Jaipur ACB Action: सांभर लेक थानाधिकारी राममिलन मीणा 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, सड़क निर्माण ठेकेदार से मांगी थी घूस
जयपुर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने सांभर लेक थानाधिकारी राममिलन मीणा को सड़क ठेकेदार से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

- Jaipur ACB Action: सांभर लेक थानाधिकारी राममिलन मीणा 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, सड़क निर्माण ठेकेदार से मांगी थी घूस
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राजस्थान में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार अभियान चला रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने जयपुर जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी की टीम ने सांभर लेक थाने के थानाधिकारी (एसएचओ) राममिलन मीणा को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस निरीक्षक पर आरोप है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र में चल रहे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक सड़क निर्माण कार्य को बिना किसी व्यवधान के जारी रखने और संबंधित ठेकेदार को बेवजह परेशान न करने के बदले इस अवैध राशि की मांग की थी।
शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गुप्त सत्यापन कराने के उपरांत जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। आरोपी थानाधिकारी को रिश्वत की तय रकम लेते ही एसीबी की टीम ने मौके पर दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद ब्यूरो की टीमों ने संबंधित परिसरों में आवश्यक साक्ष्य जुटाने की वैधानिक प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इस ट्रैप कार्रवाई के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
- हफ्ते और महीने की बंधी के रूप में मांगा जा रहा था धन
ब्यूरो से प्राप्त प्राथमिक विवरण के मुताबिक, परिवादी के पिता की निर्माण फर्म को लोक निर्माण विभाग की ओर से सांभर लेक थाना क्षेत्र के अंतर्गत सड़क निर्माण का आधिकारिक ठेका मिला हुआ था। ठेकेदार की फर्म द्वारा मौके पर मशीनों और श्रमिकों की सहायता से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। आरोप के अनुसार, थानाधिकारी राममिलन मीणा ने निर्माण स्थल पर कार्य को निर्बाध चलने देने की एवज में प्रतिमाह 10 हजार रुपये के हिसाब से नियमित बंधी (मासिक घूस) देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
शिकायत में बताया गया कि थानाधिकारी द्वारा पूर्व के महीनों की बकाया राशि और वर्तमान कार्य के एवज में एकमुश्त 50 हजार रुपये की मांग रखी गई थी। परिवादी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने रिश्वत देने में असमर्थता जताई, तो थानाधिकारी ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं। परिवादी का कहना था कि एसएचओ द्वारा निर्माण कार्य में लगी मिक्सर मशीनों, डंपरों और ट्रैक्टरों को जब्त कर थाने ले जाने तथा वहां काम कर रहे श्रमिकों को जबरन बैठाकर प्रताड़ित करने का भय दिखाया जा रहा था, जिससे सरकारी परियोजना का काम प्रभावित होने की आशंका बन गई थी।
- एसीबी के सत्यापन में खुली अवैध मांग की पोल
लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना और काम बंद कराने की धमकियों से परेशान होकर निर्माण फर्म से जुड़े प्रतिनिधि ने पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के समक्ष पेश की। एसीबी के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इस गोपनीय शिकायत का तकनीकी और भौतिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान परिवादी और आरोपी अधिकारी के बीच हुई बातचीत और 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि रिकॉर्ड पर दर्ज हुई।
मांग सत्यापित होने के तुरंत बाद एसीबी की विशेष जांच टीम ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति तैयार की। तय योजना के तहत एसीबी की टीम ने रासायनिक पाउडर लगे नोट परिवादी को सौंपे और उन्हें आरोपी पुलिस अधिकारी के पास भेजा। जैसे ही परिवादी ने आरोपी थानाधिकारी को उसके बताए स्थान पर 50 हजार रुपये की राशि सुपुर्द की, पहले से घात लगाकर तैयार बैठी एसीबी की टीम ने तत्काल दबिश दी।
- कमरे में ही दबोचा, हाथ धुलवाते ही लाल हुआ पानी
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, दबिश के दौरान आरोपी थानाधिकारी राममिलन मीणा के पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली गई। मौके पर स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में जब आरोपी के हाथों को रासायनिक घोल से धुलवाया गया, तो उसका रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का तकनीकी साक्ष्य है कि नोटों को आरोपी ने स्वयं अपने हाथों से पकड़ा था। इसके बाद एसीबी टीम ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत हिरासत में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर कानूनी पंचनामा तैयार किया गया और रिश्वत की राशि को सील कर दिया गया। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में आरोपी के सरकारी आवास, निजी ठिकाने और कार्यालय कक्ष की तलाशी ली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस प्रकार की अवैध वसूली किसी अन्य विकास परियोजनाओं या व्यक्तियों से भी की जा रही थी।
- सरकारी विकास कार्यों में अवैध वसूली पर प्रहार
राजस्थान में विभिन्न विकास प्राधिकरणों, नगर निकायों और लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर पुलिस या प्रशासनिक कार्मिकों द्वारा अवैध वसूली की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। अक्सर ठेकेदारों को निर्माण सामग्री की ढुलाई में लगने वाले भारी वाहनों के चालान काटने या काम रोकने का डर दिखाकर अवैध राशि की मांग की जाती है।
एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत किसी भी लोक सेवक द्वारा विकास कार्यों में व्यवधान डालकर अवैध वसूली करने के मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों ने आम नागरिकों और व्यवसायियों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी वैध कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है या अनुचित दबाव बनाता है, तो वे सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के टोल-फ्री नंबर या हेल्पलाइन पर संपर्क कर गोपनीय शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
गिरफ्तार थानाधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की सुसंगत धाराओं के तहत नियमित प्राथमिकी दर्ज कर अग्रिम विधिक अनुसंधान किया जा रहा है। जांच पूरी होने के उपरांत आरोपी को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
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