चंद रुपयों के विवाद और चोरी पकड़े जाने के डर से कलयुगी भाई बना कातिल, वारदात को छुपाने के लिए रची थी बेहद खौफनाक साजिश
उत्तराखंड की शांत वादियों और देश की राजधानी के नजदीक बसे देहरादून महानगर में एक ऐसी सनसनीखेज और दिल दहला देने
- देहरादून में पैसों के लालच और नशे की लत ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार, छोटे भाई ने की सगे बड़े भाई की बेरहमी से हत्या
- उत्तराखंड की राजधानी में सगे रिश्तों का हुआ कत्ल, एडवोकेट भाई को रास्ते से हटाने के लिए छोटे भाई ने ही चलाई थी बंदूक
उत्तराखंड की शांत वादियों और देश की राजधानी के नजदीक बसे देहरादून महानगर में एक ऐसी सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली आपराधिक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय रिश्तों पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है। शहर के पटेलनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भुड्डी गांव में एक सगे छोटे भाई ने अपने ही बड़े भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में न केवल मातम पसर गया बल्कि स्थानीय समाज में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश और अचंभा है कि कैसे कोई अपने ही खून का इस तरह से प्यासा हो सकता है। मृतक की पहचान एक युवा एडवोकेट के रूप में हुई है, जो समाज में काफी सम्मानित थे और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शुरुआती दौर में इस पूरे मामले को बाहरी हमलावरों द्वारा अंजाम दी गई वारदात के रूप में पेश करने की पुरजोर कोशिश की गई थी, लेकिन जब पुलिस प्रशासन ने गहनता से वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तफ्तीश शुरू की, तो घर के भीतर का ही एक सदस्य मुख्य खलनायक के रूप में सामने आया। इस खौफनाक वारदात के पीछे की मुख्य वजह अत्यधिक धन का लालच, नशे की गंभीर लत और व्यक्तिगत अहम का टकराव माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें लंबे समय से घर में चल रहे आपसी मनमुटाव और आदतों से जुड़ी हुई थीं, जो समय के साथ एक बड़े विवाद में तब्दील हो गईं। आरोपी छोटा भाई काफी समय से गलत संगति में था और उसे नशे की बेहद बुरी लत लग चुकी थी, जिसके कारण उसे लगातार बड़ी रकम की आवश्यकता रहती थी। अपनी इसी फिजूलखर्ची और शौक को पूरा करने के लिए वह अक्सर परिवार के लोगों पर पैसे देने का दबाव बनाता था। बड़ा भाई चूंकि कानून का जानकार था और परिवार के प्रति जवाबदेह था, इसलिए वह छोटे भाई की इन तमाम अनैतिक आदतों और फिजूलखर्ची का लगातार विरोध करता था। वह उसे कई बार सुधारने की हिदायत दे चुका था और गलत राह छोड़ने के लिए डांट-फटकार भी लगाता था। यही बात छोटे भाई के मन में धीरे-धीरे गहरी कड़वाहट और रंजिश के रूप में बैठती चली गई। वह अपने बड़े भाई को अपने रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा समझने लगा था और इसी रंजिश के कारण उसने अपने ही सगे भाई को हमेशा-हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की एक बेहद खौफनाक और सोची-समझी साजिश रचनी शुरू कर दी थी। पुलिस प्रशासन की शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों भाइयों के बीच तात्कालिक विवाद पिता के बैंक खाते से गायब हुई भारी-भरकम धनराशि को लेकर हुआ था। नशे की लत के शिकार छोटे भाई ने चुपके से पिता का एटीएम कार्ड चुराकर लगभग दस लाख रुपये की बड़ी रकम खाते से साफ कर दी थी। जब बड़े भाई को इस चोरी की भनक लगी, तो उसने छोटे भाई को न केवल बुरी तरह फटकारा बल्कि उसकी इस करतूत के लिए उसकी पिटाई भी कर दी थी, जिससे बौखलाकर उसने इस खौफनाक हत्याकांड की अंतिम योजना को अंजाम दे डाला।
इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपी ने बेहद शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया था ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके और किसी को भी उस पर शक न हो। जब घर के माता-पिता धार्मिक यात्रा के सिलसिले में देश से बाहर गए हुए थे, तब घर में केवल ये दोनों भाई ही अकेले मौजूद थे। इस मौके का फायदा उठाते हुए आरोपी ने वारदात से दो दिन पहले ही घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग प्रणाली को पूरी तरह से बंद कर दिया था ताकि घटना के समय की कोई भी गतिविधि कैमरों में दर्ज न हो सके। कैमरों को इस तरह से सेट किया गया था कि वे केवल लाइव स्क्रीन पर दिखें लेकिन उनका बैकअप और स्टोरेज पूरी तरह बंद रहे। इसके बाद रविवार की रात जब दोनों के बीच एक बार फिर पैसे और पुरानी चोरी को लेकर तीखी बहस शुरू हुई, तो आरोपी ने पहले से छुपाकर रखे गए एक अवैध तमंचे को निकाला और अपने बड़े भाई की गर्दन और सीने को निशाना बनाते हुए गोली दाग दी। गोली लगते ही बड़ा भाई लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा और अत्यधिक खून बह जाने के कारण मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।
हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी ने कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह से गुमराह करने के लिए एक नई और झूठी कहानी गढ़नी शुरू कर दी। उसने आसपास के ग्रामीणों और रिश्तेदारों को यह बताया कि अचानक कुछ अज्ञात नकाबपोश बदमाश घर के भीतर दाखिल हुए और उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग करके उसके बड़े भाई की हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए। खुद को पूरी तरह बेकसूर और पीड़ित दिखाने के लिए वह मृतक के शव के पास बैठकर विलाप करने का नाटक भी करने लगा। इतना ही नहीं, अपनी इस मनगढ़ंत कहानी को और अधिक वास्तविक रूप देने के लिए उसने स्थानीय ग्रामीणों और कुछ रिश्तेदारों को उकसाया और भड़काया, जिसके बाद भारी भीड़ ने देहरादून-पोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया। इस चक्काजाम का मुख्य उद्देश्य पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाना और जांच की दिशा को बाहरी बदमाशों की तरफ मोड़ना था ताकि पुलिस हाईवे की कानून व्यवस्था को संभालने में व्यस्त हो जाए और उसे अपने स्तर पर सबूतों को नष्ट करने का पूरा समय मिल सके।
हालांकि, कानून के हाथ हमेशा अपराधी की सोच से ज्यादा लंबे होते हैं और इस मामले में भी सुरक्षा एजेंसियों की तीखी नजरों से हत्यारा ज्यादा देर तक बच नहीं सका। सूचना मिलते ही जब पुलिस की आला टीमें और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टुकड़ी घटनास्थल पर पहुंची, तो उन्हें आरोपी के बयानों और घटनास्थल की परिस्थितियों में भारी विरोधाभास नजर आया। पुलिस टीमों ने जब घर और उसके आसपास के रास्तों के अन्य सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो उन्हें उस समयावधि के दौरान किसी भी बाहरी संदिग्ध व्यक्ति या गाड़ी की आवाजाही देखने को नहीं मिली। इसके बाद जब फॉरेंसिक टीम ने घर के भीतर गहन तलाशी अभियान चलाया, तो उन्हें घर के ही एक शौचालय में छुपाकर रखा गया वह अवैध देशी कट्टा बरामद हो गया, जिससे गोली चलाई गई थी। जब पुलिस ने छोटे भाई से कड़ाई से पूछताछ शुरू की और कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद होने तथा शौचालय से हथियार मिलने के संबंध में कड़े सवाल दागे, तो वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया और अंत में उसने अपना जुर्म पूरी तरह से स्वीकार कर लिया।
What's Your Reaction?







