New Delhi: भारत-पाकिस्तान सीजफायर घोषणा के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी पर ऑनलाइन हमला, IAS-IPS और राजनेताओं का समर्थन। 

10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण सीजफायर समझौते की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम ....

May 13, 2025 - 13:18
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New Delhi: भारत-पाकिस्तान सीजफायर घोषणा के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी पर ऑनलाइन हमला, IAS-IPS और राजनेताओं का समर्थन। 

नई दिल्ली: 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण सीजफायर समझौते की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना था। इस समझौते की घोषणा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने की, जिन्होंने बताया कि दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया। समझौते के तहत, दोनों पक्षों ने 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी सैन्य कार्रवाइयों और गोलीबारी को रोकने पर सहमति जताई। हालांकि, इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने की खबरें सामने आईं, जिसके बाद मिसरी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।

इस घोषणा के बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना और अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। कुछ यूजर्स, विशेष रूप से वे जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की मांग कर रहे थे, ने मिसरी को "कायर" और "देशद्रोही" जैसे शब्दों से निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ट्रोलर्स ने उनकी बेटी डिडॉन मिसरी को भी निशाना बनाया, जो लंदन में हर्बर्ट स्मिथ फ्रीहिल्स नामक लॉ फर्म में कार्यरत हैं। डिडॉन पर म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए अपमानजनक टिप्पणियां की गईं और उनकी निजी जानकारी को सार्वजनिक किया गया, जिसे "डॉक्सिंग" के रूप में जाना जाता है। इसके चलते मिसरी को अपना X अकाउंट निजी करना पड़ा।

  • IAS और IPS संगठनों का समर्थन:

ऑनलाइन उत्पीड़न की इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) संगठनों ने मिसरी के समर्थन में बयान जारी किए। IAS संगठन ने X पर लिखा, "हम विदेश सचिव श्री विक्रम मिसरी और उनके परिवार के साथ एकजुटता से खड़े हैं। सत्यनिष्ठा के साथ कर्तव्य निभाने वाले सिविल सेवकों पर अनुचित व्यक्तिगत हमले अत्यंत खेदजनक हैं। हम सार्वजनिक सेवा की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" इसी तरह, IPS संगठन ने कहा, "हम विदेश सचिव श्री विक्रम मिसरी और उनके परिवार के खिलाफ निंदनीय व्यक्तिगत हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। कर्तव्यनिष्ठ सिविल सेवकों पर ऐसे अनुचित हमले अस्वीकार्य हैं।"

  • राजनेताओं और पूर्व अधिकारियों का समर्थन:

कई प्रमुख राजनेताओं और पूर्व राजनयिकों ने भी मिसरी के समर्थन में आवाज उठाई। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा, "विक्रम मिसरी एक ईमानदार, मेहनती राजनयिक हैं जो हमारे देश के लिए अथक कार्य करते हैं। सिविल सेवक कार्यपालिका के तहत काम करते हैं और उन्हें सरकार या राजनीतिक नेतृत्व के निर्णयों के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।"कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने NDTV को दिए साक्षात्कार में मिसरी की प्रशंसा करते हुए कहा, "विक्रम मिसरी ने भारत-पाकिस्तान संबंधों के सबसे तनावपूर्ण क्षणों में शानदार काम किया है। उनके खिलाफ ट्रोलिंग बेतुकी है।"पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने X पर लिखा, "विक्रम मिसरी और उनके परिवार पर सीजफायर घोषणा को लेकर ट्रोलिंग करना पूरी तरह शर्मनाक है। एक समर्पित राजनयिक के रूप में मिसरी ने भारत की सेवा पेशेवराना ढंग से की है। उनकी बेटी को डॉक्सिंग और अपमान करना हर मर्यादा को तोड़ता है। इस जहरीली नफरत को रोका जाना चाहिए।"समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी मिसरी का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां देश के लिए दिन-रात काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल तोड़ती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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  • पृष्ठभूमि और विवाद:

यह सीजफायर समझौता ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद आया, जो पहलगाम हमले के जवाब में शुरू किया गया था। हालांकि, कुछ लोगों ने इस समझौते को भारत की ओर से "कमजोरी" के रूप में देखा, जिसके चलते मिसरी को निशाना बनाया गया। मिसरी ने स्पष्ट किया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत के माध्यम से हुआ, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे अमेरिका द्वारा मध्यस्थता वाला बताया।

विक्रम मिसरी के खिलाफ ऑनलाइन हमले न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी हैं, बल्कि यह सिविल सेवकों के प्रति समाज के एक वर्ग की असहिष्णुता को भी दर्शाते हैं। IAS, IPS, और प्रमुख राजनेताओं का समर्थन इस बात का संकेत है कि सिविल सेवकों की गरिमा और उनके कर्तव्यों की रक्षा के लिए एकजुटता आवश्यक है। इस घटना ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऑनलाइन उत्पीड़न को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।

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