हरिद्वार कांवड़ यात्रा 2025- 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, सावन शिवरात्रि पर समाप्त हुआ मेला।
Haridwar News: हरिद्वार में 15 दिनों तक चली कांवड़ यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन शांतिपूर्वक समाप्त हुई। इस दौरान 4.5 करोड़ से ज्यादा ....

हरिद्वार में 15 दिनों तक चली कांवड़ यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन शांतिपूर्वक समाप्त हुई। इस दौरान 4.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे और गंगा जल लेकर कनखल के दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर सहित अन्य शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया। पूरे शहर में "हर हर महादेव" और "बम बम भोले" के जयघोष गूंजते रहे। यह यात्रा भगवान शिव की भक्ति और आस्था का प्रतीक रही।
कांवड़ यात्रा सावन माह में भगवान शिव की पूजा के लिए की जाती है। मान्यता है कि यह परंपरा समुद्र मंथन की कथा से शुरू हुई, जब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए विष पिया और गंगा जल से उनका कंठ शांत किया गया। तब से श्रद्धालु गंगा जल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। हरिद्वार, गंगोत्री, और सुल्तानगंज जैसे स्थानों से जल लिया जाता है और काशी विश्वनाथ, वैद्यनाथ धाम, और दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर जैसे स्थानों पर जल चढ़ाया जाता है। यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता, जो भक्ति और संयम का प्रतीक है।
इस साल कांवड़ यात्रा 11 जुलाई 2025 से शुरू हुई और 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि पर खत्म हुई। पंचांग के अनुसार, सावन शिवरात्रि 23 जुलाई को सुबह 4:39 बजे से शुरू हुई और 24 जुलाई की रात 2:28 बजे तक रही। इस दिन लाखों भक्तों ने जलाभिषेक किया। हरिद्वार प्रशासन के अनुसार, इस बार 4.52 करोड़ श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे, जो पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा है। यात्रा के अंतिम तीन दिनों (20-23 जुलाई) में रोजाना 50-60 लाख डाक कांवड़िए पहुंचे।
कनखल का दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर इस यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव यहां अपनी ससुराल में वास करते हैं। मंदिर में रात से ही भक्तों की कतारें लगी रहीं। मंदिर के पुजारी विनोद शास्त्री ने बताया कि जलाभिषेक का पुण्य काल 23 जुलाई को रात तक रहा। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, दूध, और फूलों के साथ पूजा की। अन्य मंदिरों जैसे गौरी शंकर और हर की पौड़ी के पास के शिवालयों में भी भारी भीड़ रही।
हरिद्वार प्रशासन ने यात्रा को सुचारु बनाने के लिए कई इंतजाम किए। 6,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। 350 सीसीटीवी कैमरे और 11 ड्रोन से निगरानी हुई। हर की पौड़ी और अन्य घाटों पर सफाई, पेयजल, और स्वास्थ्य शिविरों की व्यवस्था थी। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर यातायात को डायवर्ट किया गया। जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित और एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने हर की पौड़ी पर पूजा की और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कांवड़ यात्रा से हरिद्वार में 8,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। बाजारों में रंग-बिरंगी कांवड़ों की बिक्री हुई, जिनमें तितली आकार की कांवड़ (28,000-30,000 रुपये) और भोलेनाथ के तिलक वाली कांवड़ (900-1,100 रुपये) खास रहीं। स्थानीय व्यापारियों ने इस मेले को आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
यात्रा के बाद हरिद्वार में हजारों टन कचरा जमा हो गया, जिसमें ज्यादातर सिंगल-यूज प्लास्टिक था। नगर निगम ने ड्रोन और सीसीटीवी के साथ "लाइनर बैग प्लस ड्रोन निगरानी मॉडल" लागू किया। जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने तीन दिन का सफाई अभियान शुरू किया। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने गंगा तटों को साफ रखने की अपील की।
यात्रा में कई प्रेरक कहानियां सामने आईं। सहारनपुर के मनोज कुमार ने 351 लीटर गंगा जल लेकर तीन महीने की यात्रा की। गाजियाबाद की आशा देवी ने अपने पति को कंधे पर उठाकर 180 किमी की यात्रा पूरी की। हालांकि, कुछ छोटी घटनाएं जैसे लक्ष्मणगढ़ में प्रदर्शन और रुड़की में 2015 का बवाल भी चर्चा में रहीं।
2025 की कांवड़ यात्रा ने हरिद्वार को भक्ति के रंग में रंग दिया। 4.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इसे भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक बनाया। प्रशासन की सख्त व्यवस्था और भक्तों की आस्था ने इस मेले को शांतिपूर्वक और यादगार बनाया। यह यात्रा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही।
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