Trending: फिर नीले ड्रम में मिला अज्ञात शव- गला और पैर रस्सी से बंधे, हत्या की आशंका से सनसनी।
पंजाब के लुधियाना में शेरपुर चौक के पास एक खाली प्लॉट में नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी...
पंजाब के लुधियाना में शेरपुर चौक के पास एक खाली प्लॉट में नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव प्लास्टिक की बोरी में लिपटा हुआ था, और इसके गले व पैर रस्सी से कसकर बंधे हुए थे। स्थानीय लोगों ने ड्रम से आ रही तेज दुर्गंध के बाद पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद थाना डिवीजन-6 की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया। इस घटना ने मेरठ में हाल ही में हुए एक समान हत्याकांड की याद दिला दी, जहां भी एक नीले ड्रम में शव बरामद हुआ था। पुलिस ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच शुरू कर दी है और मृतक की पहचान के लिए आसपास के जिलों में तस्वीरें भेजी हैं।
घटना 25 जून 2025 की सुबह शेरपुर चौक के पास एक खाली प्लॉट में सामने आई। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई दिनों से इस प्लॉट में एक नीला ड्रम पड़ा था, जिसमें से तेज बदबू आ रही थी। बुधवार सुबह जब कुछ लोगों ने ड्रम की जांच की, तो उन्हें एक बोरी दिखी, जिसके एक छोटे से छेद से मानव पैर नजर आया। इसकी सूचना तुरंत थाना डिवीजन-6 की पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ड्रम खोला, तो उसमें एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। शव को सफेद चादर और प्लास्टिक की बोरी में लपेटा गया था, और इसके हाथ-पैर रस्सी से कसकर बंधे थे। पुलिस के अनुसार, शव की हालत सड़ी-गली थी, और अनुमान है कि यह दो से तीन दिन पुराना हो सकता है। प्रारंभिक जांच में मृतक की उम्र लगभग 35-40 वर्ष आंकी गई है, और उसका चेहरा प्रवासी मजदूर जैसा प्रतीत होता है। हालांकि, शरीर पर स्पष्ट चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन कुछ सूत्रों ने दावा किया कि शव को जलाने की कोशिश की गई थी, क्योंकि शरीर काला पड़ गया था और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। थाना डिवीजन-6 की प्रभारी इंस्पेक्टर कुलवंत कौर ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मृत्यु के सही कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मृतक की पहचान के लिए उसकी तस्वीरें पड़ोसी जिलों में भेजी गई हैं।
पुलिस को संदेह है कि यह हत्या सुनियोजित ढंग से की गई थी। ड्रम का एकदम नया होना इस बात की ओर इशारा करता है कि हत्यारों ने शव को छिपाने के लिए विशेष रूप से इसे खरीदा होगा। पुलिस ने ड्रम बनाने वाली 42 कंपनियों से पूछताछ शुरू की है ताकि इसके स्रोत का पता लगाया जा सके। इसके अलावा, आसपास के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, और लाडोवाल टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, घटनास्थल के पास सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से पुलिस की जांच में मुश्किलें आ रही हैं। प्लॉट का एक हिस्सा रेलवे ट्रैक से सटा हुआ है, जिसके कारण पुलिस को शक है कि हत्यारे इलाके से परिचित थे और उन्होंने जानबूझकर ऐसी जगह चुनी जहां कैमरे न हों।
- मेरठ हत्याकांड से समानता
इस घटना ने मेरठ में मार्च 2025 में हुए एक हत्याकांड की याद दिला दी, जहां मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की लाश उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने नीले ड्रम में सीमेंट से भरकर छिपाई थी। लुधियाना में भी नीले ड्रम का इस्तेमाल और शव के गले-पैरों का रस्सी से बंधा होना इस मामले को और रहस्यमय बनाता है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे "नीले ड्रम का खौफ" करार दिया, और कुछ ने मेरठ के मामले से इसकी तुलना की।
घटना की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली, जिसके बाद लोगों ने हत्या की क्रूरता और पुलिस की जांच पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, "नीला ड्रम अब हत्यारों का हथियार बन गया है। मेरठ के बाद लुधियाना में भी यही तरीका अपनाया गया। पुलिस को जल्दी हत्यारों तक पहुंचना होगा।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह कितना डरावना है कि लोग इतनी क्रूरता से हत्या कर शव को ड्रम में छिपा रहे हैं। क्या हमारा समाज इतना असंवेदनशील हो गया है?"
यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है। पहला, शहरी इलाकों में खाली प्लॉट्स और निर्माण स्थलों की निगरानी की कमी। शेरपुर जैसे व्यस्त इलाके में कई दिनों तक ड्रम से बदबू आने के बावजूद किसी ने इसकी जांच नहीं की, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। दूसरा, अपराधियों की बढ़ती क्रूरता और सुनियोजित तरीके से शव को ठिकाने लगाने की प्रवृत्ति। तीसरा, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, क्योंकि मृतक की प्रारंभिक पहचान एक प्रवासी के रूप में हुई है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना और हत्यारों तक पहुंचना है। चूंकि शव की हालत खराब है, पहचान में समय लग सकता है। पुलिस ने आसपास के पांच किलोमीटर क्षेत्र में सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की है। इसके अलावा, फोरेंसिक टीम ने ड्रम और बोरी से सबूत इकट्ठा किए हैं, जो जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि अपराध की क्रूरता बढ़ रही है, और शहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। खाली प्लॉट्स और रेलवे ट्रैक जैसे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन को तत्काल कदम उठाने होंगे। साथ ही, प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष नीतियां बनानी होंगी। लुधियाना के शेरपुर में नीले ड्रम में मिला शव न केवल एक क्रूर हत्याकांड का सबूत है, बल्कि यह समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है, लेकिन मृतक की पहचान और हत्यारों तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है।
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