Asian Games Archery: भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने रचा इतिहास, वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर जीता गोल्ड मेडल
एशियाई खेलों में भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को रोमांचक फाइनल में हराकर गोल्ड मेडल बरकरार रखा। ज्योति सुरेखा, चिकिता और पृथिका ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की।

- Asian Games: चीन को फाइनल में हराकर भारत की महिला तीरंदाजों का जलवा, बरकरार रखा स्वर्ण पदक
- Asian Games Gold: ज्योति सुरेखा, चिकिता और पृथिका की तिकड़ी का कमाल, एशियाई खेलों में फिर लहराया तिरंगा
- Indian Archery Gold: महिला कंपाउंड टीम का ऐतिहासिक प्रदर्शन, विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी के साथ भारत को स्वर्ण
एशियाई खेलों के तीरंदाजी मुकाबलों में भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने अपना ऐतिहासिक वर्चस्व बरकरार रखते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारतीय तिकड़ी ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपर्थी और पृथिका प्रदीप ने शानदार और सटीक निशानों का मुजाहिरा पेश करते हुए प्रतिद्वंद्वी चीन की टीम को शिकस्त दी। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल अपने पिछले खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया, बल्कि टीम इवेंट में स्थापित विश्व रिकॉर्ड स्कोर की आधिकारिक रूप से बराबरी भी कर ली।
टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबले में दोनों टीमों के बीच शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला। हालांकि, भारतीय तीरंदाजों ने अत्यधिक दबाव के पलों में संयम और तकनीक का शानदार समन्वय दिखाया। चार दौर के इस रोमांचक मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने लगभग हर सिरे पर 10-पॉइंटर स्कोर करते हुए चीनी चुनौती को पस्त कर दिया। अंतिम छोर तक भारतीय टीम ने अपनी बढ़त को मजबूती से कायम रखा और शीर्ष पोडियम पर जगह बनाई।
- विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी कर रचा इतिहास
इस फाइनल की सबसे बड़ी खासियत भारतीय तिकड़ी द्वारा बनाया गया कुल स्कोर रहा। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता तनिपर्थी और पृथिका प्रदीप ने सटीक तालमेल के साथ तीरों को निशाने के बिल्कुल केंद्र में साधा। मैच के दौरान भारतीय टीम का स्कोर अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी महासंघ द्वारा मान्य कंपाउंड महिला टीम स्पर्धा के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी पर पहुंच गया।
कंपाउंड तीरंदाजी में अत्यधिक सटीकता की दरकार होती है, जहां हवा की गति और दबाव के बीच 50 मीटर की दूरी से 10-रिंग को भेदना होता है। भारतीय टीम ने चारों सेटों के दौरान लगभग त्रुटिहीन प्रदर्शन किया। लगातार इनर 10s (X) लगाकर उन्होंने चीनी तीरंदाजों पर शुरुआती राउंड से ही मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया था, जिससे चीनी टीम अंत तक उबर नहीं पाई।
- अनुभवी ज्योति सुरेखा और युवा ऊर्जा का बेहतरीन तालमेल
इस स्वर्णिम सफलता में अनुभवी तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम का नेतृत्व बेहद महत्वपूर्ण रहा। कई अंतरराष्ट्रीय पदकों और विश्व प्रतियोगिताओं का अनुभव रखने वाली ज्योति ने टीम को हर मुश्किल क्षण में संभाला। शुरुआती तीरों में जब भी दबाव की स्थिति बनी, ज्योति के शांत स्वभाव और सटीक 10-पॉइंटर निशानों ने युवा साथियों का आत्मविश्वास बढ़ाया।
वहीं, टीम की युवा सदस्य चिकिता तनिपर्थी और पृथिका प्रदीप ने बड़े मंच के दबाव को पूरी तरह दरकिनार करते हुए असाधारण प्रदर्शन किया। चिकिता ने तेज हवाओं के बीच भी अपनी रिलीज तकनीक को नियंत्रित रखा, जबकि पृथिका ने लगातार उच्च स्कोर वाले तीर दागकर चीन की वापसी की हर कोशिश को नाकाम कर दिया। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारत में कंपाउंड तीरंदाजी की नई पीढ़ी कितनी परिपक्व और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो चुकी है।
- फाइनल में चीनी चुनौती को कैसे किया ध्वस्त
प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में चीन की टीम ने भी अच्छी शुरुआत की थी और पहले सेट में भारतीय अंकों का पीछा करने का प्रयास किया। लेकिन दूसरे सेट से भारतीय तिकड़ी ने अपने खेल का स्तर काफी ऊंचा कर दिया।
पहला चरण: भारतीय टीम ने ठोस शुरुआत की और मामूली बढ़त हासिल की।
मध्य चरण (दूसरा व तीसरा सेट): ज्योति और साथियों ने लगातार परफेक्ट 10s लगाए। हवा के रुख को भांपते हुए किए गए इन सटीक प्रहारों ने भारत की बढ़त को मजबूत अंतर में बदल दिया।
अंतिम चरण: अंतिम सेट में चीन को वापसी के लिए गलतियों की जरूरत थी, लेकिन भारतीय तिकड़ी ने कोई ढील नहीं दी और रिकॉर्ड स्तर के कुल योग के साथ मैच अपने नाम कर लिया।
- भारत में कंपाउंड तीरंदाजी का बढ़ता दबदबा
भारतीय तीरंदाजी के लिए एशियाई खेलों का यह स्वर्ण पदक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हाल के वर्षों में भारत ने विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप और महाद्वीपीय स्तर पर कंपाउंड वर्ग में लगातार शीर्ष स्थान हासिल किया है।
एशियाई स्तर पर दक्षिण कोरिया, चीनी ताइपे और चीन जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत देशों के प्रभुत्व को तोड़ते हुए भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यह लगातार दूसरा अवसर है जब एशियाई खेलों में भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम रखा है, जो देश के प्रशिक्षण ढांचे, खेल विज्ञान और जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास की मजबूती को साबित करता है।
इस स्वर्णिम प्रदर्शन के बाद खेल प्रेमियों, भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल प्रशंसकों की ओर से तीरंदाजों को बधाई संदेश मिल रहे हैं। ज्योति सुरेखा, चिकिता और पृथिका का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन आगामी वैश्विक आयोजनों के लिए भी भारतीय तीरंदाजी के बढ़ते हौसले की गवाही देता है।
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