अवरुद्ध मार्गों को सुरक्षित रूप से चौड़ा करने और अंदर तक वैकल्पिक मार्ग बनाने पर केंद्रित है। अत्याधुनिक सेंसर, उच्च क्षमता वाले डीवाटरिंग पंप और मैनहोल ड्रिलिंग उपकरणों के माध्यम से फंसे हुए श्रमिकों से संपर्क साधने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी घंटों में मौसम के मिजाज और भूगर्भीय स्थिरता पर ही बचाव अभियान की गति निर्भर करेगी। प्रशासन का पूरा जोर समय रहते प्रत्येक जीवित व्यक्ति तक सुरक्षित पहुंचकर आपातकालीन चिकित्सीय मदद उपलब्ध कराने पर है।

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