संसद का मानसून सत्र: दूसरे दिन भी लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित

संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा।

Jul 21, 2026 - 12:40
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संसद का मानसून सत्र: दूसरे दिन भी लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित
Lok Sabha Proceedings, Monsoon Session
  • Parliament Monsoon Session Day 2: हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र का दूसरा दिन, लोकसभा की कार्यवाही स्थगित
  • मानसून सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा में हुआ भारी हंगामा, विपक्षी नारेबाजी के चलते कार्यवाही स्थगित
  • संसद मानसून सत्र: लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे के कारण स्थगित, विपक्ष का लगातार विरोध जारी

संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ गया। मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। परीक्षा धांधली, NEET पेपर लीक और अन्य ज्वलंत विषयों पर तत्काल चर्चा की मांग पर अड़े विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप (वेल में) आ गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बार-बार शांति और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील के बावजूद जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। सत्र के शुरुआती दिनों में ही बने इस राजनीतिक टकराव से साफ है कि आने वाले दिनों में भी विधायी कामकाज पर असर पड़ सकता है। 

संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी खींचतान देखने को मिल रही है। सत्र के दूसरे दिन लोकसभा की बैठक शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत जनहित के मुद्दों पर तुरंत चर्चा कराए जाने की मांग उठाई। प्रश्नकाल चलाने की पीठ की कोशिशों के बीच जब हंगामा बढ़ता गया और कई सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे, तब पीठासीन अधिकारी को सदन की कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा। 

मंगलवार सुबह 11:00 बजे जब लोकसभा की बैठक आयोजित हुई, तो कार्यसूची के अनुसार प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद पहले से ही अपनी रणनीति बनाकर पहुंचे थे।

नारेबाजी और वेल में उतरना: जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, विपक्षी सांसद अपने स्थानों से उठकर वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

पीठ की अपील: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तेजित सांसदों से अपने-अपने स्थानों पर जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नियम-प्रक्रिया के तहत सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का पूरा अवसर दिया जाएगा, लेकिन प्रश्नकाल के दौरान व्यवधान डालना उचित परंपरा नहीं है।

सदन की कार्यवाही का स्थगन: विपक्षी सदस्यों द्वारा तख्तियां दिखाए जाने और नारेबाजी जारी रखने के बाद अध्यक्ष ने भारी हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

इसी तरह का नजारा उच्च सदन (राज्यसभा) में भी देखने को मिला, जहां विपक्षी नेताओं ने कार्यस्थगन के नोटिस देकर अन्य सभी सूचीबद्ध कार्यों को रोककर पेपर लीक और संबंधित मुद्दों पर नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की।

सरकार और सत्ता पक्ष का बयान: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार नियमों के तहत किसी भी विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन को चलाने में रुचि नहीं रखता और केवल हंगामे के जरिए विधायी कार्यों में बाधा डालना चाहता है।

विपक्ष का पक्ष: विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्रों, युवाओं और देश की जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के प्रवक्ताओं ने कहा कि जब तक सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चिंताओं पर संसद में जवाब नहीं देती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

संसद के शुरुआती दिनों में ही कार्यवाही बार-बार बाधित होने से महत्वपूर्ण बजटीय, विधायी और नीतिगत विधेयकों पर होने वाली चर्चा पिछड़ रही है। सरकार द्वारा इस सत्र में पेश किए जाने वाले कई अहम संशोधनों और नए कानूनों पर संसदीय बहस का समय कम हो रहा है। साथ ही, शून्यकाल और प्रश्नकाल न चल पाने के कारण आम जनता से जुड़े क्षेत्रीय व राष्ट्रीय मुद्दे भी पटल पर नहीं आ पा रहे हैं। 

आगामी दिनों में मानसून सत्र के सुचारू संचालन को लेकर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति कार्य मंत्रणा समिति (BAC) और सभी प्रमुख दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ अनौपचारिक बैठक कर सकते हैं। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति का कोई रास्ता निकलता है, तो ही सदन में सामान्य कामकाज संभव हो सकेगा। अन्यथा, आने वाले कार्य दिवसों में भी हंगामेदार बैठकों के आसार बने हुए हैं।

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