बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, बीजेपी का 30 साल का गढ़ ढहा
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी को 19,324 वोटों से हराकर जनसुराज की पहली जीत दर्ज की। 30 साल के गढ़ पर कब्जा, जीत के बाद पीके ने क्या कहा, पढ़ें पूरी खबर।

- प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में रचा इतिहास, जनसुराज की पहली जीत और बीजेपी की करारी हार
- बांकीपुर में पीके का जलवा: बीजेपी का 30 साल पुराना किला गिर गया, जीत के बाद क्या बोले प्रशांत किशोर
- प्रशांत किशोर ने बांकीपुर जीता, बीजेपी उम्मीदवार को 19 हजार वोटों से हराया
पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से हराकर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज की। यह जीत न सिर्फ जनसुराज के लिए ऐतिहासिक है बल्कि भाजपा के लगभग तीन दशक पुराने गढ़ पर कब्जा भी है। मतगणना के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह जीत बांकीपुर की जनता की है और बिहार की अगुवाई को लेकर एक संदेश भी। अब आगे क्या होगा, यह सवाल पूरे राज्य की राजनीति में गूंज रहा है।
बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का नतीजा सोमवार को सामने आया। जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने यहां से जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले जबकि नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट मिले। राजद की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें करीब 14,273 वोट मिले। यह जीत जनसुराज पार्टी की पहली चुनावी सफलता है और प्रशांत किशोर के राजनीतिक जीवन में एक बड़ा मोड़ भी।
यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। नितिन नवीन राज्यसभा में चले गए थे। बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 1995 से लेकर अब तक यह सीट लगातार भाजपा के पास रही थी। नितिन नवीन और उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने मिलकर कई बार यहां से जीत हासिल की थी।
बांकीपुर उपचुनाव का मतदान 30 जुलाई को हुआ था। मतदान प्रतिशत करीब 34.3 प्रतिशत रहा, जो पिछली विधानसभा चुनाव की तुलना में कम था। मतगणना शुरू होते ही प्रशांत किशोर आगे निकल गए और लगभग हर राउंड में अपनी बढ़त बनाए रखी। 15वें राउंड के आसपास उनकी जीत लगभग तय हो गई थी।
प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार काफी पहले शुरू कर दिया था। उन्होंने जनसभाओं, घर-घर संपर्क और बूथ स्तर पर संगठन बनाने पर जोर दिया। उनके अभियान का मुख्य फोकस रोजगार, शिक्षा, युवाओं का पलायन और शासन व्यवस्था पर था। उन्होंने इस उपचुनाव को सिर्फ विधायक चुनने का चुनाव नहीं बल्कि बिहार की अगुवाई को लेकर जनता का संदेश बताया।
भाजपा ने इस सीट को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना रखा था। पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं को प्रचार के लिए उतारा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई केंद्रीय और राज्य स्तर के नेताओं ने यहां प्रचार किया। इसके बावजूद पार्टी सीट बचाने में नाकाम रही। राजद ने भी रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे तीसरे स्थान पर सिमट गईं।
जीत के बाद प्रशांत किशोर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता बांकीपुर की जनता के विश्वास को सम्मान देना है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर रातोंरात बेंगलुरु नहीं बनेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में कुछ सुधार नजर आएंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह चुनाव सिर्फ विधायक चुनने का नहीं था। बांकीपुर की जनता ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दिया है कि बिहार को एक सक्षम और साफ-सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री की जरूरत है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता ने पहले ही एनडीए को पूर्ण बहुमत दिया है। अब उनसे अपेक्षा है कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के पलायन पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के 13 करोड़ लोगों ने उनका साथ दिया है, इसलिए राज्य को विशेष ध्यान मिलना चाहिए।
भाजपा की ओर से बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने परिणाम स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी विस्तृत समीक्षा करेगी। उन्होंने प्रशांत किशोर को बधाई दी और कहा कि बांकीपुर का विकास हमेशा उनकी प्राथमिकता रहेगा। राज्य मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी कहा कि भाजपा लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान करती है और ईवीएम या चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाती।
यह नतीजा बिहार की राजनीति के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह जनसुराज पार्टी की पहली जीत है। पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीती थी। दूसरी बात, भाजपा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरी गढ़ों में से एक पर कब्जा होने से पार्टी के अंदर आत्ममंथन की स्थिति बनी है। तीसरी बात, यह नतीजा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई पर भी सवाल खड़े करता है क्योंकि यह उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला बड़ा चुनावी परीक्षा था।
राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार में पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति से आगे बढ़ने का संकेत भी मान रहे हैं। कई युवा और शहरी मतदाताओं ने परिवर्तन की मांग करते हुए जनसुराज को समर्थन दिया। साथ ही, पारंपरिक भाजपा समर्थकों में भी कुछ असंतोष दिखने की बात कही जा रही है।
प्रशांत किशोर अब विधायक के रूप में बांकीपुर का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनका लक्ष्य सत्ता या ठेके नहीं बल्कि बिहार की बेहतरी है। जनसुराज ने गठबंधन न करने का रुख अपनाया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका गठबंधन बिहार की जनता के साथ है। भाजपा की ओर से समीक्षा होने वाली है। पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि इतने सुरक्षित गढ़ में हार के कारण क्या रहे। राजद भी इस नतीजे से सबक लेने की कोशिश कर सकती है क्योंकि उसकी उम्मीदवार दूर तीसरे स्थान पर रही।
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