Dark Pattern Case: जेप्टो, बुक माई शो और इंडिगो समेत 9 एप्स पर कार्रवाई, 20 लाख रुपये जुर्माना 

सीसीपीए ने डार्क पैटर्न का इस्तेमाल कर ग्राहकों को गुमराह करने वाली जेप्टो, इंडिगो और बुक माई शो समेत 9 डिजिटल कंपनियों पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

Aug 6, 2026 - 14:05
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Dark Pattern Case: जेप्टो, बुक माई शो और इंडिगो समेत 9 एप्स पर कार्रवाई, 20 लाख रुपये जुर्माना 
  • उपभोक्ताओं से धोखेबाज़ी पर नकेल: Zepto और BookMyShow समेत 9 प्लेटफॉर्म्स पर सीसीपीए ने लगाया जुर्माना 
  • ऑनलाइन शॉपिंग और बुकिंग में धोखा देना पड़ा भारी: जेप्टो, इंडिगो और बुक माई शो समेत 9 एप्स पर 20 लाख का जुर्माना 
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी कार्रवाई: डार्क पैटर्न के इस्तेमाल पर जेप्टो, इंडिगो और बुक माई शो समेत 9 एप्स पर जुर्माना

देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा उपभोक्ताओं को अनजाने में अतिरिक्त भुगतान कराने और भ्रमित करने वाली तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कड़ा रुख अपनाया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जानकारी दी कि डिजिटल एप्स पर 'डार्क पैटर्न' यानी भ्रामक यूजर इंटरफेस का उपयोग करने के मामले में जेप्टo, बुक माई शो, इंडिगो, फिजिक्स वाला और फर्स्टक्राई समेत 9 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है। नियामक ने इन कंपनियों से कुल 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया है तथा उनके इंटरफेस में अनिवार्य बदलाव कराए हैं। केंद्रीय एजेंसी की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन शॉपिंग और बुकिंग के दौरान उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा कंपनियों द्वारा बिना सहमति शुल्क वसूलने की प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना है। आगे भी सरकार ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को स्वयं के सिस्टम का ऑडिट करने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

डिजिटल दुनिया में उपभोक्ताओं को गुमराह कर अनुचित लाभ कमाने की रणनीति यानी 'डार्क पैटर्न' का उपयोग करने वाली डिजिटल कंपनियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने देश के प्रमुख क्विक-कॉमर्स, एडटेक और ट्रैवल एप्स पर शिकंजा कसते हुए कुल 20 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। सरकार ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और 'डार्क पैटर्न रोकथाम एवं विनियमन दिशानिर्देश, 2023' के उल्लंघन पर 9 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई पूरी की गई है। इनमें से कुछ कंपनियों पर भारी आर्थिक जुर्माना ठोका गया है, तो कुछ को अपने मोबाइल एप और वेबसाइट के डिजाइन में तत्काल सुधार करने का आदेश दिया गया है। 

जांच के दौरान नियामक ने पाया कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'जेप्टो' सामान की शुरुआती कीमत कम दिखाता था, लेकिन चेकआउट के समय चुपके से हैंडलिंग चार्ज और मेंबरशिप फीस जोड़ देता था। इसे डार्क पैटर्न की भाषा में 'ड्रिप प्राइसिंग' और 'बास्केट स्नीकिंग' कहा जाता है। इस उल्लंघन पर सीसीपीए ने जेप्टो पर सबसे ज्यादा 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

एडटेक प्लेटफॉर्म 'फिजिक्स वाला' के एप पर 'पीडब्ल्यू फाउंडेशन' के लिए 10 रुपये का दान अपने आप प्री-सिलेक्टेड मिलता था, जिसे हटाने पर भावनात्मक रूप से प्रभावित करने वाले संदेश दिखाए जाते थे। इस मामले में संज्ञान लेते हुए नियामक ने 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसी तरह अनुज जिंदल कोचिंग प्लेटफॉर्म पर 24 घंटे का फर्जी काउंटडाउन टाइमर दिखाकर भ्रामक जल्दबाजी पैदा करने के आरोप में 3 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई।

अन्य कंपनियों में 'फर्स्टक्राई' पर हिडन चार्जेस छिपाने के लिए 2 लाख रुपये, जबकि 'फॉर्मेसी', 'मैकेफी' और 'स्पाइसजेट' पर प्री-टिक्ड बॉक्स और ऑटो-रिन्यूअल विकल्पों के लिए 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा एयरलाइन कंपनी 'इंडिगो' अपने एप पर अतिरिक्त सेवाएं न लेने वाले यात्रियों को "No I will take risk" जैसा भावनात्मक रूप से डराने वाला संदेश (कन्फर्म शेमिंग) दिखाती थी, जिसे बदलकर अब निष्पक्ष विकल्प "No, I will not add to the trip" कराया गया है। वहीं टिकट बुकिंग एप 'बुक माई शो' द्वारा बिना ग्राहक की सक्रिय सहमति के टिकट में 1 रुपये का चैरिटी योगदान प्री-टिक करने की व्यवस्था को समाप्त कराया गया। 

राज्यसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिन कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया था, उनमें से अधिकांश ने पेनल्टी की राशि जमा करा दी है और अपने एप्स व प्लेटफॉर्म्स से भ्रामक डार्क पैटर्न्स को हटा दिया है। जेप्टो ने जुर्माना जमा करने के साथ-साथ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट की है और चेकआउट पेज पर सभी तरह के शुल्क पारदर्शी रूप से दिखाने का भरोसा दिया है।

दूसरी ओर उपभोक्ता मामलों के विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत का डिजिटल बाजार तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में किसी भी कंपनी को यूजर इंटरफेस की आड़ में ग्राहकों के स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सरकार की इस सख्त कार्रवाई से देश के करोड़ों डिजिटल उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलेगी। अब ऑनलाइन सामान खरीदते समय, फ्लाइट या सिनेमा टिकट बुक करते समय चेकआउट स्क्रीन पर कोई भी छुपा हुआ शुल्क या अनचाही डोनेशन बिना सहमति के नहीं जोड़ी जा सकेगी। इस निर्णय से डिजिटल ई-कॉमर्स सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और अन्य सभी एप डेवलपर्स व कंपनियों को अपने इंटरफेस डिजाइन में निष्पक्षता बनाए रखने का स्पष्ट संदेश गया है। 

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और सीसीपीए ने सभी ई-कॉमर्स व डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म्स को पहले ही सेल्फ-ऑडिट का एडवाइजरी निर्देश जारी कर रखा है। इसके तहत कंपनियों को स्वयं जांच कर अपने प्लेटफॉर्म्स से सभी 13 प्रकार के स्वीकृत डार्क पैटर्न्स को हटाना होगा। इसके अलावा, उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) और 'जागृति डैशबोर्ड' के माध्यम से डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करने वाले किसी भी एप या वेबसाइट के खिलाफ सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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