दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर हमले की साजिश में राजेश के साथी तहसीन गिरफ्तार, चाकू से हमले की योजना का हुआ खुलासा।
Political: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले की जांच में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 24 अगस्त 2025 को मुख्य आरोपी राजेश भाई खिमजी भाई साकरिया के करीबी दोस्त तहसीन सैयद

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले की जांच में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 24 अगस्त 2025 को मुख्य आरोपी राजेश भाई खिमजी भाई साकरिया के करीबी दोस्त तहसीन सैयद को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि राजेश ने मुख्यमंत्री पर चाकू से हमला करने की योजना बनाई थी, और तहसीन को इस साजिश की पूरी जानकारी थी। दोनों की 15 साल पुरानी दोस्ती सामने आई है, और तहसीन ने अपना अपराध कबूल कर लिया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। हमला 20 अगस्त को मुख्यमंत्री के सिविल लाइन्स स्थित कैंप कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान हुआ था। पुलिस अब इस साजिश के पीछे बड़े नेटवर्क की संभावना की जांच कर रही है। रेखा गुप्ता ने इस घटना के बाद अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि वह जनता की सेवा में डटी रहेंगी। 20 अगस्त को सुबह करीब 8:15 बजे, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपनी साप्ताहिक जन सुनवाई के दौरान सिविल लाइन्स स्थित कैंप कार्यालय में थीं। इस दौरान 41 वर्षीय राजेश साकरिया, जो गुजरात के राजकोट का रहने वाला ऑटोरिक्शा चालक है, ने उन पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, राजेश ने पहले मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारा, फिर उन्हें धक्का दिया और उनके बाल खींचे। रेखा गुप्ता को इस हमले में हाथ, कंधे और सिर में चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर है। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत राजेश को पकड़ लिया और उसे सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस ने राजेश के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), 132 (सार्वजनिक सेवक पर हमला), और 221 (सार्वजनिक सेवक को बाधित करना) के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस को राजेश के मोबाइल फोन और सीसीटीवी फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिले। फुटेज में दिखा कि राजेश ने हमले से एक दिन पहले, 19 अगस्त को, मुख्यमंत्री के शालीमार बाग स्थित निवास और कैंप कार्यालय की रेकी की थी। उसने वहां के सीसीटीवी कैमरों और जगह का वीडियो बनाया, जो बाद में पुलिस को मिला। राजेश ने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से नाराज था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में भेजने का आदेश दिया गया था। उसकी मां भानुबेन साकरिया ने भी बताया कि राजेश को कुत्तों से बहुत लगाव था, और वह इस फैसले से परेशान था। हालांकि, पुलिस का मानना है कि यह हमले का एकमात्र कारण नहीं हो सकता। जांच को आगे बढ़ाते हुए, दिल्ली पुलिस ने राजेश के दोस्त तहसीन सैयद को 22 अगस्त की रात राजकोट से दिल्ली लाकर पूछताछ की। 35 वर्षीय तहसीन को 24 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, तहसीन और राजेश 15 साल से दोस्त थे। तहसीन ने राजेश को हमले से पहले 2,000 रुपये भेजे थे, जो संभवतः हमले की योजना को अंजाम देने के लिए थे। राजेश ने तहसीन को मुख्यमंत्री के निवास का वीडियो भी भेजा था। पूछताछ में तहसीन ने स्वीकार किया कि उसे राजेश की योजना की जानकारी थी। उसने बताया कि राजेश ने दिल्ली में “कुछ बड़ा” करने की बात कही थी, और उसने हर तरह का समर्थन देने का वादा किया था। पुलिस ने तहसीन के खिलाफ आपराधिक साजिश और हत्या के प्रयास में सहायता के आरोप में मामला दर्ज किया।
पुलिस ने खुलासा किया कि राजेश ने शुरू में सुप्रीम कोर्ट परिसर में हमला करने की योजना बनाई थी, लेकिन वहां की कड़ी सुरक्षा के कारण उसने यह विचार छोड़ दिया। इसके बाद उसने मुख्यमंत्री के निवास पर हमले की योजना बनाई। उसने एक छोटा चाकू न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक फल विक्रेता से लिया था, लेकिन कैंप कार्यालय की सुरक्षा देखकर उसने चाकू सिविल लाइन्स क्षेत्र में फेंक दिया। पुलिस इस चाकू को बरामद करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है। राजेश और तहसीन को 25 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की। इस घटना ने दिल्ली में सार्वजनिक अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। जन सुनवाई जैसे खुले कार्यक्रमों में सैकड़ों लोग हिस्सा लेते हैं, और इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था में खामियों को उजागर किया। हमले के बाद रेखा गुप्ता को जेड-श्रेणी की सीआरपीएफ सुरक्षा दी गई है। सीआरपीएफ ने 21 अगस्त से उनकी सुरक्षा संभाली, और उनके निवास व कार्यालय के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से संभाल लिया है और इसे और मजबूत किया है। रेखा गुप्ता ने हमले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, “इस सुबह जन सुनवाई के दौरान मुझ पर हुआ हमला न केवल मुझ पर, बल्कि दिल्ली की जनता की सेवा और कल्याण के लिए हमारे संकल्प पर कायराना हमला था। मैं इस हमले से शुरू में सदमे में थी, लेकिन अब बेहतर महसूस कर रही हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह जन सुनवाई कार्यक्रम जारी रखेंगी और दिल्ली की जनता के लिए काम करती रहेंगी। उनकी इस हिम्मत को लोगों ने सराहा, और कई नेताओं ने इस घटना की निंदा की।
आम आदमी पार्टी (आप) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध की जगह है, लेकिन हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।” आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी हिंसा को लोकतंत्र के खिलाफ बताया और मुख्यमंत्री की सुरक्षा की कामना की। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इसे “स्तब्धकारी” बताया और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों की आलोचना की। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग मंत्री परवेश साहब सिंह ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया। पुलिस जांच में अब तक यह सामने आया है कि राजेश का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। राजकोट के भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ 2017 से 2024 के बीच हमला और शराब रखने के पांच मामले दर्ज हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र था। दिल्ली बीजेपी ने संदेह जताया कि यह हमला मुख्यमंत्री के जनता से सीधे जुड़ाव को कमजोर करने की कोशिश हो सकती है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी इस मामले की जांच में शामिल हैं। पुलिस ने राजेश के मोबाइल फोन से मिले डेटा के आधार पर उसके 10 अन्य संपर्कों की जांच शुरू की है। राजकोट पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस ने पांच अन्य लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इस घटना ने जन सुनवाई जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त एस.बी.के. सिंह इस जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, और संसद की संयुक्त समिति भी सार्वजनिक अधिकारियों की सुरक्षा के मुद्दे पर विचार कर सकती है।
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