लार्ड्स टेस्ट 2010: जब पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ों की 'नो-बॉल' ने हिला दी थी विश्व क्रिकेट की बुनियाद
अगस्त 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ लार्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमेर स्पॉट फिक्सिंग में पकड़े गए थे। जानिए उस पूरे प्रकरण का घटनाक्रम।

-
सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और आमेर: क्रिकेट इतिहास के उस काले पन्ने की कहानी जिसने बदल दिए खेल के नियम
-
Pakistan Spot Fixing Scandal: 16 साल पहले लार्ड्स में क्या हुआ था? जानिए कैसे हुआ था उस साज़िश का पर्दाफ़ाश
-
क्रिकेट को शर्मसार करने वाला वो टेस्ट मैच: जब चंद रुपयों के लालच में तबाह हुआ युवा प्रतिभाओं का करियर
लंदन/नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के इतिहास में अगस्त 2010 का चौथा टेस्ट मैच एक ऐसा काला अध्याय है, जिसने 'जेंटलमैन गेम' कहे जाने वाले इस खेल की शुचिता को हिलाकर रख दिया था। लंदन के ऐतिहासिक लार्ड्स मैदान पर इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज का अंतिम मुकाबला खेला जा रहा था। मैच के दौरान खेल प्रेमियों को यह आभास तक नहीं था कि मैदान पर फेंकी जा रही कुछ गेंदें केवल तकनीकी भूल नहीं, बल्कि सट्टेबाजों के साथ मिलकर रची गई एक पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा थीं।
ब्रिटिश अखबार ‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन ने इस मुकाबले के तीसरे दिन क्रिकेट जगत में भूचाल ला दिया। स्टिंग में कथित बुकी और एजेंट मजहर मजीद को भारी रकम लेकर यह सटीक भविष्यवाणी करते हुए दिखाया गया कि मुकाबले के अमुक ओवरों में पाकिस्तानी तेज गेंदबाज कब-कब 'नो-बॉल' फेंकेंगे।
लार्ड्स की वो दो गेंदें और साजिश का खुलासा
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान तय की गई पटकथा के अनुसार, मैच के दौरान बाएं हाथ के 18 वर्षीय तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर ने अपने एक ओवर की तीसरी गेंद पर क्रीज से कई इंच आगे पैर रखकर एक भारी नो-बॉल फेंकी। इसके बाद उनके सीनियर जोड़ीदार मोहम्मद आसिफ ने भी तयशुदा ओवर में जानबूझकर उसी तरह की बड़ी नो-बॉल डाली।
साधारण तौर पर किसी तेज गेंदबाज से लाइन से थोड़ा आगे निकल जाना खेल की सामान्य गलती मानी जाती है, लेकिन जब स्टिंग वीडियो में मैच से पहले ही इन गेंदों का समय और ओवर हूबहू दर्ज पाया गया, तो खेल प्रशंसकों और अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश मैच के परिणाम को प्रभावित करने (मैच फिक्सिंग) के बजाय मैच के विशिष्ट पलों को तय करने (स्पॉट फिक्सिंग) से जुड़ी थी, जिस पर सट्टेबाजी के अवैध बाजारों में करोड़ों रुपये का दांव लगाया गया था।
कप्तान सलमान बट की भूमिका और साजिश का ताना-बाना
जांच एजेंसियों और आईसीसी की पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि इस पूरे प्रकरण के मुख्य सूत्रधार टीम के तत्कालीन कप्तान सलमान बट थे। बट ने ही लंदन के सट्टेबाज मजहर मजीद के साथ मिलकर गेंदबाजों को तय ओवरों में नो-बॉल फेंकने के निर्देश दिए थे।
मोहम्मद आसिफ उस समय दुनिया के सबसे घातक स्विंग गेंदबाजों में शुमार थे, जबकि मोहम्मद आमेर अपनी असाधारण गति और स्विंग के दम पर विश्व क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा माने जा रहे थे। लालच और अनुचित दबाव के चलते इन दोनों गेंदबाजों ने कप्तान के निर्देशों का पालन किया। स्टिंग ऑपरेशन के सार्वजनिक होते ही स्कॉटलैंड यार्ड (लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस) ने लॉर्ड्स स्थित पाकिस्तानी टीम के होटल में छापेमारी की और खिलाड़ियों के फोन व नकदी जब्त कर पूछताछ शुरू की।
आईसीसी का कड़ा रुख और कानूनी सजा
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आईसीसी ने त्वरित कार्रवाई की। सितंबर 2010 में तीनों खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया गया और 2011 में आईसीसी के भ्रष्टाचार-रोधी न्यायाधिकरण ने विस्तृत सुनवाई के बाद तीनों पर कड़े प्रतिबंध लगाए:
-
सलमान बट: 10 साल का प्रतिबंध (जिसमें 5 साल निलंबित अवधि थी)।
-
मोहम्मद आसिफ: 7 साल का प्रतिबंध (जिसमें 2 साल निलंबित अवधि थी)।
-
मोहम्मद आमेर: 5 साल का पूर्ण प्रतिबंध।
इसके समानांतर, ब्रिटेन की साउथवार्क क्राउन कोर्ट में आपराधिक धोखाधड़ी और अवैध भुगतान स्वीकार करने की साजिश का मुकदमा चला। नवंबर 2011 में ब्रिटिश अदालत ने तीनों खिलाड़ियों और बुकी मजहर मजीद को दोषी ठहराते हुए जेल की सजा सुनाई। सलमान बट को 30 महीने, आसिफ को 12 महीने, आमेर को 6 महीने (सुधार गृह) और मजहर मजीद को 32 महीने की कैद की सजा दी गई।
इस कांड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की संचालन व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया। आईसीसी ने अपने एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) को अत्यधिक अधिकार दिए। अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान ड्रेसिंग रूम में मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच और संचार उपकरणों के इस्तेमाल पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई।
खिलाड़ियों के लिए सट्टेबाजों या संदिग्ध संपर्कों की सूचना तुरंत अधिकारियों को देना अनिवार्य बना दिया गया, ऐसा न करने पर सीधे निलंबन का प्रावधान जोड़ा गया। हालांकि प्रतिबंध की मियाद पूरी होने के बाद मोहम्मद आमेर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और 2017 चैंपियंस ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन सलमान बट और मोहम्मद आसिफ का अंतरराष्ट्रीय करियर उसी लार्ड्स की पिच पर हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
यह घटना आज भी नए खिलाड़ियों के लिए इस बात की चेतावनी के रूप में याद की जाती है कि कैसे कुछ पलों का गलत निर्णय किसी भी महान करियर और खेल की प्रतिष्ठा को पूरी तरह नष्ट कर सकता है।
What's Your Reaction?





