Meta Fined 567 Million Dollars: न्यू मेक्सिको कोर्ट ने मेटा पर ठोका 5,000 करोड़ का जुर्माना, भारत में पीएम मोदी पोस्ट विवाद पर मांगी माफी

मेटा पर अमेरिकी कोर्ट ने बच्चों की मानसिक सेहत और सुरक्षा से खिलवाड़ के लिए 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है। वहीं भारत में पीएम मोदी के पोस्ट हटाने पर कंपनी ने माफी मांगी।

Aug 7, 2026 - 18:18
 0  2
Meta Fined 567 Million Dollars: न्यू मेक्सिको कोर्ट ने मेटा पर ठोका 5,000 करोड़ का जुर्माना, भारत में पीएम मोदी पोस्ट विवाद पर मांगी माफी
  • Meta Action: बच्चों की मानसिक सेहत से खिलवाड़ पर मेटा पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना, भारत सरकार के कड़े रुख के बाद मांगी माफी 
  • मेटा पर दोहरा संकट: अमेरिकी कोर्ट ने लगाया 5,000 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना, भारत में पीएम मोदी के पोस्ट ब्लॉक करने पर मांगी माफी
  • Meta Fine News: बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही पर मेटा पर 567 मिलियन डॉलर की पेनाल्टी, भारत में भी घिरी कंपनी

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) को वैश्विक स्तर पर एक साथ दो बड़े कानूनी और प्रशासनिक झटकों का सामना करना पड़ा है। अमेरिका की न्यू मेक्सिको राज्य अदालत ने बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षा मानकों में घोर लापरवाही बरतने के मामले में फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा पर 567 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। वहीं दूसरी ओर, भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक वीडियो पोस्ट को अनुचित तरीके से हटाने को लेकर केंद्र सरकार और संसदीय समिति के सख्त रुख के बाद कंपनी ने औपचारिक रूप से माफी मांगी है। इन दोनों मामलों ने मेटा की एल्गोरिदम प्रणाली, कंटेंट मॉडरेशन और सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक के लिए वैश्विक स्तर पर जवाबदेही और नियामकीय सख्ती का एक नया दौर शुरू हो गया है। पहली प्रमुख घटना अमेरिका के न्यू मेक्सिको से आई है, जहां अदालत ने यह पाया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम ने नाबालिग उपयोगकर्ताओं के बीच लत लगाने वाले फीचर्स विकसित किए और उन्हें बाल यौन शोषण तथा मानसिक तनाव के जोखिमों के प्रति असुरक्षित छोड़ा। अदालत ने इसे सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानते हुए कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना ठोका है।

दूसरी ओर, भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई में छात्रों और परीक्षा सुधारों को लेकर जारी किए गए एक महत्वपूर्ण फेसबुक पोस्ट को मेटा द्वारा 5-6 घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया गया था। इस कार्रवाई पर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय और आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कड़ा एतराज जताया। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि कंपनी ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी और अपनी प्रणाली में सुधार नहीं किया, तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत प्राप्त 'सेफ हार्बर' (कानूनी सुरक्षा) का अधिकार गंवाना पड़ सकता है।

न्यू मेक्सिको राज्य के अटॉर्नी जनरल राउल टॉरेज द्वारा मेटा के खिलाफ दायर ऐतिहासिक मुकदमे की सुनवाई दो चरणों में पूरी हुई। पहले चरण में मार्च महीने में जूरी ने माना था कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्मों की सुरक्षा को लेकर उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया, जिसके लिए 375 मिलियन डॉलर का नागरिक दंड तय किया गया था। इसके बाद हालिया दूसरे चरण में बिना जूरी की तीन हफ्ते की सुनवाई के बाद जज ब्रायन बीडशेड ने फैसला सुनाते हुए 567 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त जुर्माना लगाया।

अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की कुल राशि में से 420 मिलियन डॉलर सीधे तौर पर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य उपचार सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे, जबकि शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियानों और रोकथाम कार्यक्रमों में खर्च होगी। इसके साथ ही अदालत ने न्यू मेक्सिको में किशोरों के खातों के लिए मासिक उपयोग सीमा, नोटिफिकेशन पर रोक, वयस्कों द्वारा नाबालिगों से संपर्क पर कड़े नियंत्रण और एआई चैटबॉट्स पर सुरक्षा घेरा लागू करने के निर्देश दिए हैं।

इसी दौरान भारत में, पीएम मोदी के वीडियो पोस्ट को हटाए जाने के बाद विवाद गरमा गया। आईटी मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा के शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी दी कि यदि 3 दिनों के भीतर इस तकनीकी त्रुटि पर जवाब और माफी नहीं दी गई, तो कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कापलां तुरंत भारत पहुंचे। उन्होंने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात कर कंपनी की ओर से आधिकारिक रूप से माफी मांगी और स्वीकार किया कि पोस्ट को ब्लॉक करना एक गंभीर मानवीय व तकनीकी भूल थी।

अदालती आदेश के बाद न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टॉरेज ने कहा कि यह फैसला उन सभी अभिभावकों की जीत है जो सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बड़ी टेक कंपनियों को स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा की कीमत पर मुनाफा कमाने की छूट नहीं दी जाएगी। दूसरी तरफ, मेटा के प्रवक्ता ने अदालती फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी सुरक्षा के मोर्चे पर लगातार निवेश कर रही है और इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करेगी।

भारत सरकार के रुख पर बात करते हुए आईटी मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मेटा खुद को केवल एक तटस्थ 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती, क्योंकि उसकी एल्गोरिदम खुद तय करती है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा। वहीं, मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कापलां ने मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी के पोस्ट पर हुई कार्रवाई पर अफसोस जताया और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) तथा डीपफेक जैसे मुद्दों पर भारत के कड़े नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया।

इन दोनों वैश्विक घटनाओं का प्रभाव पूरे टेक उद्योग और सोशल मीडिया विनियमन पर गहरा पड़ने वाला है। अमेरिका में न्यू मेक्सिको का यह फैसला एक नजीर बन सकता है, क्योंकि अमेरिका के दर्जनों अन्य राज्य और स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स भी मेटा के खिलाफ इसी तरह के मुकदमे लड़ रहे हैं। वित्तीय दृष्टि से 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना हालांकि मेटा के वार्षिक लाभ की तुलना में सीमित है, लेकिन इस फैसले से कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन और फीचर्स में बुनियादी बदलाव करने होंगे।

भारत के संदर्भ में, इस विवाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दी जाने वाली कानूनी प्रतिरक्षा 'सेफ हार्बर' पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। यदि भारत सरकार मेटा से मध्यस्थ का दर्जा वापस लेती है, तो प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई हर अवैध सामग्री के लिए कंपनी को सीधे तौर पर आपराधिक व नागरिक मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। इससे टेक कंपनियों को भारत में अपनी एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना होगा।

आने वाले दिनों में मेटा अमेरिकी अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि टेक कंपनियों के खिलाफ जनहित और बाल सुरक्षा के मामले में अदालतों का रुख कड़ा होता जा रहा है। उधर भारत में, आईटी मंत्रालय और संसदीय समिति मेटा द्वारा दी गई सफाई और सुरक्षा उपायों की समीक्षा जारी रखेगी। भारत सरकार जल्द ही डिजिटल इंडिया एक्ट और नए सोशल मीडिया दिशानिर्देशों के जरिए एल्गोरिदम आधारित कंटेंट प्रमोशन और वीआईपी खातों की सुरक्षा पर और कड़े नियम लागू कर सकती है।

Also Read- Vande Mataram in Madrasas: 'मदरसों में वंदे मातरम् गाया तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा', कलकत्ता हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow