India vs Afghanistan T20: वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में न चुनने पर भड़के के. श्रीकांत, बोले- फैसले से घर में भी मच गया था घमासान

अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मैच में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न किए जाने पर पूर्व भारतीय कप्तान के. श्रीकांत ने टीम प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है।

Sep 15, 2026 - 13:40
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India vs Afghanistan T20: वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में न चुनने पर भड़के के. श्रीकांत, बोले- फैसले से घर में भी मच गया था घमासान
  • India vs Afghanistan T20: वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में न चुनने पर भड़के के. श्रीकांत, बोले- फैसले से घर में भी मच गया था घमासान
  • वैभव सूर्यवंशी को बाहर बैठाने पर भड़के पूर्व मुख्य चयनकर्ता के. श्रीकांत, पत्नी के गुस्से और मैच छोड़कर जाने का सुनाया रोचक किस्सा
  • IND vs AFG T20 Series: युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका न मिलने पर टीम प्रबंधन पर उठे सवाल, कृष्णमाचारी श्रीकांत ने लगाई क्लास
  • के. श्रीकांत का चयन पर तीखा वार: 'जब युवा टैलेंट को मौका नहीं देना था तो स्क्वॉड में क्यों रखा?' वैभव सूर्यवंशी पर बहस तेज

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और राष्ट्रीय चयन समिति के पूर्व प्रमुख कृष्णमाचारी श्रीकांत ने अफगानिस्तान के खिलाफ आयोजित टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के पहले मैच में युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश (प्लेइंग इलेवन) में जगह न मिलने पर सख्त नाराजगी जताई है। श्रीकांत ने टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की रणनीतिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आप किसी असाधारण युवा खिलाड़ी को राष्ट्रीय दल में शामिल करते हैं, तो उसे बेंच पर बैठाए रखने के बजाय सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका दिया जाना चाहिए।

अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य श्रीकांत ने एक खेल परिचर्चा के दौरान यह खुलासा किया कि इस फैसले का असर केवल क्रिकेट पंडितों पर ही नहीं पड़ा, बल्कि उनके अपने घर के भीतर भी भारी हंगामा मच गया। श्रीकांत के अनुसार, जैसे ही टॉस के बाद टीम शीट सामने आई और यह स्पष्ट हुआ कि युवा बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज को बाहर रखा गया है, उनके पारिवारिक सदस्य भी प्रबंधन के इस रुख से बेहद नाराज हो गए।

  • 'पत्नी टीवी छोड़कर चली गईं फिल्म देखने' - श्रीकांत ने साझा किया वाकया

श्रीकांत ने अपने ट्रेडमार्क मजाकिया लेकिन तल्ख अंदाज में उस पल का ब्योरा दिया जब मैच शुरू होने वाला था। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार उत्सुकता के साथ टेलीविजन स्क्रीन के सामने बैठा था ताकि युवा बल्लेबाज को अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजी करते देखा जा सके। श्रीकांत ने कहा कि जब उनकी पत्नी को पता चला कि अंतिम एकादश में उनका नाम ही नहीं है, तो वे बुरी तरह भड़क गईं।

श्रीकांत ने कहा, "मेरी पत्नी मैच देखने के लिए बैठी थीं, लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि लड़के को प्लेइंग इलेवन में नहीं चुना गया है, उन्होंने गुस्से में चिल्लाना शुरू कर दिया। वे इतनी खफा हुईं कि टीवी बंद कर सीधे उठकर चली गईं और बोलीं कि मुझे यह मैच नहीं देखना, मैं जाकर फिल्म देखूंगी।" पूर्व मुख्य चयनकर्ता ने जोड़ा कि यह केवल उनके घर की बात नहीं है, बल्कि देश भर के उन लाखों क्रिकेट प्रेमियों की यही भावना थी जो घरेलू और अंडर-19 स्तर पर रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करने वाले युवा बल्लेबाज को भारत की नीली जर्सी में खेलते देखने के लिए बेताब थे।

  • घरेलू सर्किट में लगातार रनों का अंबार लगा रहे हैं वैभव

वैभव सूर्यवंशी भारतीय घरेलू क्रिकेट और जूनियर स्तर पर पिछले कुछ समय से सबसे चर्चित युवा प्रतिभाओं में शुमार रहे हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट और आयु वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली और लंबी पारियां खेलने की क्षमता से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था। बेहद कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने और तेज गेंदबाजों के खिलाफ निडर होकर शॉट लगाने की उनकी तकनीक को देखते हुए ही उन्हें इस द्विपक्षीय टी20 श्रृंखला के लिए राष्ट्रीय टीम के दल में शामिल किया गया था।

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना था कि अफगानिस्तान जैसी स्पिन-अनुकूल और प्रतिस्पर्धी टीम के खिलाफ घरेलू मैदानों पर द्विपक्षीय श्रृंखला युवाओं को परखने का सबसे आदर्श मंच होती है। आईसीसी टूर्नामेंटों या बड़ी विदेश दौरों से पहले द्विपक्षीय श्रृंखलाओं का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि बेंच स्ट्रेंथ को वास्तविक मैच दबाव में परखा जाए। इसी संदर्भ में श्रीकांत का तर्क था कि यदि अनुभवी खिलाड़ियों को ही लगातार खिलाना था, तो युवा खिलाड़ी को ड्रेसिंग रूम में पानी पिलाने के लिए टीम में क्यों रखा गया।

  • टीम प्रबंधन के संयोजन पर पूर्व चयनकर्ता के सवाल

श्रीकांत ने टीम संयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर साहसिक निर्णय लेने की आदत डालनी होगी। उन्होंने तर्क दिया कि आधुनिक टी20 क्रिकेट का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है, जहां पहली ही गेंद से आक्रामक खेल दिखाने वाले बल्लेबाजों की जरूरत होती है। जब आपके पास ऐसा बल्लेबाज मौजूद है जो पहली ही गेंद से गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ने की क्षमता रखता है, तो उसे संरक्षण देने के नाम पर बाहर बैठाना उसकी लय को प्रभावित कर सकता है।

पूर्व चयनकर्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में जब भी भारतीय क्रिकेट ने कम उम्र के खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाया है, चाहे वह सचिन तेंदुलकर हों या कोई अन्य बड़ा नाम, उसका परिणाम टीम के पक्ष में ही रहा है। श्रीकांत का मानना है कि ड्रेसिंग रूम का अनुभव अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के वास्तविक दबाव, फील्ड प्लेसमेंट और क्राउड प्रेशर को समझने का असली तरीका केवल 22 गज की पट्टी पर उतरकर ही हासिल हो सकता है।

  • आगामी मैचों में अंतिम एकादश में बदलाव की मांग

पहले मैच में टीम प्रबंधन द्वारा चुने गए बल्लेबाजी क्रम और रणनीति के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या शेष मैचों में टीम संयोजन में फेरबदल किया जाएगा। क्रिकेट हलकों में यह मांग जोर पकड़ रही है कि श्रृंखला के बाकी बचे मुकाबलों में रोटेशन नीति अपनाते हुए युवा चेहरे को शीर्ष क्रम में आजमाया जाए।

अफगानिस्तान के खिलाफ यह श्रृंखला भारत के लिए आगामी बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारी के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला मानी जा रही है। ऐसे में पूर्व कप्तान और वरिष्ठ दिग्गजों द्वारा उठाए गए इन सवालों का दबाव निश्चित रूप से टीम प्रबंधन और कप्तान पर पड़ेगा। क्रिकेट प्रेमी यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि क्या अगले मैच के टॉस के समय टीम शीट में युवा बल्लेबाज को वह बहुप्रतीक्षित कैप सौंपी जाती है या नहीं।

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