सदन में हंगामा: लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, राज्यसभा में कामकाज जारी

संसद के सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच तीखे टकराव के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई है, जबकि राज्यसभा में कामकाज चल रहा है।

Aug 6, 2026 - 12:59
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सदन में हंगामा: लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, राज्यसभा में कामकाज जारी
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित
  • विपक्ष और सरकार आमने-सामने, भारी हंगामे के कारण लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, राज्यसभा जारी
  • संसद में जोरदार हंगामा: विपक्ष के शोर-शराबे के बाद लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित, जानिए क्या है स्थिति
  • संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा, लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

भारतीय संसद के सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। नई दिल्ली स्थित संसद भवन के निचले सदन में सुबह कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सामान्य कामकाज ठप हो गया। पीठ द्वारा सदस्यों को शांत रहने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील के बावजूद जब व्यवधान जारी रहा, तो पीठ ने कार्यवाही को स्थगित करने की घोषणा की। दूसरी ओर, उच्च सदन यानी राज्यसभा में सामान्य कामकाज जारी रहा। अब दोपहर 2 बजे जब लोकसभा फिर से शुरू होगी, तो सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि सदन का कामकाज सुचारू रूप से चल पाता है या फिर से राजनीतिक खींचतान जारी रहती है।

संसद के वर्तमान सत्र के दौरान सरकार और विपक्षी दलों के बीच विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों को लेकर तीखा टकराव सामने आया है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्य तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए सदन के वेल (पीठ के समक्ष) तक पहुंच गए, जिसके चलते प्रश्नकाल का संचालन असंभव हो गया।

स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लोकसभा पीठ ने पहले सदस्यों को अपनी-अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा शांत न होने पर सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके विपरीत, राज्यसभा में हालांकि कुछ विषयों पर बहस देखने को मिली, लेकिन वहां विधायी और संसदीय कार्य प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ता रहा।

संसद की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। हमेशा की तरह लोकसभा में प्रश्नकाल के साथ दिन की शुरुआत होनी तय थी। हालांकि, जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करने का प्रयास किया, विपक्षी सांसद एक साथ खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। विपक्षी दल महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने और अपनी मांगों पर तुरंत बहस की मांग पर अड़े हुए थे।

सदन के भीतर माहौल उस समय और अधिक गरमा गया जब विपक्षी दल के कई सांसद वेल की तरफ बढ़ आए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। पीठ पर आसीन सभापति ने बार-बार अपील की कि प्रश्नकाल जनता के हितों से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए सदस्यों को अपने प्रश्न पूछने का अवसर दिया जाना चाहिए। जब विपक्षी दलों का विरोध और अधिक उग्र हो गया, तो पीठ ने दोपहर 12 बजे के आसपास कार्यवाही रोकते हुए इसे दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।

इसी समय के दौरान राज्यसभा की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत और व्यवस्थित रही। उच्च सदन में शून्यकाल और अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरा करने का प्रयास किया गया, जिससे दोनों सदनों के कामकाज की स्थिति में स्पष्ट अंतर देखने को मिला।

इस राजनीतिक टकराव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। सरकार के मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार सदन में हर मुद्दे पर नियम-नियमावली के तहत चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ उठाने और सदन का समय बर्बाद करने की नीयत से हंगामा कर रहा है।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि सरकार जनता से जुड़े ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा कराने से बच रही है। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है और कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा कराने की उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब या बहस का आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने का सीधा असर विधायी प्रक्रियाओं और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर पड़ा है। प्रश्नकाल के स्थगित होने से सांसदों द्वारा जनता की समस्याओं को लेकर सरकार से पूछे जाने वाले कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक नहीं हो सका।

इसके अलावा, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले कई विधेयकों और महत्वपूर्ण कार्यसूची पर चर्चा पिछड़ गई है। संसदीय कार्य में आने वाले इस प्रकार के अवरोध से न केवल संसद का कीमती समय नष्ट होता है, बल्कि करदाताओं के पैसे से चलने वाले इस संवैधानिक मंच पर नीतिगत फैसलों की गति भी धीमी पड़ जाती है।

अब सबकी निगाहें दोपहर 2 बजे पर टिकी हैं, जब लोकसभा की कार्यवाही पुनः शुरू की जाएगी। यदि सरकार और विपक्षी दलों के बीच गतिरोध दूर करने के लिए किसी प्रकार का संवाद स्थापित नहीं होता है, तो दोबारा बैठक होने पर भी हंगामे के आसार बने रह सकते हैं।

संसदीय कार्य मंत्री और पीठ द्वारा इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए विपक्षी नेताओं से संपर्क साधे जाने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि विधायी कार्यसूची के अनुसार सदन का संचालन संभव हो सके। अगर विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहता है, तो दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित होने की नौबत भी आ सकती है।.

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