बिहार सरकार का फैसला: राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस, नया आवास आवंटित। 

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित लंबे समय से उनके कब्जे वाले सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस जारी

Nov 26, 2025 - 12:32
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बिहार सरकार का फैसला: राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस, नया आवास आवंटित। 
बिहार सरकार का फैसला: राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस, नया आवास आवंटित। 

पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित लंबे समय से उनके कब्जे वाले सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2025 को जारी किया। राबड़ी देवी, जो वर्तमान में बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं, को उनके पद के अनुसार 39 हार्डिंग रोड पर नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है। इसी क्रम में उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के नेता तेजप्रताप यादव को भी 26 एम स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का आदेश मिला है, क्योंकि वे अब विधायक नहीं हैं। यह फैसला नई एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद सरकारी आवासों के पुनर्वितरण का हिस्सा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि सरकार ने इसे नियमों का पालन बताया है। यह घटना बिहार की राजनीति में फिर से सियासी तलवारें भांजने का कारण बनी हुई है।

10 सर्कुलर रोड का बंगला लालू प्रसाद यादव परिवार का राजनीतिक और पारिवारिक केंद्र रहा है। यह आवास राबड़ी देवी को 2005 में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद मिला था। उसके बाद 2018 में उन्हें विधान परिषद में विपक्ष के नेता के पद पर बने रहने के कारण इसे जारी रखने की अनुमति दी गई। यहां लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, उनके छोटे बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और अन्य परिवारजन रहते थे। यह जगह आरजेडी की रणनीति सभाओं, मीडिया ब्रीफिंग और नेताओं के मिलने-जुलने का अड्डा थी। पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से यह बंगला यादव परिवार का अभिन्न हिस्सा रहा। नोटिस के अनुसार, राबड़ी देवी को 15 दिनों के अंदर इसे खाली करना होगा। भवन निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कदम पटना हाईकोर्ट के 2019 के फैसले के अनुपालन में है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने को सार्वजनिक धन का दुरुपयोग बताया गया था। उस समय अदालत ने सात पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी कर आवास खाली करने का आदेश दिया था, जिनमें राबड़ी देवी भी शामिल थीं।

39 हार्डिंग रोड पर नया आवास विधान परिषद विपक्ष के नेता के पद के लिए निर्धारित श्रेणी का है। यह एक तीन एकड़ का विशाल बंगला है, जो सर्कुलर रोड से अधिक विलासितापूर्ण माना जाता है। अधिकारी ने कहा कि यह आवंटन राबड़ी देवी के वर्तमान पद के अनुरूप है और इसमें कोई कमी नहीं की गई है। हालांकि, आरजेडी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव परिवार को अपमानित करने की कोशिश है। राबड़ी देवी ने खुद इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके समर्थक इसे नितीश कुमार सरकार की 'सुशासन' की विडंबना बता रहे हैं। पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फैसला भाजपा के दबाव में लिया गया, क्योंकि एनडीए ने हालिया विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। आरजेडी को महज 25 सीटें मिलीं, जो 2020 के 75 से काफी कम हैं। इस हार के बाद यादव परिवार पर दबाव बढ़ गया है।

तेजप्रताप यादव का मामला इससे अलग लेकिन जुड़ा हुआ है। वे 26 एम स्ट्रैंड रोड पर मंत्री रहते हुए रह रहे थे। अब यह बंगला अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रोशन को आवंटित कर दिया गया है। तेजप्रताप अब विधायक नहीं हैं, क्योंकि वे 2025 चुनाव में हार गए। इसके अलावा, वे जनवरी 2025 में एक सोशल मीडिया पोस्ट विवाद के कारण आरजेडी से निष्कासित हो चुके हैं। लालू प्रसाद ने उन्हें छह वर्ष के लिए परिवार और पार्टी से बाहर कर दिया था। तेजप्रताप ने जनशक्ति जनता दल नामक नई पार्टी बना ली, लेकिन चुनाव में सफलता नहीं मिली। विभाग ने उन्हें भी 15 दिनों में बंगला खाली करने का नोटिस दिया। तेजप्रताप ने कहा कि वे अदालत जाएंगे, क्योंकि यह उनका हक था। उनका बंगला भी यादव परिवार के राजनीतिक नेटवर्क का हिस्सा था, जहां वे अपनी नई पार्टी की गतिविधियां चलाते थे।

इस फैसले पर आरजेडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा, "राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वर्तमान में विपक्ष की नेता। किस नियम के तहत आवास बदला गया? यह भाजपा का प्रभाव लगता है। सत्ता के धनी लोग नाममात्र के हैं, जबकि पोर्टफोलियो वाले अनुभवी।" लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नितीश कुमार को निशाना बनाया। उन्होंने लिखा, "यह सुशासन बाबू का विकास मॉडल है। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव को अपमानित करना प्राथमिकता है। आप उन्हें घर से निकाल सकते हैं, लेकिन बिहार की जनता के दिलों से कैसे निकालेंगे? कम से कम उनकी सेहत और राजनीतिक कद का सम्मान तो करें।" रोहिणी ने नोटिस की कॉपी शेयर की, जो वायरल हो गई। तेजस्वी यादव ने भी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के बजाय बदले पर लगी है।

एनडीए सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। भवन निर्माण मंत्री ने कहा कि यह पुनर्वितरण नियमित प्रक्रिया है। सभी मंत्रियों को नए आवास आवंटित किए गए हैं। उदाहरण के लिए, कृषि मंत्री राम कृपाल यादव को 43 हार्डिंग रोड, आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद को 12 हार्डिंग रोड, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद को 3 सर्कुलर रोड, सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार को 27 हार्डिंग रोड, गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार को 21 हार्डिंग रोड, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री संजय कुमार सिंह को 13 हार्डिंग रोड और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को 24 एम स्ट्रैंड रोड मिला है। यह आवंटन चुनावी जीत के बाद नई सरकार के संगठन का हिस्सा है। नितीश कुमार ने 26 नवंबर को दसवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए।

यह घटना बिहार की राजनीति के पुराने घावों को फिर से कुरेद रही है। लालू प्रसाद 1997 में चारा घोटाले के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर राबड़ी देवी को सत्ता सौंपी थी। वे 1997 से 2005 तक मुख्यमंत्री रहीं। यादव परिवार पर कई बार सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप लगे। 2019 के हाईकोर्ट फैसले के बाद कई पूर्व सीएम जैसे जगन्नाथ मिश्र, जीतन राम मांझी ने आवास खाली किए। राबड़ी देवी को विपक्ष नेता के पद पर छूट मिली थी, लेकिन अब नई सरकार ने इसे सख्ती से लागू किया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एनडीए की जीत का प्रतीक है। भाजपा ने कहा कि यह पारदर्शिता का कदम है। आरजेडी कार्यकर्ता पटना में प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #EvictLaluFamily और #PoliticalVendetta ट्रेंड कर रहे हैं।

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