पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह से वापस ली Z+ सिक्योरिटी,  मचा सियासी घमासान

जालंधर में हरभजन सिंह के आवास के बाहर का दृश्य रविवार को पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ समय पहले तक सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय निवासियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच य

Apr 26, 2026 - 11:53
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पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह से वापस ली Z+ सिक्योरिटी,  मचा सियासी घमासान
पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह से वापस ली Z+ सिक्योरिटी,  मचा सियासी घमासान

  • पार्टी में बगावत और सदस्यता पर संकट: आप सांसद हरभजन सिंह के आवास से सुरक्षाकर्मी हटाए जाने के पीछे के गहरे निहितार्थ
  • दलबदल की चर्चा और प्रशासनिक कार्रवाई का मेल: पूर्व क्रिकेटर की सुरक्षा वापसी को राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया अनुशासनात्मक कदम

पंजाब की राजनीति में रविवार की सुबह एक बड़ी खबर के साथ शुरू हुई, जब मान सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली। इस फैसले के तुरंत बाद जालंधर स्थित उनके आवास और उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मियों के जत्थे को वापस बुला लिया गया। इस कदम को राज्य के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसे सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इसके पीछे केवल तकनीकी कारण नहीं हैं। राज्य सरकार द्वारा अचानक उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर उन चर्चाओं को बल दे रहा है जिनमें पार्टी के भीतर बड़े बिखराव की आशंका जताई जा रही है।

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुनबे में मची इस खलबली की जड़ें उन दावों में छिपी हैं, जो हाल ही में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले सांसदों द्वारा किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, हरभजन सिंह उन सांसदों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं जो वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और कथित तौर पर पार्टी बदलने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, हरभजन सिंह ने अभी तक इन खबरों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और न ही उन्होंने पार्टी छोड़ने की कोई औपचारिक घोषणा की है। इसके बावजूद, सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा में इतनी बड़ी कटौती करना यह दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों में उनके प्रति अविश्वास बढ़ गया है। पंजाब की राजनीति में सुरक्षा को अक्सर प्रतिष्ठा और विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, ऐसे में इस कटौती ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी के भीतर अब सब कुछ सामान्य नहीं रह गया है।

Z+ सिक्योरिटी का महत्व और प्रोटोकॉल

Z+ श्रेणी की सुरक्षा भारत में दी जाने वाली सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। इसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिनमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो और स्थानीय पुलिस बल शामिल होता है। किसी भी विशिष्ट व्यक्ति के लिए यह सुरक्षा कवर खतरे के आकलन (Threat Perception) के आधार पर तय किया जाता है। पंजाब में हाल के वर्षों में कई राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों की सुरक्षा श्रेणी में फेरबदल हुआ है, जिसे अक्सर सत्ताधारी दल की प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जाता है।

जालंधर में हरभजन सिंह के आवास के बाहर का दृश्य रविवार को पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ समय पहले तक सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहता था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय निवासियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर क्यों अचानक सुरक्षा वापस ली गई। यह पहली बार नहीं है जब पंजाब सरकार ने अपने ही किसी सांसद या प्रभावशाली नेता की सुरक्षा में इस तरह बदलाव किया हो। इससे पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा को लेकर भी इसी तरह का विवाद सामने आया था, जब उनकी राज्य सरकार वाली सुरक्षा वापस ले ली गई थी और बाद में उन्हें केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। हरभजन सिंह के मामले में भी अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे केंद्र सरकार के संपर्क में हैं और क्या उन्हें दिल्ली से नया सुरक्षा कवच प्राप्त होगा। राजनीतिक रूप से यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय की ओर इशारा करता है। पंजाब में पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी इस स्थिति को लेकर गहरा रोष देखने को मिल रहा है। जालंधर, फगवाड़ा और लुधियाना जैसे शहरों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है जिन पर पाला बदलने का संदेह है। हरभजन सिंह के आवास के बाहर भी प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस भरोसे के साथ राज्य की जनता ने उन्हें चुना था, उस भरोसे के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। पुलिस प्रशासन इन विरोध प्रदर्शनों पर नजर रख रहा है, लेकिन सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब इन सांसदों के आवासों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंताएं भी जताई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार का यह फैसला केवल एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि सुरक्षा का वितरण जरूरत के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल पद के आधार पर। हालांकि, विपक्ष इस कार्रवाई को 'राजनीतिक प्रतिशोध' का नाम दे रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब कोई नेता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाता है या अलग राय रखता है, तो उसकी सुरक्षा और सुविधाओं को निशाना बनाया जाता है। इस पूरे मामले ने पंजाब विधानसभा में भी हंगामे के आसार पैदा कर दिए हैं, क्योंकि सुरक्षा वापसी का मुद्दा अब सीधे तौर पर सांसदों के विशेषाधिकारों और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ गया है। आगामी समय में पंजाब की राजनीति किस दिशा में मुड़ेगी, यह काफी हद तक इन नाराज सांसदों के अगले कदम पर निर्भर करेगा। हरभजन सिंह की चुप्पी ने इस सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। यदि वे भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल होने का निर्णय लेते हैं, तो यह पंजाब में आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं दूसरी ओर, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी उपराष्ट्रपति से मिलकर इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाने के संकेत दिए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व अब रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपना रहा है। सुरक्षा कटौती इस लंबी लड़ाई का केवल पहला चरण हो सकता है, जो आने वाले दिनों में और भी कानूनी और राजनीतिक जटिलताओं को जन्म देगा।

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